आवारा पशुओं पर नियंत्रण को नसबंदी ही एकमात्र विकल्प: 12 राज्यों के वैज्ञानिकों का साझा मंथन
आईवीआरआई बरेली में देश के 12 राज्यों के कृषि वैज्ञानिकों ने बैठक कर बंदर, जंगली सुअर और कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए नसबंदी को एकमात्र प्रभावी उपाय बताया। बैठक में फीड, पशु स्वास्थ्य, प्रजनन और तकनीकी प्रशिक्षण से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। वैज्ञानिकों ने टिकाऊ कृषि और पर्यावरण संतुलन के लिए तकनीक आधारित समाधान अपनाने पर जोर दिया।
-आरके सिंह-
बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), बरेली में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की बैठक में देश के 12 राज्यों से आए कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों ने बंदरों, जंगली सूअरों और आवारा कुत्तों की लगातार बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए नसबंदी को ही एकमात्र प्रभावी समाधान बताया। यह चर्चा "विकसित भारत 2047" दृष्टिकोण के तहत हुई तीसरी राष्ट्रीय इंटरफेस बैठक में हुई, जिसमें पुणे, जबलपुर, हैदराबाद और बेंगलुरु स्थित कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थानों के विशेषज्ञ भी जुड़े।
बैठक का आयोजन हाइब्रिड मोड में हुआ, जिसमें वैज्ञानिकों ने फील्ड स्तर पर सामने आ रही समस्याओं और समाधानों पर गहन विमर्श किया।
निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने दिए कई सुझाव
आईवीआरआई निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने बैठक उपरांत बताया कि वैज्ञानिकों ने पशु स्वास्थ्य, प्रजनन, फीड एवं चारा प्रबंधन, और वन्य व आवारा पशु नियंत्रण पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए। चर्चा का प्रमुख बिंदु रहे-
फीड व चारा प्रबंधन: साइलेज यूनिट, टीएमआर मशीन, ड्राई मैटर कैलकुलेटर, क्षेत्रीय खनिज मिश्रण और कम लागत वाला पोषण सॉफ़्टवेयर।
पशु स्वास्थ्य: एलएसडी, ब्लूटंग, मैस्टाइटिस जैसे रोगों के वैक्सीन व निदान किट।
प्रजनन प्रबंधन: सेक्स-सार्टेड सीमेन की उपलब्धता, नस्ल शुद्ध बकरियों की जरूरत, गिर गायों में बांझपन की पहचान।
वन्य/आवारा पशु नियंत्रण: बंदर, जंगली सुअर और कुत्तों की नसबंदी को ही नियंत्रण का टिकाऊ उपाय माना गया।
वैज्ञानिकों ने जताई तकनीकों की जरूरत
संयुक्त निदेशक डॉ. रूपसी तिवारी ने केवीके के कार्मिकों, पशुपालकों व चिकित्सकों के लिए प्रायोगिक प्रशिक्षण, टीकाकरण, कृमिनाशक, खनिज मिश्रण, बाईपास पोषक तत्व जैसी तकनीकों की उपलब्धता पर ज़ोर दिया।
प्रौद्योगिकी प्रसार में कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक (कृषि प्रसार) डॉ. राजबीर सिंह ने कहा कि जलवायु साक्षरता, मिथेन शमन तकनीक और सेक्स-सार्टेड सीमेन जैसी तकनीकों को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाना ज़रूरी है।
बैठक में डॉ. बबलू कुमार, डॉ. बृजेश कुमार, डॉ. एलसी चौधरी, डॉ. अनुज चौहान सहित पुणे, जबलपुर, हैदराबाद और बेंगलुरु के अटारी निदेशकों ने क्षेत्रीय अनुभव साझा किए।
इंटरएक्टिव सत्र में केवीके प्रतिनिधियों व एसएमएस वैज्ञानिकों ने प्रश्न पूछे, जिनका समाधान विशेषज्ञों ने तत्परता से किया।