यादव महासभा का अल्टीमेटम: थाने में महिला से मारपीट पर कार्रवाई न हुई तो विधानसभा घेरेंगे
आगरा। ट्रांस यमुना थाने में महिला सरजू यादव के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा मारपीट और छेड़छाड़ के मामले ने तूल पकड़ लिया है। शनिवार को यादव महासभा के पदाधिकारी पीड़ित महिला के साथ डीसीपी सिटी से मिले और दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। महासभा ने चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो पहले थाने का घेराव किया जाएगा और उसके बाद लखनऊ में विधानसभा का।
- डीसीपी सिटी को सौंपा ज्ञापन, चेतावनी – पहले थाने का करेंगे घेराव और फिर विधानसभा का
- पीड़ित महिला बोली – अपराधी नहीं हूं, फिर भी पुलिस ने किया बंद कमरे में उत्पीड़न
कालिंदी विहार निवासी सरजू यादव के घर में लाखों की चोरी हुई थी। पुलिस ने बिना बताए ही मुकदमा खत्म कर दिया। जब महिला जानकारी लेने थाने पहुंची तो नये थानाध्यक्ष रोहित गुर्जर से मुलाकात हुई। उसी दौरान निलंबित दरोगा भी आ गया, जो विवेचना अधिकारी रह चुका था। आरोप है कि उसने महिला को ‘बदतमीज’ कहा और विरोध करने पर थानाध्यक्ष ने भी दरोगा का साथ दिया।
इसके बाद महिला को बंद कमरे में ले जाकर पीटा गया, उसके साथ छेड़छाड़ की गई और महिला पुलिसकर्मियों से पिटवाया गया। सरजू यादव का कहना है कि उनके आंख के पास चोट आई है। उन्हें घूसे मारे गए। उन्होंने पुलिस उपायुक्त से कि वह अपराधी नहीं हैं, फिर भी उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया। उसे थाने से यही बताया जा रहा था कि चोरी के मामले में जांच चल रही है जबकि असलियत में केस में एफआर लगाई जा चुकी थी।
वीडियो वायरल और महासभा का अल्टीमेटम
मारपीट के बाद पीड़ित महिला का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह न्याय न मिलने पर आत्महत्या की धमकी देती नजर आई। इसके बाद मामला गर्मा गया और यादव महासभा महिला के समर्थन में आ गई। शनिवार को जिला अध्यक्ष एडवोकेट राजकुमार यादव व पदाधिकारी महिला को लेकर डीसीपी से मिले। डीसीपी ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
महासभा के नेताओं का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो राष्ट्रीय और प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में पहले थाने का घेराव होगा और फिर विधानसभा का।
ट्रांस यमुना पुलिस पर उठे बड़े सवाल
-लाखों रुपए की चोरी हुई तो चोरों को पकड़ने का प्रयास क्यों नहीं किया गया?
-इंस्पेक्टर भानु यादव ने विवेचना का क्या पर्यवेक्षण किया?
-एफआर लगाने के समय पीड़िता को जानकारी क्यों नहीं दी गई?
-यदि पुलिस सही थी तो महिला का वीडियो बनाने का विरोध क्यों किया गया?
-एफआर पर एसीपी ने सवाल-जवाब क्यों नहीं किए और इसे सही क्यों माना?
-यदि महिला ने पुलिसकर्मियों को पीटा था तो मुकदमा क्यों नहीं लिखा गया, शांति भंग में ही चालान क्यों किया?
-महिला की चोटें मारपीट की गवाही दे रही हैं। क्या पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज होगा?