ट्रंप ने अभी तक भारत में नहीं भेजा है राजदूत, बाइडेन ने लगाए थे 20 महीने
बाइडेन प्रशासन ने भी भारत में राजदूत भेजने में करीब 20 महीनों का वक्त लगाया था। लेकिन उसके पीछे वजह कुछ अलग थी। बाइडेन प्रशासन, एरिक गार्सेटी को भारत का राजदूत बनाकर भेजना चाहता था। लेकिन सीनेट से उनके नाम को मंजूरी नहीं मिल रही थी।
वॉशिंगटन। डोनाल्ड ट्रंप को राष्ट्रपति बने करीब 6 महीने हो चुके हैं लेकिन अभी तक अमेरिका ने भारत में अपने राजदूत को नहीं भेजा है। सिर्फ इतना ही नहीं, अभी तक भी कोई जानकारी नहीं है कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन, दिल्ली में अपने राजदूत को कब भेजेगा? हालांकि ट्रंप प्रशासन ने बांग्लादेश और पाकिस्तान में भी अपने राजदूत नहीं भेजे हैं, लेकिन पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ अमेरिका की उस तरह की स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप नहीं है, जैसी भारत के साथ है। माना जा रहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष के बाद ट्रंप प्रशासन, कम से कम भारत में जल्द से जल्द दिल्ली में अपने राजदूत को भेजेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। राष्ट्रपति बनने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने चीन और इजरायल के राजदूतों की घोषणा कर दी थी। उन्होंने पूर्व सीनेटर डेविड पर्ड्यू को चीन में और अर्कांसस के पूर्व गवर्नर माइक हुकाबी को इजरायल में राजदूत चुना।
सवाल उठ रहे हैं कि जब अमेरिका मानता है कि एशिया में उसका सबसे बड़ा स्ट्रैटजिक पार्टनर भारत है, तो भी नजरअंदाज करने की वजह क्या है? इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या वॉशिंगटन भारत को प्राथमिकता दे रहा है या नहीं? डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में न्यूजीलैंड के राजदूत रहे पूर्व सीनेटर स्कॉट ब्राउन ने बिजनेस इंडिया की एक रिपोर्ट में कहा है कि "राजदूत सबसे महत्वपूर्ण पदों में से एक हैं और अमेरिकी हितों का प्रतिनिधित्व करने में अहम भूमिका निभाते हैं। जहां कहीं भी संघर्ष हो, हमें अच्छे राजदूतों की जरूरत होती है।"
अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो माइकल रुबिन ने कहा कि "जब राष्ट्रपति ट्रंप, भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम के लिए बातचीत कर रहे थे, तो भारत में अमेरिका का एक पूर्णकालिक राजदूत होना मददगार होता। भारत और पाकिस्तान इस समय सबसे महत्वपूर्ण दूतावास हैं, क्योंकि ये दोनों हमेशा संघर्ष क्षेत्र रहे हैं और इसलिए भी कि दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं।" राजदूत, दो देशों के बीच कम्युनिकेशन और प्लानिंग को तय करने में काफी अहम भूमिका निभाते हैं। राजदूतों का काम अपने देशों की तरफ से बोलना और अपनी सरकार को उस देश की स्थिति को देखते हुए सलाह देना शामिल होता है। अमेरिकी विदेश सेवा संघ ने बताया है कि जुलाई महीने तक, राष्ट्रपति ट्रंप ने 59 राजदूतों की नियुक्ति की थी। लेकिन इनमें भारत के लिए राजदूत की नियुक्ति नहीं की गई है। ट्रंप ने जिन देशों में राजदूतों की नियुक्ति की है, उनमें से ज्यादातर यूरोपीय देश, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया जैसे देश हैं।
बाइडेन प्रशासन ने भी भारत में राजदूत भेजने में करीब 20 महीनों का वक्त लगाया था। लेकिन उसके पीछे वजह कुछ अलग थी। बाइडेन प्रशासन, एरिक गार्सेटी को भारत का राजदूत बनाकर भेजना चाहता था। बाइडेन प्रशासन ने जनवरी 2021 में सत्ता संभालने के बाद जुलाई 2021 में एरिक गार्सेटी को भारत का राजदूत नियुक्त किया था, लेकिन अमेरिकी सीनेट उनके नाम पर मुहर नहीं लगा रही थी। उनके ऊपर आरोप था कि उन्होंने अपने एक ऐसे सहयोगी का बचाव किया था, जिनपर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था। इसी वजह से उनकी नियुक्ति में 20 महीने लगे थे। हालांकि मार्च 2023 में सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद वो भारत आए और भारत में अमेरिका के 26वें राजदूत के तौर पर करीब 28 महीने तक काम किया।