किरावली थाने में थर्ड डिग्री का कहर, मामला उजागर होते ही इंस्पेक्टर समेत तीन सस्पेंड, एसीपी का ट्रांसफर

आगरा। थाना किरावली क्षेत्र में पुलिसिया बर्बरता का गंभीर मामला सामने आने के बाद पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। हत्या के एक मामले में शक के आधार पर उठाए गए 35 वर्षीय युवक राजू को थाने में कथित रूप से थर्ड डिग्री टॉर्चर दिया गया। आरोप है कि पुलिस ने दो दिन तक युवक को बेरहमी से पीटा, जिससे उसके दोनों पैरों की हड्डियां टूट गईं।

Dec 22, 2025 - 22:40
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किरावली थाने में थर्ड डिग्री का कहर, मामला उजागर होते ही इंस्पेक्टर समेत तीन सस्पेंड, एसीपी का ट्रांसफर
अस्पताल में भर्ती राजू।

पुलिस ने शक में उठाए युवक के दोनों पैर तोड़े, हत्या कबूल कराने के लिए दो दिन तक टॉर्चर 

आगरा। थाना किरावली क्षेत्र में पुलिसिया बर्बरता का गंभीर मामला सामने आने के बाद पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। हत्या के एक मामले में शक के आधार पर उठाए गए 35 वर्षीय युवक राजू को थाने में कथित रूप से थर्ड डिग्री टॉर्चर दिया गया। आरोप है कि पुलिस ने दो दिन तक युवक को बेरहमी से पीटा, जिससे उसके दोनों पैरों की हड्डियां टूट गईं।

राजू की हालत बिगड़ने पर पुलिसकर्मियों ने आनन-फानन में उसे किरावली के एक अस्पताल में भर्ती कराया। मामले की जानकारी जैसे ही उच्चाधिकारियों तक पहुंची, तुरंत जांच कराई गई। प्रथम दृष्टया लापरवाही और गंभीर आरोपों को देखते हुए किरावली इंस्पेक्टर नीरज कुमार, एक सब-इंस्पेक्टर और एक बीट ऑफिसर को निलंबित कर दिया गया है। वहीं अछनेरा के एसीपी राम प्रवेश गुप्ता का तबादला कर दिया गया है।

हत्या कबूल कराने का दबाव, पैरों पर बरसाए डंडे

पीड़ित राजू ने परिजनों को बताया कि पुलिस उस पर हत्या स्वीकार करने का दबाव बना रही थी। राजू के अनुसार पुलिस ने मेरे पैरों पर इतनी बेरहमी से डंडे मारे कि 5 डंडे टूट गए। मुझे उल्टा लटकाया गया। मैं हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाता रहा, लेकिन किसी को रहम नहीं आया। आखिरकार मैं बेहोश हो गया। जब उसकी हालत गंभीर हो गई तो पुलिसकर्मी घबरा गए और उसे प्राइवेट गाड़ी से अस्पताल पहुंचाया। फिलहाल राजू के दोनों पैरों में प्लास्टर है और उसका इलाज जारी है।

किसान की संदिग्ध मौत से जुड़ा है मामला

यह पूरा मामला करहारा गांव में 6 जून को हुई किसान वनवीर सिंह (58) की संदिग्ध मौत से जुड़ा है। मृतक के भाई हरेंद्र सिंह के अनुसार, वनवीर सिंह घर में अकेले रहते थे। 5 जून की रात करीब 11 बजे तक उनकी फोन पर बात हुई थी। अगली सुबह करीब 10 बजे जब हरेंद्र सिंह घर पहुंचे तो वनवीर सिंह मृत मिले।

घर का सामान बिखरा पड़ा था और मोबाइल से सिम कार्ड गायब था। गले पर निशान मिलने से परिजनों ने हत्या की आशंका जताई। सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा।

पहले भी हुई पूछताछ, फिर उठाकर किया टॉर्चर

इस मामले में पुलिस ने 20 दिसंबर को गांव के ही रहने वाले राजू (35) को पूछताछ के लिए बुलाया था। परिजनों का कहना है कि इससे पहले भी कई बार पूछताछ हो चुकी थी।
लेकिन दो दिन पहले दोबारा बुलाने के बाद पुलिस ने उसे थाने में रोक लिया। 21 दिसंबर की शाम परिजनों को पता चला कि राजू को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

उच्चस्तरीय जांच के आदेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने कड़ा रुख अपनाया है।
उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच DIG शैलेश पांडेय और एडिशनल कमिश्नर राम बदन सिंह को सौंपी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे और कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। यह मामला एक बार फिर पुलिस हिरासत में मानवाधिकार उल्लंघन और थर्ड डिग्री के सवाल खड़े कर रहा है।