सनी देओल की ‘बंटवारा 1947’ क्यों पिछड़ी? धीमी कहानी से कमजोर एडवांस बुकिंग तक गिनाईं जा रहीं ये वजहें

मुंबई। सनी देओल की फिल्म ‘बंटवारा 1947’ को लेकर शुरुआती स्तर पर उम्मीदें काफी थीं। सनी देओल, राजकुमार संतोषी और आमिर खान प्रोडक्शंस से जुड़े नामों ने फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता बढ़ाई, लेकिन सिनेमाघरों में रिलीज के बाद फिल्म उस उम्मीद के मुताबिक रफ्तार नहीं पकड़ सकी। हालांकि दर्शकों के एक वर्ग ने सनी देओल के अभिनय और फिल्म के भावनात्मक हिस्सों की सराहना की, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर कमजोर प्रदर्शन के पीछे कई वजहें सामने आई हैं।

Aug 20, 2026 - 21:47
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सनी देओल की ‘बंटवारा 1947’ क्यों पिछड़ी? धीमी कहानी से कमजोर एडवांस बुकिंग तक गिनाईं जा रहीं ये वजहें

धीमी कहानी ने दर्शकों को किया निराश

फिल्म को लेकर दर्शकों की सबसे प्रमुख शिकायत इसकी धीमी रफ्तार और लंबा नैरेशन रहा। शुरुआती हिस्से में विभाजन की घोषणा और रेलवे स्टेशन जैसे दृश्यों को प्रभावी माना गया, लेकिन आगे बढ़ने के साथ कहानी की गति कमजोर पड़ने की बात कही जा रही है। इससे फिल्म दर्शकों को लगातार बांधे रखने में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी।

सनी की छवि से अलग दिखा किरदार

सनी देओल की पहचान लंबे समय से एक्शन, दमदार संवाद और आक्रामक किरदारों से जुड़ी रही है। इसके विपरीत ‘बंटवारा 1947’ में उनका किरदार गंभीर और भावनात्मक प्रकृति का है। ऐसे में सनी देओल की लोकप्रिय स्टार इमेज का वह प्रभाव फिल्म को नहीं मिल पाया, जिसकी दर्शकों को उम्मीद थी।

फिल्म निर्माता राजकुमार संतोषी ने भी सनी देओल के मुस्लिम किरदार को लेकर निवेशकों की शुरुआती झिझक का जिक्र किया था। उनका कहना था कि निवेशक सनी देओल को पारंपरिक एक्शन हीरो के रूप में देखने के अभ्यस्त रहे हैं।

गंभीर विषय, लेकिन मास अपील सीमित

भारत-पाकिस्तान विभाजन जैसे संवेदनशील और गंभीर विषय पर बनी फिल्म में भावनात्मक और ऐतिहासिक पहलू मजबूत हैं, लेकिन यह विषय अपने आप में हर वर्ग के दर्शक को सिनेमाघर तक खींचने की गारंटी नहीं देता। फिल्म के संदेश और भावनात्मक दृश्यों को पसंद करने वाला दर्शक वर्ग जरूर मिला, लेकिन व्यापक स्तर पर मनोरंजन और मास अपील की कमी महसूस की गई।

आवारापन 2’ ने भी बढ़ाई मुश्किल

फिल्म के सामने सबसे बड़ी व्यावसायिक चुनौती ‘आवारापन 2’ रही। दोनों फिल्में एक ही दिन रिलीज हुईं और शुरुआती दौर में ‘आवारापन 2’ को दर्शकों का ज्यादा समर्थन मिला। इसके चलते स्क्रीन और दर्शकों के लिए दोनों फिल्मों के बीच सीधा मुकाबला रहा।

‘आवारापन 2’ के लगातार मजबूत प्रदर्शन और 100 करोड़ रुपये नेट का आंकड़ा पार करने के बाद ‘बंटवारा 1947’ पर दबाव और बढ़ गया। दर्शकों का एक बड़ा हिस्सा दूसरी फिल्म की ओर चला गया, जिससे ‘बंटवारा 1947’ के कारोबार को नुकसान पहुंचा।

एडवांस बुकिंग ने भी नहीं दिया सहारा

रिलीज से पहले फिल्म को लेकर चर्चा तो थी, लेकिन एडवांस बुकिंग उम्मीद के मुताबिक मजबूत नहीं रही। राष्ट्रीय मल्टीप्लेक्स चेन में करीब 20 हजार टिकटों की एडवांस बुकिंग हुई। फिल्म से जुड़े बड़े नामों को देखते हुए इसे कमजोर शुरुआत माना गया।

कमजोर एडवांस बुकिंग का असर शुरुआती शो की ऑक्यूपेंसी पर भी दिखाई दिया और फिल्म को रिलीज के बाद दर्शकों की मजबूत लहर का इंतजार करना पड़ा।

तारीफ मिली, लेकिन टिकट खिड़की तक नहीं पहुंची

फिल्म के साथ सबसे दिलचस्प स्थिति यह रही कि इसे पूरी तरह नकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। सोशल मीडिया पर कई दर्शकों ने इसे भावनात्मक, अच्छी और देखने लायक फिल्म बताया। सनी देओल के अभिनय और कहानी के भावनात्मक पक्ष की भी सराहना हुई।

लेकिन सकारात्मक प्रतिक्रियाएं बड़े पैमाने पर टिकट बिक्री में तब्दील नहीं हो सकीं। दूसरे दिन कमाई में उछाल के बाद सप्ताह के दिनों में कारोबार तेजी से नीचे आया। इससे साफ हुआ कि फिल्म को लेकर सकारात्मक राय रखने वाले दर्शकों की संख्या इतनी बड़ी नहीं थी कि वह बॉक्स ऑफिस पर लगातार मजबूत कमाई बनाए रख सके।

सिर्फ खराब फिल्म कहना नहीं होगा सही

‘बंटवारा 1947’ के कमजोर प्रदर्शन को केवल फिल्म की गुणवत्ता से जोड़ना पूरी तस्वीर नहीं होगी। धीमी कहानी, सनी देओल की पारंपरिक छवि से अलग भूमिका, गंभीर विषय की सीमित मास अपील, कमजोर एडवांस बुकिंग और ‘आवारापन 2’ से सीधी टक्कर ने मिलकर फिल्म की बॉक्स ऑफिस संभावनाओं को प्रभावित किया।

यानी फिल्म को लेकर दर्शकों में पूरी तरह नकारात्मक माहौल नहीं था, लेकिन सिनेमाघरों तक पर्याप्त संख्या में दर्शक न पहुंच पाने के कारण शुरुआती सकारात्मक प्रतिक्रिया मजबूत बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन में बदल नहीं सकी।

SP_Singh AURGURU Editor