तीन शिशु बंदर कैद से मुक्त कराये, PETA इंडिया की शिकायत पर आगरा में रेस्क्यू ऑपरेशन
आगरा। सड़कों पर प्रदर्शन के लिए अवैध रूप से बंदी बनाकर रखे गए तीन शिशु रीसस मकाक बंदरों को वन विभाग की टीम ने मुक्त कराया है। यह कार्रवाई पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) इंडिया की शिकायत पर की गई। बंदरों को रस्सियों से बांधकर करतब दिखाने और भीख मांगने में प्रयोग किया जा रहा था।
जब यह मामला स्थानीय नागरिक राहुल जैन के माध्यम से सामने आया, तो PETA इंडिया ने तत्काल आगरा वन प्रभाग से संपर्क किया। प्रभागीय वन अधिकारी दीपक कुमार (आईएफ़एस) के निर्देशन में हुई त्वरित कार्रवाई में तीनों शिशु बंदरों को बचाकर वन्यजीव चिकित्सकों की निगरानी में स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। स्वस्थ पाए जाने पर उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
अवैध प्रदर्शन पर कानून सख्त, हो सकती है जेल और जुर्माना
भारत सरकार ने वर्ष 1998 में पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 22 के अंतर्गत अधिसूचना जारी कर बंदरों सहित कई वन्य प्रजातियों के प्रदर्शन को पूर्णतः प्रतिबंधित किया है।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 09 सितम्बर 2024 को जारी अपने पत्र में स्पष्ट किया कि रीसस मकाक को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-चार में संरक्षित किया गया है। अवैध प्रदर्शन पर सख्त कानून है, जिसमें तीन साल की जेल और एक लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
वन विभाग और PETA इंडिया की तत्परता से बची नन्ही ज़िंदगियां
PETA इंडिया की क्रूरता प्रतिक्रिया समन्वयक सिंचना सुब्रमण्यन ने कहा कि आगरा वन प्रभाग और विशेष रूप से प्रभागीय वन अधिकारी दीपक कुमार के त्वरित कदम के कारण इन मासूम जीवों की जान बच सकी। हम सभी नागरिकों से अपील करते हैं कि किसी भी प्रकार की पशु क्रूरता दिखे तो तुरंत वन विभाग या पुलिस को सूचना दें।
प्रकृति संतुलन में भी अहम भूमिका निभाते हैं बंदर
हिंदू आस्था में पूजनीय होने के साथ रीसस मकाक बंदर वन पारिस्थितिकी के भी संरक्षक हैं। उनका फलाहारी आहार बीजों के प्रसार में मदद करता है, जिससे जंगलों का प्राकृतिक संतुलन बना रहता है। ऐसे जीवों की अनुपस्थिति वन संपदा के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकती है। संस्था ने पशुओं के प्रति क्रूरता या उनसे जुड़ी आपात स्थिति में फोन नंबर (0) 98201 22602 पर सूचना देने की अपील की है।