स्वच्छता सर्वेक्षण की तैयारी जैसा काम आम दिनों में क्यों नहीं होता?
आगरा। केंद्र सरकार ने देश भर के शहरों और कस्बों में आज से स्वच्छ सर्वेक्षण शुरू कर दिया है। यह 30 अप्रैल तक चलेगा। इसी सर्वेक्षण के आधार पर सरकार की ओर से शहरों और कस्बों के निकायों को रैंकिंग दी जाएगी।
-देश में आज से शुरू हुए स्वच्छता सर्वेक्षण, आगरा कभी भी आ सकती है टीम
अभी यह तय नहीं है कि स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए आगरा में टीम कब आएगी, लेकिन यह कभी भी आ सकती है। नगर निगम ने शहर का मेकअप कर अपनी ओर से तैयारी पूरी कर ली है।
केंद्र सरकार की टीम आगरा में कूड़ा प्रसंस्करण केंद्रों के अलावा सौन्दर्यीकरण और सफाई व्यवस्था का जायजा लेगी। इस सर्वेक्षण में गार्बेज फ्री सर्टिफिकेशन के लिए 1300 अंक रखे गये हैं। नगर निगम की कोशिश है कि ये अंक अधिकाधिक हासिल किए जाएं क्योंकि यही अंक शहर की रैंकिंग को बढ़ा सकते हैं। इसी को ध्यान में रखकर गार्बेज फ्री मानकों को नगर निगम ने पूरा फोकस किया हुआ है।
नगर निगम ने शहर को चार जोन में बांट रखा है। स्वच्छता सर्वेक्षण को ध्यान में रखकर चारों जोन में नोडल अधिकारियों बनाकर इनकी जिम्मेदारियां तय कर दी गई हैं। महानगर के नालों, आवासीय क्षेत्रों के अलावा बाजारों, में सफाई पर ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में शहर भर से डलाबघर खत्म किए जा चुके हैं।
ताजनगरी में सब कुछ अच्छा ही अच्छा दिखे, इसकी भरसक कोशिशें चल रही हैं। चौराहों और डिवाइडरों पर ग्रीनरी, फूलों वाले पौधे दिखने लगी हैं। कलाकृतियां भी इन्हीं प्रयासों का हिस्सा हैं। 85 सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालयों को स्मार्ट टॉयलेट बनाना का काम भी हुआ है।
स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर पिछले कुछ समय से जो कसरत नगर निगम कर रहा है, क्या वही प्रयास हर समय नहीं चल सकते। इन प्रयासों से यह तो पता चल रहा है कि नगर निगम कर सकता है, लेकिन सामान्य दिनों में करता नहीं है। 30 अप्रैल तक यह सर्वेक्षण चलना है। यह मानकर चलना चाहिए कि कम से कम 30 अप्रैल तक तो शहर साफ सुथरा दिखेगा ही। बाद के दिनों की कोई गारंटी नहीं है क्योंकि निरंतर अपनी ड्यूटी के प्रति सजग रहना नगर निगम के अधिकारियों की आदत में शुमार नहीं है।
शहर को तभी चमकाया जाता है जब स्वच्छता सर्वेक्षण होना होता है। कभी मुख्यमंत्री या अन्य वीवीआईपी के आने पर शहर के उतने हिस्से को ही दुरुस्त कर दिया जाता है जहां वीवीआईपी का मूवमेंट होता है। बाकी शहर के लोगों को तो नगर निगम कीड़े मकोड़े समझकर उनके हाल पर छोड़ देता है।