घटते पारिवारिक मूल्यों पर छात्रों की बुलंद आवाज़, ‘विभव अभिव्यक्ति’ में गूंजे संवेदनशील विचार
आगरा। बदलते सामाजिक परिवेश में पारिवारिक मूल्यों के क्षरण को लेकर नई पीढ़ी कितनी सजग और चिंतनशील है, इसका प्रभावशाली प्रदर्शन प्रिल्यूड पब्लिक स्कूल, दयालबाग में देखने को मिला। हिंदी भाषा के प्रति आजीवन समर्पित रहे स्व. सतीश चंद्र गुप्ता ‘विभव’ एवं स्व. श्रीमती श्यामा गुप्ता जी की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के उद्देश्य से 25 व 26 दिसंबर 2025 को आयोजित “विभव अभिव्यक्ति – वक्तृत्व की शक्ति” प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपने विचारों से सभागार को भाव-विभोर कर दिया।
समारोह का शुभारंभ स्वागत गीत एवं स्व. सतीश चंद्र गुप्ता की स्मृति में प्रस्तुत भावपूर्ण गीत के साथ हुआ। इसके पश्चात डॉ. सुशील गुप्ता, सुनीता गुप्ता, सुनील गुप्ता, बेनू गुप्ता, विद्यालय के प्रधानाचार्य अरविंद श्रीवास्तव, अतिथिगण एवं निर्णायक मंडल द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण किया गया।
22 विद्यालयों की सहभागिता, दो चरणों में हुई प्रतियोगिता
इस गरिमामय आयोजन में आगरा के 22 प्रतिष्ठित विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रतियोगिता के प्रथम चरण में “करियर चुनने का आधार—परिवार बनाम रुचि” विषय पर वक्तृत्व हुआ, जिसमें से 11 प्रतिभागियों का चयन किया गया। चयनित प्रतिभागियों ने द्वितीय चरण में “घटते हुए पारिवारिक मूल्य—एक गंभीर समस्या” विषय पर अपने विचार रखे और विषय की गहराई, सामाजिक सरोकार व समाधानपरक दृष्टि से सभी को प्रभावित किया।
प्रतिभागियों ने विचारों से बांधा समां
छात्र-छात्राओं ने पारिवारिक संवाद की कमी, डिजिटल जीवनशैली, पीढ़ियों के बीच बढ़ती दूरी और नैतिक शिक्षा की आवश्यकता जैसे मुद्दों को सशक्त शब्दों में प्रस्तुत किया। वक्तृत्व में भावनात्मकता के साथ तार्किक दृष्टिकोण भी स्पष्ट दिखाई दिया।
प्रतियोगिता के परिणाम
प्रथम स्थान (₹31,000) – वैष्णवी शर्मा (सेंट एंड्रयूज पब्लिक स्कूल)
द्वितीय स्थान (₹21,000) – मुस्कान शाल्या (सुमित राहुल मेमोरियल स्कूल)
तृतीय स्थान (₹11,000) – वैष्णवी शर्मा (शिवालिक कैंब्रिज पब्लिक स्कूल)
प्रथम सांत्वना पुरस्कार (₹5,100) – विशाखा सिंह (श्री राम स्वरूप गर्ल्स इंटर कॉलेज)
द्वितीय सांत्वना पुरस्कार (₹5,100) – परी कटारा (सेंट एंड्रयूज स्कूल, बरौली अहीर)
सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए गए।
निर्णायकों और अतिथियों ने की सराहना
निर्णायक मंडल में डॉ. श्रुति सिन्हा, डॉ. सुनीता रानी घोष एवं डॉ. निशिथ गौड़ शामिल रहे। डॉ. सुनीता रानी घोष ने कहा कि प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों ने उनके ज्ञान के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व और भविष्य के प्रति सोच को भी उजागर किया है।
डॉ. सुशील गुप्ता ने कहा कि उनके पिता स्व. सतीश चंद्र गुप्ता का हिंदी भाषा और शिक्षा के प्रति समर्पण ही इस आयोजन की प्रेरणा है, जिसे भविष्य में और व्यापक रूप दिया जाएगा।
विद्यालय की छात्राओं अंकिता गुप्ता एवं युक्ता मित्तल की मनोहारी नृत्य प्रस्तुति ने कार्यक्रम को और भी यादगार बना दिया।
इस अवसर पर श्री मोहन खंडेलवाल, श्रीमती शारदा गुप्ता, के.के. पालीवाल एवं पूरन डाबर ने स्व. सतीश चंद्र गुप्ता के व्यक्तित्व और योगदान पर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में राजीव नारायण, सुयश गुप्ता, लवली कथूरिया, डेजी गुजराल, पवन आगरी, अखिल दीक्षित, आनेंद्र सिंह, डॉ. मणिश्वर गुप्ता, राजेश श्रीवास्तव, रेनू भगत एवं डॉ. नवीन गुप्ता सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अर्शिया मखीजा ने किया।