ट्रंप टैरिफ से जूता उद्योग पर अस्थायी असर, दीर्घकाल में हमारी गुणवत्ता-प्रतिस्पर्धा बरकरार रहेगी: डावर

आगरा। अमेरिका द्वारा भारत से आयातित फुटवियर पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क (टैरिफ) लगाए जाने की घोषणा के बाद, देशभर के जूता उद्योग में अस्थायी चिंता का माहौल बना है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए  फुटवियर एवं चमड़ा उद्योग विकास परिषद (डीसीएफएलआई) के चेयरमैन और काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स (सीएलई) के उत्तर भारत अध्यक्ष पुरन चंद डावर ने कहा है कि यह निर्णय अल्पकालिक असर तो डाल सकता है, लेकिन दीर्घकाल में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर कोई आंच नहीं आएगी।

Jul 31, 2025 - 18:10
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ट्रंप टैरिफ से जूता उद्योग पर अस्थायी असर, दीर्घकाल में हमारी गुणवत्ता-प्रतिस्पर्धा बरकरार रहेगी: डावर

-भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में गतिरोध के बीच भारतीय फुटवियर उद्योग को भरोसा- हमारी ताकत बनी रहेगी

भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौता अधर में, लेकिन सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट

पूरन डावर ने कहा कि भारत सरकार अमेरिका सहित कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर सक्रियता से कार्य कर रही है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय अत्यंत गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ बातचीत कर रहा है। हालांकि कुछ मुद्दे, विशेषकर कृषि उत्पादों और राजनीतिक दृष्टिकोण को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं, जिनके कारण अभी तक अमेरिका के साथ समझौता अंतिम रूप नहीं ले सका है।

उन्होंने विपक्षी दलों पर कटाक्ष करते हुए कहा, विपक्ष का दृष्टिकोण रचनात्मक होने के बजाय अधिकतर भारत विरोधी प्रतीत होता है, जिससे वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति को नुकसान हो सकता है।

अमेरिकी टैरिफ का दीर्घकालिक असर नहीं, भारतीय फुटवियर अब भी श्रेष्ठ

श्री डावर ने स्पष्ट किया कि अमेरिका द्वारा लगाया गया 25% टैरिफ और भविष्य में लग सकने वाले अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क (पेनल ड्यूटीज़) निश्चित रूप से अस्थायी प्रभाव डाल सकते हैं, लेकिन यह टिकाऊ नहीं है। अमेरिका घरेलू स्तर पर श्रम-प्रधान उपभोक्ता वस्तुओं, विशेषकर फुटवियर का सस्ता उत्पादन करने में असमर्थ है। ऐसे में किसी भी शुल्क वृद्धि का बोझ अंततः अमेरिकी उपभोक्ताओं पर ही पड़ेगा।

उन्होंने भरोसा जताया कि यह मसला राजनयिक माध्यमों से जल्द सुलझा लिया जाएगा।

भारतीय फुटवियर की कीमत और गुणवत्ता अब भी वैश्विक स्तर पर सबसे आगे

डीसीएफएलआई के चेयरमैन डावर ने कहा कि भले ही वर्तमान में शुल्क लागू हों, लेकिन भारतीय फुटवियर आज भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में मूल्य और गुणवत्ता दोनों में प्रतिस्पर्धात्मक है। उन्होंने आशा जताई कि अंतिम रूप से लगने वाले शुल्क 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होंगे और भारत एक गुणवत्ता आधारित, भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी पहचान कायम रखेगा।

उद्योग जगत को सरकार से सकारात्मक रुख की उम्मीद

आगरा फुटवियर निर्माता एवं निर्यातक मंडल (एफमैक) के संयोजक की हैसियत से डावर ने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह अमेरिका के साथ बातचीत में व्यापार संतुलन और श्रम-प्रधान क्षेत्रों की रक्षा को प्राथमिकता दे। इससे लाखों श्रमिकों और उद्यमियों को राहत मिल सकेगी।

SP_Singh AURGURU Editor