यमुना का निरंतर घट रहा जलस्तर: लोगों को राहत की सांस लेकिन अब बीमारी का खतरा भी
आगरा। यमुना का जलस्तर अब लगातार नीचे जा रहा है। सिंचाई विभाग द्वारा रात्रि आठ बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार जलस्तर खतरे के निशान से 0.200 मीटर नीचे पहुँच गया है। आगरा में खतरे का निशान 152.400 मीटर है, जबकि जलस्तर घटकर 152.200 मीटर पर दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि हर घंटे पानी तेजी से कम हो रहा है।
यमुना का जलस्तर घटने से उन इलाकों से भी पानी उतर गया है, जहाँ बाढ़ के दौरान घरों और गलियों में पानी घुस आया था। कैलाश महादेव मंदिर, कैलाश गांव, मां गौरी टाउन, तनिष्क राजश्री गार्डन, लोहिया नगर, अनुराग नगर, मोतीमहल, गांधी स्मारक, शंभूनाथ कॉलोनी, अमर विहार, दयालबाग, हाथी घाट, घाट बजरिया, बल्केश्वर मंदिर के सामने, नगला बूढ़ी, मनोहरपुर, आगरा किला रोड सहित कई क्षेत्रों से बाढ़ का पानी अब उतर चुका है।
हालांकि, जिन घरों में पानी भर गया था वहाँ की स्थिति भयावह बनी हुई है। बल्केश्वर के रजवाड़ा इलाके के कई घरों में पानी भरने से दीवारों में दरारें आ गई हैं, फर्श फूल गए हैं और पूरा घर सीलन से भर गया है। लोगों का सामान खराब हो गया है और गलियों में सीवर ओवरफ्लो होने से अजीब सी दुर्गंध फैल गई है। कई घरों में सांप घुसने की घटनाएँ भी सामने आ रही हैं।
इधर जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी और विधायक छोटेलाल वर्मा ने आज बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। उन्होंने कहा कि जल्द ही फसलों, घरों और पशुओं के नुकसान का सर्वे शुरू होगा और उसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी ताकि प्रभावित परिवारों को आर्थिक मदद मिल सके।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि पानी उतरने के बाद तुरंत सिल्ट हटाने, सफाई, चूना, ब्लीचिंग, फॉगिंग और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराया जाए। साथ ही पशुओं का भी टीकाकरण किया जाए। प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती बीमारी फैलने से रोकना है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पानी उतरने के बावजूद उनके घरों की हालत बेहद खराब है। कहीं दीवारें गिरने की स्थिति में हैं तो कहीं बदबू और सीलन से रहना मुश्किल हो गया है। प्रभावितों ने मांग की कि प्रशासन राहत सामग्री और आर्थिक सहायता जल्द उपलब्ध कराए।