समाज के वे तथाकथित ठेकेदार कौन थे जो 23 साल पहले दीवानी चौराहा पर स्थापना के समय चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा को तोड़ देना चाहते थे? शैलराज सिंह एडवोकेट के खुलासे ने उस दौर की राजनीति और साजिशों पर बहस छेड़ी
किसानों के मसीहा, भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की 123वीं जयंती पर आगरा में एक पुराना लेकिन बेहद संवेदनशील सवाल फिर सामने आ गया है। 23 वर्ष पूर्व एमजी रोड स्थित दीवानी चौराहा पर जिस समय चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा को स्थापित किया जा रहा था, उसी समय इस प्रतिमा को तोड़ने की कोशिश आखिर किसने की थी? इस रहस्य की ओर इशारा करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एवं चौधरी चरण सिंह के अनुयायी कुंवर शैलराज सिंह एडवोकेट की फेसबुक पोस्ट ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है।
आगरा। 23 दिसम्बर 2025 को चौधरी चरण सिंह की 123वीं जयंती के अवसर पर वरिष्ठ अधिवक्ता कुंवर शैलराज सिंह एडवोकेट ने अपनी फेसबुक पोस्ट के माध्यम से एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने लिखा है कि वर्ष 2002 में जब दीवानी चौराहा पर चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा स्थापित की जा रही थी, तब समाज के कुछ तथाकथित ठेकेदारों ने सब्बल से प्रतिमा को खंडित कराने की पुरजोर कोशिश की थी।
कुंवर शैलराज सिंह के अनुसार चौधरी चरण सिंह ने आगरा कॉलेज से विधि स्नातक की डिग्री प्राप्त की थी, इसी कारण नगर निगम आगरा में तत्कालीन पार्षद योगेन्द्र उपाध्याय (वर्तमान कैबिनेट मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार) और अंगद धारिया द्वारा प्रस्ताव रखा गया था। तत्कालीन नगर आयुक्त ओपीएन सिंह के सहयोग, अमर उजाला के तत्कालीन समूह प्रधान संपादक अशोक अग्रवाल एवं जगत सिंह फौजदार के मार्गदर्शन तथा स्वयं शैलराज सिंह के संयोजन में दीवानी चौराहा पर प्रतिमा स्थापना संभव हो सकी।
पोस्ट में बताया गया है कि कैसे वे (शैलराज सिंह) और ओपी वर्मा जीरो तापमान में जयपुर से खुली मेटाडोर में चौधरी साहब की प्रतिमा को लेकर आए थे। जगत सिंह फौजदार द्वारा जब चेन कुप्पी से प्रतिमा को प्लेटफॉर्म पर स्थापित कराया जा रहा था, उसी समय समाज के कुछ ठेकेदारों ने सब्बल से प्रतिमा को खंडित कराने की पुरजोर कोशिशें कीं। शैलराज सिंह का कहना है कि उस समय चौधरी अजित सिंह के हस्तक्षेप के बाद ही चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा टूटने से बच सकी थी।
कुंवर शैलराज सिंह ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि समाज के इन तथाकथित ठेकेदारों ने हर अच्छे काम में बाधाएं खड़ी कीं। उन्होंने बताया कि 23 दिसम्बर 2003 से उन्होंने और ओ.पी. वर्मा ने प्रतिमा स्थल पर चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दिए जाने सहित सात मांगों को लेकर 11 दिन का आमरण अनशन किया था। इस दौरान भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय महामंत्री और वर्तमान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी अनशन स्थल पर पहुंचे थे। राजनाथ सिंह ने अपनी सांसद निधि से चौधरी चरण सिंह प्रतिमा स्थल पर छतरी निर्माण कराये जाने की घोषणा की थी, जिसे बाद में आगरा विकास प्राधिकरण ने पूरा किया।
शैलराज सिंह का आरोप है कि प्रतिमा स्थापना से लेकर आमरण अनशन तक, वही तत्व लगातार व्यवधान डालते रहे, अफवाहें फैलाते रहे और स्वयं को चरण सिंह का अनुयायी बताकर समाज को गुमराह करते रहे हैं। उन्होंने समाज और चरण सिंह के अनुयायियों से अपील की है कि ऐसे लोगों की असलियत पहचानी जाए, जो मुखौटा लगाकर भीतर से विरोधी मानसिकता रखते हैं। उन्होंने कहा कि 23 साल पुराने इन घटनाक्रमों को सामने लाने की प्रेरणा उन्हें बीती रात ही हुई जब वे अपने आमरण अनशन के बारे में चिंतन मनन कर रहे थे। उसी दौरान तय किया कि समाज को ऐसे मुखौटाधारियों के बारे में जरूर बताया जाना चाहिए।
हालांकि शैलराज सिंह ने अपनी पोस्ट में किसी का नाम स्पष्ट रूप से नहीं लिया, लेकिन सवाल साफ है कि वह कौन था या कौन से लोग थे जो किसानों के मसीहा की प्रतिमा को तोड़ना चाहते थे? इस खुलासे ने एक बार फिर उस दौर की राजनीति, साजिशों और सामाजिक टकराव पर बहस छेड़ दी है।