वृंदावन में भूटान की सांस्कृतिक सुगंध, ‘पन्नाई यादों का कल्पतरु’ लोकार्पित
वृंदावन। अध्यात्म और संस्कृति की नगरी वृंदावन में सोमवार को भूटान की सांस्कृतिक विरासत की अनुगूंज सुनाई दी। अवसर था सुप्रसिद्ध लेखिका डॉ. शुभदा पाण्डेय द्वारा लिखित पुस्तक ‘पन्नाई यादों का कल्पतरु: भूटान’ के लोकार्पण का, जो गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी के सभागार में भव्य रूप से संपन्न हुआ।
इस पुस्तक में लेखिका ने भूटान की शांतिपूर्ण संस्कृति, लोक-संस्कारों, परंपराओं व भारत से आत्मिक जुड़ाव को बड़ी आत्मीयता से शब्दबद्ध किया है। उन्होंने इसे “कल्पतरु की तरह बिखरे अनुभवों की संजोई हुई थाती” कहा। डॉ. शुभदा पाण्डेय ने कहा, भूटान की संस्कृति, साहित्य, त्योहारों और लोक परंपराओं को आत्मीय दृष्टि से महसूस कर प्रस्तुत करना मेरे लिए एक साधना रहा। यह पुस्तक केवल एक यात्रा-वृत्तांत नहीं, एक गहन सांस्कृतिक संवाद है।
डॊ. शुभद्रा की पुस्तक पीढ़ियों को प्रेरणा देगी
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. रवीन्द्र कुमार शर्मा (संस्थापक कुलपति, शिक्षाविद्) ने की। उन्होंने कहा, शुभदा जी ने भूटान की संस्कृति को जिस सूक्ष्म दृष्टि से समझा और साहित्य में ढाला है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक है।
कार्यक्रम में विष्णु प्रकाश गोयल, अध्यक्ष, ब्रज लोक कला केंद्र, दीपक गोयल – सचिव, ब्रज लोक कला केंद्र, विहारी शरण जी महाराज – प्रसिद्ध भजन गायक, डा. एस.पी. गोस्वामी – पूर्व डीआईओएस, महेश चंद्र शर्मा – पूर्व अवर सचिव, विदेश मंत्रालय ने भी विचार रखे।
इन्हें दिया गया विशेष सम्मान
कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और शैक्षिक योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। ये थे डा. अनीता चौधरी – साहित्यकार, अशोक अज्ञ – ब्रज भाषा कवि, विनय गोस्वामी – लोक कलाकार, श्रीमती मोहिनी कृष्ण दासी – अध्यात्म व कविता साधिका, डा. एस.पी. गोस्वामी – पूर्व डीआईओएस।
मंच पर प्रमुख अतिथि के रूप में विष्णु प्रकाश गोयल, विहारी शरण जी महाराज, डा. एसपी गोस्वामी, महेश चंद्र शर्मा, और अन्य विद्वानों ने अपने विचार रखे। गीता शोध संस्थान के निदेशक दिनेश खन्ना और ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डॊ. उमेश चंद शर्मा ने लेखिका को सम्मानित किया। आरसीए महाविद्यालय की प्राचार्य डॊ. प्रीति जौहरी को भी सम्मानित किया गया।
सांस्कृतिक रिश्तों की संजीवनी
समारोह में सभी विद्वानों ने आशा व्यक्त की कि यह पुस्तक भारत-भूटान सांस्कृतिक रिश्तों को नई दिशा और गहराई देगी। लेखिका को बधाइयों की वर्षा के बीच कार्यक्रम सांस्कृतिक सौहार्द की मिसाल बन गया।
मोहिनी कृष्ण दासी का काव्य पाठ बना भावनाओं की ध्वनि
भागवत वक्ता मोहिनी कृष्ण दासी ने भारत-भूटान के आध्यात्मिक संबंधों और वृंदावन की महिमा पर एक मार्मिक कविता प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उनके शब्दों में रासलीला के नवजीवन की झलक भी देखने को मिली।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन, बांसुरी वादन और वंदना से हुई। संचालन शोध संस्थान के समन्वयक चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार ने किया। इस अवसर पर डा. अनीता चौधरी, डॊ. देव प्रकाश शर्मा, अशोक अज्ञ, विनय गोस्वामी, रासाचार्य घनश्याम शर्मा, रितु सिंह सहित कला, साहित्य व अध्यात्म जगत के अनेक प्रतिष्ठित चेहरे उपस्थित रहे।