‘सवारी नहीं, संवेदना चाहिए’: हाथी बचाओ दिवस पर उजागर हुआ क्रूर सच, पर्यटन के नाम पर हो रहा शोषण

आगरा। 16 अप्रैल को मनाए जाने वाले ‘सेव द एलीफैंट डे’ के अवसर पर वाइल्डलाइफ एसओएस ने भारत में हाथियों के सामने खड़े गंभीर खतरों को उजागर करते हुए अनैतिक पर्यटन में उनके हो रहे शोषण पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। संस्था ने साफ कहा कि हाथियों का इस्तेमाल मनोरंजन और सवारी के लिए करना न केवल अमानवीय है, बल्कि उनके स्वास्थ्य और अस्तित्व के लिए भी घातक है।

Apr 15, 2026 - 18:22
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‘सवारी नहीं, संवेदना चाहिए’: हाथी बचाओ दिवस पर उजागर हुआ क्रूर सच, पर्यटन के नाम पर हो रहा शोषण

पर्यटन के नाम पर क्रूरता

देश के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों, खासकर राजस्थान और जयपुर जैसे शहरों में हाथियों का उपयोग पर्यटकों को सवारी कराने के लिए किया जाता है। इन हाथियों को घंटों तक कठोर सतहों पर खड़ा रहना पड़ता है, भारी वजन ढोना पड़ता है और भीषण गर्मी में काम करना पड़ता है। इसके चलते उन्हें पैरों की गंभीर बीमारियां, जोड़ों का दर्द और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

 ‘चंचल’ की मौत ने खोली सच्चाई

हाल ही में ‘चंचल’ नाम की हथनी की दर्दनाक मौत ने इस क्रूर व्यवस्था की पोल खोल दी। एक फोटोशूट के दौरान उसे गुलाबी रंग से रंगा गया और उसकी पीठ पर मॉडल बैठाई गई। इसके बाद उसकी बिगड़ती हालत और मौत ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया और पशु कल्याण कानूनों के सख्त पालन की मांग तेज हो गई।

 ‘रिफ्यूज टू राइड’ अभियान

वाइल्डलाइफ एसओएस लंबे समय से ‘रिफ्यूज टू राइड’ अभियान के जरिए हाथियों की सवारी के खिलाफ जागरूकता फैला रहा है। इस अभियान के तहत लोगों से अपील की जा रही है कि वे हाथी की सवारी जैसे आकर्षणों का बहिष्कार करें। अब तक 53,848 लोग इस मुहिम से जुड़ चुके हैं।

विशेषज्ञों की चेतावनी

संस्था के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि हाथियों का शोषण पर्यटन की मांग के कारण ही पनपता है।
वहीं सह-संस्थापक गीता शेषमणि ने स्पष्ट कहा कि हाथी कोई खिलौना नहीं हैं, बल्कि जटिल भावनाओं और जरूरतों वाले जीव हैं।
डायरेक्टर कंजरवेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एम वी के अनुसार, भारत में आज भी 300 से अधिक हाथी शोषण का शिकार हैं और ‘बेगिंग एलीफैंट अभियान’ के तहत 2030 तक इस प्रथा को समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।

 ‘हाथी सेवा’ से मिल रही राहत

संस्था द्वारा शुरू किया गया ‘हाथी सेवा’ मोबाइल क्लिनिक देशभर में बीमार और शोषित हाथियों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा रहा है। 2025 से अब तक करीब 200 हाथियों को इसका लाभ मिल चुका है।

वाइल्डलाइफ एसओएस का कहना है कि हाथियों को बचाने के लिए केवल कानून नहीं, बल्कि समाज की सोच बदलना जरूरी है। जिम्मेदार पर्यटन और संवेदनशील व्यवहार ही इन अद्भुत जीवों के भविष्य को सुरक्षित कर सकता है।

SP_Singh AURGURU Editor