एटा के मकसूदपुर गांव में आधी रात घुसा 9 फ़ुट का मगरमच्छ, दहशत के बीच वाइल्डलाइफ़ एसओएस ने किया सफल रेस्क्यू
एटा। उत्तर प्रदेश के एटा ज़िले के मकसूदपुर गांव में आधी रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब पास की सिंचाई नहर से निकलकर करीब 9 फ़ुट लंबा मगरमच्छ आबादी वाले इलाके में पहुँच गया। मगरमच्छ को गाँव में घूमता देख लोगों में दहशत फैल गई और ग्रामीणों ने तुरंत वाइल्डलाइफ़ एसओएस की रैपिड रिस्पॉन्स टीम को सूचना दी। रात करीब दो बजे मिली सूचना के बाद टीम मौके पर पहुँची और कई घंटे तक चले सावधानीपूर्ण अभियान के बाद विशाल मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ लिया। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
मॉनसून के दौरान जलस्तर बढ़ने से नहरों और नदियों के आपस में जुड़ने के कारण मगरमच्छों का आबादी वाले इलाकों में पहुँच जाना असामान्य नहीं माना जाता। इसी वजह से एटा के मकसूदपुर गाँव में भी यह विशाल मगरमच्छ भटककर पहुँच गया था।
सूचना मिलते ही वाइल्डलाइफ़ एसओएस की रैपिड रिस्पॉन्स टीम विशेष बचाव उपकरणों के साथ मौके पर पहुँची। तड़के सुबह तक चले रेस्क्यू अभियान में टीम ने बेहद सतर्कता के साथ मगरमच्छ को बिना किसी नुकसान के काबू में कर लिया। पूरी कार्रवाई के दौरान न तो मगरमच्छ को कोई चोट आई और न ही किसी ग्रामीण को नुकसान पहुँचा।
रेस्क्यू के बाद विशेषज्ञों ने मगरमच्छ का स्वास्थ्य परीक्षण किया, जिसमें वह पूरी तरह स्वस्थ पाया गया। इसके बाद वन्यजीव विशेषज्ञों ने उसे इंसानी बस्तियों से दूर उसके लिए उपयुक्त प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया।
वाइल्डलाइफ़ एसओएस के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि मानसून के महीनों में बढ़ते जलस्तर के कारण जंगली जानवरों की स्वाभाविक आवाजाही बदल जाती है, जिससे वे इंसानी बस्तियों के अधिक करीब आ सकते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि ऐसे मामलों में सुरक्षित दूरी बनाए रखें और तुरंत रेस्क्यू टीम या वन विभाग को सूचना दें। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के सहयोग और टीम की त्वरित कार्रवाई के कारण यह अभियान पूरी तरह सुरक्षित ढंग से पूरा किया जा सका।
वाइल्डलाइफ़ एसओएस की सह-संस्थापक एवं सचिव गीता शेषमणि ने कहा कि मगरमच्छों की स्वस्थ आबादी किसी भी मीठे पानी के समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण संकेत है। उन्होंने लोगों से अपील की कि मगरमच्छ को पकड़ने, उसे घेरने या उसके आसपास भीड़ लगाने की कोशिश न करें, क्योंकि इससे इंसानों और वन्यजीव दोनों की जान खतरे में पड़ सकती है। लंबे समय तक तनाव की स्थिति जानवर के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है।
वाइल्डलाइफ़ एसओएस के कंजर्वेशन प्रोजेक्ट्स के निदेशक बैजू राज एम.वी. ने बताया कि राहत की बात यह रही कि मगरमच्छ पूरी तरह सुरक्षित था और उसे बिना किसी देरी के उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा सका। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान ऐसे मामलों की संभावना बढ़ जाती है। यदि कहीं मगरमच्छ या अन्य वन्यजीव दिखाई दें तो लोग स्वयं कोई जोखिम न उठाएँ और तत्काल वाइल्डलाइफ़ एसओएस हेल्पलाइन +91-99171 09666 पर सूचना दें।