भगवान की लीलाओं को भगवत दृष्टि से देखिए, जया किशोरी ने गोपी-उद्धव प्रसंग सुनाया तो भावविभोर हो उठे श्रद्धालु
आगरा। श्रीश्याम परिवार सेवा ट्रस्ट द्वारा फतेहाबाद रोड स्थित राजदेवम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक जया किशोरी ने कहा कि भगवान की लीलाओं को सांसारिक नहीं, बल्कि भगवत दृष्टि से देखना चाहिए। उन्होंने समाज में बढ़ती धार्मिक उपहास की प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए कहा कि जब तक लोग स्वयं अपने आराध्य का सम्मान नहीं करेंगे, तब तक समाज में भी उनके प्रति सम्मान नहीं बढ़ेगा।

कथा पंडाल में मौजूद भाव विभोर श्रद्धालु।
कथा व्यास ने वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि जब तक लोग स्वयं अपने आराध्य का सम्मान नहीं करेंगे, तब तक समाज में भी उनके प्रति सम्मान की भावना विकसित नहीं होगी। कथा के दौरान कंस वध, गोपी-उद्धव संवाद और सुदामा चरित्र का भावपूर्ण वर्णन हुआ, जबकि भजनों और कीर्तन पर श्रद्धालु भक्ति में सराबोर होकर झूम उठे।
व्याख्यान के दौरान जया किशोरी ने कहा कि संसार की दृष्टि बहुत मैली है, इसलिए भगवान को सांसारिक नजरिए से नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा कि दुख के समय लोग जिस ईश्वर के सामने सिर झुकाकर प्रार्थना करते हैं, सुख आने पर उसी भगवान का मजाक उड़ाने लगते हैं। मजाक के नाम पर भगवान को भी नहीं छोड़ा जा रहा है, जबकि यह हमारी आस्था और संस्कृति के लिए चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि कई परिवर्तन बिना हिंसा के भी संभव हैं। यदि लोग भगवान का मजाक उड़ाने वाली सभाओं और आयोजनों का हिस्सा बनना बंद कर दें और ऐसे प्रसंगों पर हंसना छोड़ दें, तो स्वतः बदलाव आ जाएगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से संकल्प भी दिलाया कि वे अपने आराध्य के सम्मान की रक्षा करेंगे और किसी के द्वारा भगवान के प्रति अपमानजनक टिप्पणी किए जाने पर उसका समर्थन नहीं करेंगे।
कंस वध प्रसंग में गूंजे जयकारे
कथा के दौरान कंस वध प्रसंग का सजीव वर्णन किया गया। भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूपों के दर्शन होते ही पूरा कथा पंडाल "कृष्ण कन्हैया लाल की जय" के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए।
सुदामा चरित्र से दिया ईमानदारी का संदेश
कथा व्यास जया किशोरी ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि किसी का हक कभी नहीं मारना चाहिए। धन कमाना गलत नहीं है, लेकिन वह केवल अपनी मेहनत और ईमानदारी से अर्जित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सच्चा वैभव सदाचार और संतोष में निहित है।
गोपी-उद्धव संवाद सुन भावुक हुए श्रद्धालु
वृंदावन में गोपियों, मैया यशोदा और नंद बाबा से मिलने पहुंचे उद्धव प्रसंग का वर्णन करते हुए जया किशोरी ने कहा कि ज्ञान से ऊपर प्रेम होता है। कृष्ण विरह में व्याकुल ब्रजवासियों का भाव व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यदि कृष्ण प्रेम में नरक भी मिले तो वह स्वीकार है, लेकिन कृष्ण से दूर रहकर स्वर्ग भी स्वीकार नहीं। उन्होंने भजन "ये तो प्रेम की बात उधो, बंदगी तेरे बस की नहीं है..." प्रस्तुत किया, जिसे सुनकर कथा पंडाल में मौजूद अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
'सॉरी' शब्द ने गलतियों को आसान बना दिया
सामाजिक और पारिवारिक जीवन पर बोलते हुए जया किशोरी ने कहा कि जो व्यक्ति वास्तव में प्रेम करता है, वह क्रोध में भी सम्मान बनाए रखता है। उन्होंने कहा कि मजाक वही है जिसमें बोलने और सुनने वाले दोनों हंसें, लेकिन यदि किसी एक को पीड़ा पहुंचे तो वह मजाक नहीं होता।
उन्होंने कहा कि आजकल 'सॉरी' शब्द ने युवाओं को गलतियां करने की मानसिक छूट दे दी है। विवाह पर विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों का विवाह तभी करना चाहिए जब वे समझदार, सक्षम और जिम्मेदारी निभाने के योग्य हो जाएं। फिल्मों और धारावाहिकों की शादियां कुछ दिनों की कहानी होती हैं, जबकि वास्तविक विवाह जीवनभर का साथ होता है। इसलिए विवाह जल्दबाजी में नहीं, पूरी समझदारी और परख के बाद करना चाहिए।