साइबर सुरक्षा कोर्स पर बवाल: सेल्फ फाइनेंस कॉलेज एसोसिएशन ने विश्वविद्यालय की बैठक का किया बहिष्कार, 500 रुपये शुल्क और बढ़ी फीस के खिलाफ खोला मोर्चा
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा द्वारा प्रस्तावित साइबर सुरक्षा कार्यक्रम को लेकर सेल्फ फाइनेंस कॉलेज एसोसिएशन और विश्वविद्यालय प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं। एसोसिएशन ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर महाविद्यालयों पर साइबर सुरक्षा का व्यावसायिक कार्यक्रम जबरन थोपने का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को आयोजित बैठक के बहिष्कार की घोषणा कर दी। संगठन का कहना है कि छात्रों पर प्रति छात्र 500 रुपये का अतिरिक्त शुल्क थोपना उचित नहीं है। साथ ही इस वर्ष विश्वविद्यालय द्वारा विभिन्न मदों में बढ़ाई गई और नई लागू की गई फीस का भी कड़ा विरोध किया गया है।
सेल्फ फाइनेंस कॉलेज एसोसिएशन के अध्यक्ष मुनेन्द्र जादौन (एडवोकेट) ने कुलपति को भेजे गए पत्र में कहा कि विश्वविद्यालय के पत्र संख्या शैक्षिक/1044/2026, दिनांक 20 जुलाई 2026 के तहत साइबर सुरक्षा कार्यक्रम को लेकर बुलाई गई बैठक में शामिल न होने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया है। उनका कहना है कि इस कार्यक्रम को महाविद्यालयों पर बिना सहमति के लागू किया जा रहा है, जिसका संगठन विरोध करता है।
पत्र में कहा गया है कि विश्वविद्यालय ने इस कोर्स के लिए प्रति छात्र 500 रुपये शुल्क निर्धारित किया है, जिसे कॉलेज संचालक अनुचित मानते हैं। एसोसिएशन का तर्क है कि विश्वविद्यालय पहले से ही प्रत्येक छात्र से वेब रजिस्ट्रेशन के नाम पर 400 रुपये सहित अन्य मदों में विभिन्न शुल्क वसूलता है। ऐसे में यदि साइबर सुरक्षा जैसे पाठ्यक्रम आवश्यक हैं तो उनका खर्च इन्हीं शुल्कों से वहन किया जाए और छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न डाला जाए।
एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि विश्वविद्यालय इस संबंध में सकारात्मक निर्णय नहीं लेता है तो संबद्ध संस्थान अपने संसाधनों से ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने में सक्षम हैं। संगठन ने कहा कि इस विषय पर पहले कुलपति से वार्ता की जाएगी, जिसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।
सेल्फ फाइनेंस कॉलेज एसोसिएशन ने विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा इस शैक्षणिक सत्र में विभिन्न मदों में बढ़ाए गए शुल्क और नए शुल्क लागू किए जाने का भी पुरजोर विरोध किया। संगठन का कहना है कि लगातार बढ़ते शुल्क का सीधा असर छात्रों और अभिभावकों पर पड़ रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
एसोसिएशन ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आगे व्यापक रणनीति बनाकर आंदोलनात्मक कदम भी उठाए जा सकते हैं।