फतेहपुर सीकरी में आवारा आतंक: दो सांडों की लड़ाई से फैली अफरा-तफरी, पर्यटक बाल-बाल बचे

फतेहपुर सीकरी (आगरा)। पर्यटन नगरी फतेहपुर सीकरी में आवारा गोवंश का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। विगत दिवस पर्यटकों के लिए विकसित गुलदस्ता पार्किंग में दो सांड आपस में भिड़ गए। लड़ाई इतनी उग्र थी कि गोल्फ कार्ट के समीप लगी बैरिकेटिंग टूट गई, वहीं कैंटीन पर रखी कुर्सियां तितर-बितर हो गईं। घटना के दौरान टूरिस्ट गाइड और पर्यटकों में अफरा-तफरी मच गई, गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई। फतेहपुर सीकरी बड़ा पर्यटन केंद्र है। यहां हर रोज घरेलू और विदेशई पर्यटकों का आवागमन रहता है। ऐसे पर्यटन केंद्रों पर आवारा सांडों का खुले में विचरण करना कई विभागों की लापरवाही को उजागर कर रहा है।

Feb 21, 2026 - 12:42
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फतेहपुर सीकरी में आवारा आतंक: दो सांडों की लड़ाई से फैली अफरा-तफरी, पर्यटक बाल-बाल बचे
फतेहपुरसीकरी के गुलिस्ता पार्किंग में भिड़ते सांड, जिनसे अफरा-तफरी फैल गई।

 रोज़ाना दुर्घटनाएं, किसान रात-भर पहरे पर

ग्रामीण और शहरी इलाकों में आवारा गोवंश के कारण सड़क दुर्घटनाएं प्रतिदिन हो रही हैं। खेतों में घुसकर फसलें नुकसान न करें, इसके लिए किसान रात-भर पहरा देने को मजबूर हैं। कस्बे के मुख्य बाजार, सब्जी मंडी बाईपास, किराया से तेरहमोरी तक और अनाज मंडी के आसपास गोवंश के झुंड खड़े रहते हैं। इनकी आपसी लड़ाइयों में कई बार राहगीर और दुकानदार घायल भी हो चुके हैं।

गौशालाओं की हकीकत उजागर कर रहे सड़कों पर घूमते गोवंश

प्रदेश सरकार ने ग्राम पंचायतों और नगर पालिकाओं को गौशाला निर्माण के लिए पर्याप्त धन आवंटित किया, कई नई गौशालाएं भी बनीं। बावजूद इसके, गोवंश के खुलेआम विचरण पर प्रभावी रोक नहीं लग पाई। ब्लॉक स्तर पर आवारा गोवंश पकड़ने के लिए वाहन उपलब्ध होने के बावजूद, अक्सर कार्रवाई दुर्घटना के बाद ही होती है। दो-चार पशुओं को पकड़कर गौशाला भेज देना ही औपचारिकता बनकर रह गया है। जाहिर है कि संबंधित विभाग अपना काम तरीके से अंजाम नहीं दे रहे। अगर ये गोवंश गौशालाओं में पहुंचा दिये गये होते तो सड़कों पर इस तरह का नजारा नहीं दिखता।

पर्यटन पर असर, सुरक्षा पर सवाल

पर्यटन स्थल पर सांडों की लड़ाई से न केवल संपत्ति को नुकसान हुआ, बल्कि पर्यटकों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते स्थायी समाधान नहीं हुआ, तो पर्यटन और स्थानीय व्यापार दोनों प्रभावित होंगे। इस पर नियंत्रण के लिए जरूरी है कि नियमित पकड़ अभियान और निगरानी हो। बाजार व पर्यटन क्षेत्रों में नो-कैटल ज़ोन घोषित हों। गौशालाओं की क्षमता व प्रबंधन में सुधार के साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।

SP_Singh AURGURU Editor