उपचार से आगे भरोसा, शोध से जगी नई उम्मीद: द्वितीय ऑल इंडिया होम्योपैथिक कांग्रेस का वैज्ञानिक मंथन के साथ समापन

ताजनगरी आगरा में आयोजित द्वितीय ऑल इंडिया होम्योपैथिक कांग्रेस का द्वितीय दिवस शोध, विज्ञान और अनुभव आधारित विमर्श के रूप में उल्लेखनीय रहा। हरीपर्वत स्थित एमडी जैन आचार्य शांति सागर सभागार में हुए सत्रों में कैंसर, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR), पूरक चिकित्सा पद्धतियां और मियाज़मैटिक थ्योरी पर गहन चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि ऑक्सीजन की कमी कैंसर कोशिकाओं के सक्रिय होने का अनुकूल वातावरण बना सकती है, वहीं होम्योपैथी को भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों में एक प्रभावी पूरक विकल्प बताया गया।

Jan 11, 2026 - 18:51
 0
उपचार से आगे भरोसा, शोध से जगी नई उम्मीद: द्वितीय ऑल इंडिया होम्योपैथिक कांग्रेस का वैज्ञानिक मंथन के साथ समापन
हरीपर्वत स्थित एमडी जैन आचार्य शांति सागर सभागार में आयोजित द्वितीय ऑल इंडिया होम्योपैथिक कांग्रेस में देशभर से आए होम्योपैथिक चिकित्सक।

कांग्रेस के द्वितीय दिवस का शुभारंभ मेयर हेमलता दिवाकर ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इस अवसर पर आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. जे.एन. सिंह रघुवंशी, आयोजन सचिव डॉ. पार्थसारथी शर्मा, महामंत्री डॉ. एन.एस. रघुराम, रोहित जैन, राहुल जैन तथा लीडर्स आगरा के महामंत्री सुनील जैन मंचासीन रहे।

मेयर हेमलता दिवाकर ने कहा कि देशभर में होम्योपैथी के प्रति जनविश्वास बढ़ रहा है और यह सुरक्षित, किफायती व प्रभावी चिकित्सा विकल्प के रूप में उभर रही है।

विशिष्ट अतिथि विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) विजय शिवहरे ने वैज्ञानिक सत्रों में शोध पत्र प्रस्तुत करने वाले चिकित्सकों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि मधुमेह और कैंसर जैसी जटिल बीमारियों में होम्योपैथी से सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, जो इसके वैज्ञानिक आधार और व्यावहारिक सफलता को दर्शाते हैं।

कैंसर पर सर्वाधिक शोध पत्र

आयोजन सचिव डॉ. पार्थसारथी शर्मा ने बताया कि दो दिवसीय राष्ट्रीय कांग्रेस में सबसे अधिक शोध पत्र कैंसर विषय पर प्रस्तुत हुए। उन्होंने कहा कि कैंसर कोशिकाएं शरीर में प्रतिदिन बनती और नष्ट होती रहती हैं; ऑक्सीजन की कमी होने पर ये सक्रिय होकर विकसित हो सकती हैं। डॉ. शर्मा ने चेताया कि वातानुकूलित कक्षों में घुटन या भारीपन को हल्के में न लें और क्रॉस वेंटिलेशन सुनिश्चित करें, ताकि पर्याप्त ऑक्सीजन प्रवाह बना रहे।

एएमआर और पूरक चिकित्सा पद्धतियों पर फोकस

वैज्ञानिक सत्रों में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) की वैश्विक चुनौती पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने नई एंटीबायोटिक दवाओं के सीमित विकास के बीच कम्पलीमेंट्री मेडिकल सिस्टम्स की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

पश्चिम बंगाल से आए वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. धुर्वा ज्योति मित्रा ने कैंसर उपचार में होम्योपैथी के अनुभव साझा किए। इसके बाद डॉ. अनंत प्रकाश गुप्ता ने क्लिनिकल आइसोलेट्स के विरुद्ध कैलेंडुला ऑफिसिनैलिस क्यू का एंटीबैक्टीरियल प्रभाव  विषय पर शोध पत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने MRSA, ESBL उत्पादक एंटरोबैक्टीरिएसी, कार्बापेनेम रेजिस्टेंट क्लेब्सिएला न्यूमोनिया, MDR स्यूडोमोनास एरुजिनोसा और VRE जैसी चुनौतियों का उल्लेख किया।

मियाज़मैटिक थ्योरी पर विशेष व्याख्यान

डॉ. ए.के. सिंह (चिकित्सा अधिकारी, हाथरस) ने मायज़मैटिक थ्योरी एंड इट्स रोल इन क्रॉनिक डिज़ीज़ेज़  विषय पर कहा कि होम्योपैथी की शक्ति रोग के प्राथमिक कारण की पहचान में निहित है। उन्होंने सोरा, साइकोसिस और सिफिलिस जैसे मियाज़्म्स की सही पहचान को दीर्घकालिक रोगों के स्थायी समाधान के लिए आवश्यक बताया।

लीडर्स आगरा के महामंत्री सुनील जैन, राहुल जैन, सुनील बग्गा, राजदीप ग्रोवर, हरिकांत शर्मा और डॉ. चारु शुक्ला ने देशभर से आए होम्योपैथिक चिकित्सकों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

अध्यक्ष डॉ. जे.एन. सिंह रघुवंशी ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि द्वितीय दिवस में विभिन्न राज्यों से आए चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और आमजन की सक्रिय सहभागिता रही। विशेषज्ञों से प्रश्नोत्तर के माध्यम से होम्योपैथी से जुड़ी भ्रांतियां दूर हुईं।

SP_Singh AURGURU Editor