विनाश काले विपरीत बुद्धि: एक अभागी मां, जिसे अपनों ने ही मार डाला
आगरा। ताजगंज थाना क्षेत्र के तुलसी नगर की मार्गश्री अभागी मां ही कही जाएंगी जिन्हें उन्हीं के बेटे बहु के लालच की वजह से जान गंवानी पड़ी। लोग यह बात जानकर हैरान हैं कि 65 वर्षीय वृद्धा की हत्या में उनकी दो नातिन भी शामिल थीं। बहू और बेटे फरार हैं। फिलहाल पुलिस ने हत्याकांड में शामिल इस दंपति के तीनों बच्चों को अभी नहीं पकड़ा है। मार्गश्री की हत्या में उनके बेटे सुभाष, बहू रेखा और इस दंपति के तीन बच्चे आरोपित हैं।
ताजगंज पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा कर दिया है। मार्गश्री की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला था कि उनका मुंह और नाक दबाकर हत्या को अंजाम दिया गया। बेटा बहू और उनके बच्चे इसलिए मार्गश्री की जान के दुश्मन बन गए क्योंकि वह पैतृक मकान को अपने जीते जी बेटे के नाम नहीं कर रही थीं।
शायद मार्गश्री को आशंका थी कि अगर उसने मकान को जीते जी बेटे के नाम कर दिया वह दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो जाएंगी। इधर बेटा और बहू किसी भी सूरत पर मकान को अपने नाम कराने के लिए आमादा थे। मां और बेटे के परिवार के बीच दरार इतनी बढ़ गई थी कि वृद्धा अपना खाना अलग ही बनाती थी।
मृतका की बेटी सरोज ने इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। सरोज का कहना है कि मां ने उन्हें 3 साल पहले अपने एक जोड़ी कुंडल दे दिए थे। यही बात भाई भाभी और बच्चों को चुभ गई। तभी से इन लोगों ने मां का जीना हराम कर दिया था।
बेटा सुभाष और बहू रेखा ने जिस मकान के लिए मां की जान ले ली वह तो मिल नहीं पाया, पूरा परिवार हत्या के केस में और फंस गया। इसे ही कहते हैं विनाश काले विपरीत बुद्धि। मार्गश्री के बाद मकान तो बेटे को ही मिलना था लेकिन बेटे को मां की स्वाभाविक मौत तक भी इंतजार नहीं था।