तिरंगा मेरे कंधे पर है, मैं आप सबके साथ हूं- अंतरिक्ष में उड़े शुभांशु शुक्ला का पहला संदेश

फ्लोरिडा/नई दिल्ली। भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से सफलतापूर्वक AXIOM-4 मिशन के तहत अंतरिक्ष की उड़ान भरी। यह पहली बार है जब कोई भारतीय अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचेगा। राकेश शर्मा के बाद शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष उड़ान भारत की नई पीढ़ी को प्रेरणा दे रही है।

Jun 25, 2025 - 13:00
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तिरंगा मेरे कंधे पर है, मैं आप सबके साथ हूं- अंतरिक्ष में उड़े शुभांशु शुक्ला का पहला संदेश
अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरने वाले कैप्टन सुभांशु शुक्ल अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ।

-AXIOM-4 मिशन से भारत की नई उड़ान, तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ अंतरिक्ष स्टेशन की ओर बढ़ चले कैप्टन शुक्ला

स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट से लॉन्च हुए इस मिशन में शुभांशु शुक्ला तीन अन्य अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष यात्रियों के साथ ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट में सवार होकर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की ओर बढ़ रहे हैं।

भारत के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला सहित चार अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर स्पेसएक्स का फाल्कन 9 रॉकेट अमेरिका के NASA के कैनेडी स्पेस सेंटर से सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की ओर रवाना हुआ। यह मिशन AXIOM-4 के तहत संचालित किया जा रहा है, जिसमें चारों यात्री स्पेसएक्स के नए ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट में सवार हैं। अंतरिक्ष यान 26 जून की सुबह 7 बजे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) से जुड़ जाएगा।

सुभांशु शुक्ला का पहला संदेश

लॉन्च के कुछ समय बाद शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष से देशवासियों के लिए पहला भावुक संदेश भेजा- ‘ये एक अद्भुत सफर है। मेरे कंधे पर तिरंगा बताता है कि मैं आप सबके साथ हूं। ये भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन की शुरुआत है। ये कमाल की राइड थी। हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हुआ है। जय हिंद! जय भारत!’

पूरे देश में गर्व और भावुकता का माहौल

उनके इस संदेश ने पूरे देश को गर्व और भावुकता से भर दिया है। इस मिशन के लॊन्च होने को कैप्टन सुभांशु शुक्ला के परिवारीजनों ने लाइव देखा। बेटे की इस उपलब्धि पर माता-पिता और अन्य परिवारीजन भावुक हो उठे। कैप्टन शुक्ला की मां अपने आंसू पौंछती नजर आईं।

अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में यह मिशन न केवल भारत की वैश्विक मौजूदगी को मजबूत करेगा, बल्कि भविष्य में भारतीय मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशनों की नींव भी साबित होगा।

मंत्री जितेंद्र सिंह ने दीं शुभकामनाएं

AXIOM स्पेस कंपनी द्वारा संचालित इस मिशन का उद्देश्य अंतरिक्ष स्टेशन पर विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोगों और तकनीकी परीक्षणों को अंजाम देना है। भारत सरकार की ओर से केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस सफलता को ऐतिहासिक उपलब्धि करार देते हुए शुभकामनाएं दी हैं।

AXIOM-4 के तहत ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट अगले 24 घंटे में ISS से डॉक करेगा और मिशन की मुख्य वैज्ञानिक गतिविधियां शुरू होंगी।

Top of Formशुभांशु शुक्ला: भारत के अंतरिक्ष में इसरो के पहले प्रतिनिधि

भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला इस मिशन में पायलट की भूमिका में हैं। वह इसरो की ओर से अंतरिक्ष में जाने वाले पहले सरकारी प्रतिनिधि भी बन गए हैं। उनके साथ इस मिशन में अमेरिका की वरिष्ठ अंतरिक्ष यात्री पैगी व्हिटसन (कमांडर), पोलैंड के स्लावोज़ उज़्नान्स्की और हंगरी के टिबोर कापू शामिल हैं।

तीन देशों की ऐतिहासिक वापसी एक साथ

AXIOM-4 मिशन भारत, पोलैंड और हंगरी के लिए ऐतिहासिक साबित हो रहा है, क्योंकि इन तीनों देशों ने लगभग 40 साल बाद एक साथ अंतरिक्ष में मानव भेजा है। पोलैंड के लिए 1978 के बाद, हंगरी के लिए 1980 के बाद और भारत के लिए राकेश शर्मा (1984) के बाद यह पहला मानव मिशन है।

60 वैज्ञानिक प्रयोग, भारत से 7 शोध प्रस्ताव

यह मिशन केवल यात्रा नहीं, बल्कि गहन वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए भी जाना जाएगा। AXIOM-4 के दौरान ISS पर लगभग 60 वैज्ञानिक प्रयोग किए जाएंगे, जिनमें से 7 प्रयोग भारतीय शोधकर्ताओं द्वारा प्रस्तावित किए गए हैं। ये प्रयोग जीवन विज्ञान, सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण, अंतरिक्ष तकनीक और मानव स्वास्थ्य से संबंधित होंगे।

AXIOM और स्पेसएक्स के सहयोग से अब तक का सबसे बड़ा निजी मिशन

AXIOM-4 मिशन को ह्यूस्टन स्थित Axiom Space द्वारा नासा के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। स्पेसएक्स द्वारा लॉन्च किया गया यह चौथा प्राइवेट अंतरिक्ष मिशन है, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अब तक का सबसे महत्वपूर्ण और विस्तृत मिशन माना जा रहा है।

मिशन टाइमलाइन

-लॉन्च: 25 जून, केनेडी स्पेस सेंटर, फ्लोरिडा।

-डॉकिंग (ISS से जुड़ाव): 26 जून, शाम 4:30 बजे (IST)।

-ISS पर प्रवास: लगभग 14 दिन।

-वैज्ञानिक प्रयोग: कुल 60, जिसमें भारत से सात।

SP_Singh AURGURU Editor