आध्यात्मिक उत्सव में भक्ति, व्यवस्था और विवाद की त्रिवेणी: गोवर्धन धाम में मुड़िया पूर्णिमा मेला चरम पर
गोवर्धन स्थित गिरिराज धाम में मुड़िया पूर्णिमा पर भक्ति और श्रद्धा का महासागर उमड़ पड़ा है। प्रशासनिक व्यवस्थाएं भीड़ के आगे लड़खड़ाती दिखीं तो गर्भगृह विवाद ने थोड़ी कड़वाहट घोली। फिर भी श्रद्धालु गिरिराज महाराज की शरण में अभिभूत और तृप्त दिखे। यह मेला न केवल आध्यात्मिक उत्सव है, बल्कि व्यवस्थागत चुनौती और सामाजिक समरसता की परीक्षा भी।
भक्ति की गूंज: हर दिशा में जयकारे और नृत्य, सुरक्षा व्यवस्था चुस्त
मथुरा। श्रावण मास की मुड़िया पूर्णिमा पर गोवर्धन धाम श्रद्धा, भक्ति और जनसैलाब से सराबोर रहा। बुधवार की देर शाम तक 21 किलोमीटर का सप्तकोसीय परिक्रमा मार्ग गिरिराज महाराज के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। आस्था की इस अविरल धारा में लाखों श्रद्धालु गिरिराज जी की परिक्रमा, दर्शन और भजन-कीर्तन में लीन नजर आए। वहीं दूसरी ओर व्यवस्था बनाए रखने की प्रशासनिक कोशिशों के बीच मंदिर गर्भगृह को बंद करने पर श्रद्धालुओं और सेवायतों में नाराजगी भी देखने को मिली। पूरे दिन और रात गोवर्धन धाम आध्यात्मिक ऊर्जा से पुलकित रहा।
बुधवार की शाम तक गोवर्धन और परिक्रमा मार्ग श्रद्धालुओं के सिरों से पट गया। जय गिरिराज महाराज के उद्घोष से वातावरण गुंजायमान हो उठा। महिलाएं भजनों पर नृत्य कर रहीं थीं, श्रद्धालु डंडे के सहारे भी परिक्रमा कर रहे थे। जयपुर से आए वृद्ध विजय कुमार मीणा ने बताया, यहां आकर मन को आत्मिक शांति मिलती है। श्रद्धा के इस सागर में आस्था की लहरें चरम पर थीं।
सप्तकोसीय परिक्रमा में उमड़ा जनसैलाब
गिरिराज जी की 21 किलोमीटर की सप्तकोसी परिक्रमा मार्ग श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से लगभग 35 किलोमीटर का प्रतीत हो रहा था। हर दिशा में भीड़ और सेवा का संगम दिखा। भंडारे, जल प्याऊ, सेवा केंद्र हर मोड़ पर श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे रहे। कुछ श्रद्धालुओं को 7 से 8 किलोमीटर दूर अपने वाहन से उतरकर पैदल चलना पड़ा। भीड़ इतनी कि मानव श्रृंखला 20 घंटे तक बनी रही।
रोडवेज की 1000 बसों का संचालन, फिर भी भीड़ बेकाबू
उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने गोवर्धन के लिए बुधवार को एक हजार बसें चलाईं। मथुरा जंक्शन, बस अड्डा और गोवर्धन चौराहे पर यात्रियों की लाइनें लगी रहीं। शाम होते-होते बसों में पैर रखने की भी जगह नहीं रही। निजी वाहनों में भी क्षमता से अधिक श्रद्धालु सवार होकर पहुंचे। मथुरा-गोवर्धन मार्ग, अड़ींग सहित सड़कों पर बसों की लंबी कतारें लग गईं।
गर्भगृह बंद करने पर श्रद्धालुओं में रोष
मेला क्षेत्र के बीच एक बड़ा विवाद उस समय खड़ा हो गया जब प्रशासन ने गिरिराज मुकुट मुखारविंद मंदिर के गर्भगृह में श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद कर दिया। प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए दानपेटियों से दरवाजे बंद कर बेरिकेटिंग कर दी। इससे श्रद्धालुओं में नाराजगी फैल गई। राजस्थान से आए राकेश महेश्वरी ने कहा, जब गर्भगृह में जाकर दूधाभिषेक नहीं कर सकते, तो दर्शन का क्या लाभ? मंदिर सेवायतों ने करोड़ों रुपये के नुकसान की भी बात कही।
मंदिर रिसीवर कपिल चतुर्वेदी ने स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं को मंदिर में घूमने या दर्शन से नहीं रोका गया, केवल भीड़ प्रबंधन हेतु गर्भगृह तक जाने पर रोक थी। लेकिन स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इससे मेला की छवि प्रभावित हो सकती है।
मुंडन संस्कार भी बने आकर्षण
गिरिराज धाम में मानसी गंगा के किनारे श्रद्धालुओं ने अपने बच्चों के मुंडन संस्कार कराए और गोवर्धन पूजा कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। यह परंपरा मेला में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है।