आगरा के तीन बड़े निजी स्कूल जांच के घेरे में, अभिभावकों पर निजी प्रकाशकों की किताबें थोपने का आरोप

आगरा के तीन बड़े निजी स्कूल सेंट पॉल, सेंट विंसेट और सेंट जोसेफ गर्ल्स कॉलेज पर अभिभावकों को निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर करने के आरोप लगे हैं। शासनादेश के बावजूद इस तरह की शिकायतें मिलने पर संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. मुकेश अग्रवाल ने मामले का संज्ञान लिया है। डीआईओएस (द्वितीय) वीपी सिंह को जांच अधिकारी बनाया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

Apr 6, 2026 - 00:05
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आगरा के तीन बड़े निजी स्कूल जांच के घेरे में, अभिभावकों पर निजी प्रकाशकों की किताबें थोपने का आरोप
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आगरा में निजी स्कूलों की मनमानी पर शिक्षा विभाग सख्त, शासनादेश के बावजूद अभिभावकों से महंगी किताबें खरीदवाने का दबाव

आगरा। आगरा में निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर महंगी किताबें खरीदने का दबाव बनाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। शासनादेश स्पष्ट होने के बावजूद कई प्रतिष्ठित निजी स्कूलों पर आरोप है कि वे एनसीईआरटी या निर्धारित पाठ्यक्रम की पुस्तकों के स्थान पर निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों को मजबूर कर रहे हैं। शिकायतों के बाद अब शिक्षा विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं।

संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. मुकेश अग्रवाल ने अभिभावकों की शिकायतों और लगातार मिल रही सूचनाओं का संज्ञान लेते हुए आगरा के तीन प्रमुख निजी स्कूलों के खिलाफ जांच बैठा दी है। जांच के घेरे में आए स्कूलों में पंडित मोतीलाल नेहरू रोड स्थित सेंट पॉल, सेंट विंसेट और सेंट जोसेफ गर्ल्स कॉलेज शामिल हैं।

बताया जा रहा है कि इन स्कूलों पर आरोप है कि नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में अभिभावकों को विशेष दुकानों या निर्धारित विक्रेताओं से ही किताबें खरीदने के लिए कहा जा रहा है। कई मामलों में यह भी शिकायत मिली है कि निजी प्रकाशकों की किताबें अत्यधिक कीमत पर उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि यदि शासनादेश लागू है, तो फिर निजी प्रकाशनों की महंगी पुस्तकों को खरीदने की अनिवार्यता क्यों बनाई जा रही है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईओएस (द्वितीय) वीपी सिंह को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि संबंधित स्कूलों में पुस्तक सूची, अभिभावकों से मिली शिकायतें, स्कूल प्रबंधन की भूमिका और शासनादेश के अनुपालन की स्थिति की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

शिक्षा विभाग ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें नोटिस, प्रशासनिक दंड, मान्यता संबंधी कार्रवाई या अन्य वैधानिक कदम भी शामिल हो सकते हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि किसी भी स्थिति में अभिभावकों का आर्थिक शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब नए शैक्षणिक सत्र के साथ ही स्कूलों में किताबों, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक सामग्री को लेकर अभिभावकों की परेशानियां बढ़ जाती हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग की यह कार्रवाई न केवल अभिभावकों को राहत दे सकती है, बल्कि निजी स्कूलों के लिए भी स्पष्ट संदेश है कि शासनादेश की अनदेखी अब भारी पड़ सकती है।

अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है। यदि रिपोर्ट में अनियमितताएं सामने आती हैं, तो आगरा के निजी स्कूलों में चल रही कथित किताबों की मनमानी पर बड़ा शिकंजा कस सकता है।