सत्यवीर सिंह की कहानी सुनकर आप ही बताइए, इस सिस्टम से कोई लड़ सकता है क्या?

आगरा। अब और रिश्वत नहीं दूंगा’, यही वह जुमला था जो एक आम किसान को सिस्टम की आंखों की किरकिरी बना गया। ग्राम पंचायत रायभा में अपनी मां की जमीन के वारिसी नामांतरण (प ख ग 11) के लिए किसान सत्यवीर सिंह को सिस्टम ने न केवल नचा दिया, बल्कि जेल पहुंचाने तक के हालात पैदा कर दिये। पहले दस्तावेज मांगे गए और फिर काम करने के लिए रिश्वत। दो हजार रुपये दिए भी, लेकिन जब दस हजार और मांगे गए तो सत्यवीर ने मना कर दिया। इसके बाद उसे झूठे केस में फंसा दिया गया।

May 19, 2025 - 14:27
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सत्यवीर सिंह की कहानी सुनकर आप ही बताइए, इस सिस्टम से कोई लड़ सकता है क्या?

-हथकंडों की हद: रिश्वत से इनकार किया तो किसान को अपराधी बना दिया

-राजस्व निरीक्षक के हथकंडे को पहचानने में दरोगा ने भी बंद कर ली आंखें

-किरावली तहसील का चौंकाने वाला मामला, सिस्टम का भ्रष्ट चेहरा हुआ उजागर

कठवारी गांव के सत्यवीर सिंह पिछले कुछ साल से भरतपुर में जा बसे हैं। सत्यवीर सिंह की मां के नाम कठवारी के अलावा रायभा गांव में भी कुछ जमीन थी। मां के निधन के बाद सत्यवीर सिंह ने वारिसी नामांतरण (प ख ग 11) के लिए राजस्व निरीक्षक संजय कुमार के समक्ष आवेदन किया। कठवारी गांव की जमीन का नामांतरण तो सत्यवीर के नाम हो गया, लेकिन रायभा की जमीन का मामला लटका दिया गया। सत्यवीर सिंह अपने इस काम के लिए बार-बार भरतपुर से किरावली तहसील के चक्कर लगाते थे। फिर भी काम नहीं हो रहा था।

राजस्व निरीक्षक का निजी कर्मचारी

इसके बाद राजस्व निरीक्षक संजय कुमार के एक निजी कर्मचारी ने सत्यवीर सिंह को काम होने के रास्ते बताए। परेशान सत्यवीर सिंह ने राजस्व निरीक्षक के निजी कर्मचारी को दो हजार रुपये भी दे दिए, ताकि काम निपट जाए। इसके बाद तीन महीने तक फिर भी काम नहीं हुआ। सत्यवीर सिंह ने राजस्व निरीक्षक संजय कुमार के निजी कर्मचारी से बात की तो उसने कहा- दस हजार रुपये और लाओ। इस पर सत्यवीर सिंह का धैर्य जवाब दे गया।

अब और नहीं दूंगा पैसा, यह कहना था कि....

किसान सत्यवीर सिंह राजस्व निरीक्षक संजय कुमार के पास पहुंचे और सारे दस्तावेज सही होने के बाद भी काम न होने की वजह पूछी। इस बातचीत के दौरान ही किसान सत्यवीर सिंह ने कह दिया था कि दो हजार रुपये दे चुका हूं, अब और नहीं दूंगा। किसान की इन बातों से शायद राजस्व निरीक्षक को लगा कि बात आगे बढ़ सकती है, इसलिए उसने किरावली थाने में सत्यवीर सिंह के खिलाफ केस दर्ज करा दिया। आरोप लगाया कि किसान सत्यवीर सिंह ने उनके साथ अभद्रता कर सरकारी कार्य में बाधा डाली है। संजय कुमार ने रिपोर्ट में राजस्व निरीक्षक भगवान सिंह, चेनमैन संजीव कुमार और लेखपाल ज्योति सिकरवार के नाम गवाह के रूप में भी लिखा दिए।

तफ्तीश शुरू होने पर गवाह हैरान रह गये

इस मुकदमे की जांच किरावली थाने में तैनात दरोगा योगेंद्र सिंह को मिली। दरोगा योगेंद्र सिंह ने तफ्तीश की तो उन सारे गवाहों ने कथित घटना के प्रति हैरानी और अनभिज्ञता प्रकट की जो राजस्व निरीक्षक संजय कुमार ने अपनी रिपोर्ट में लिखाई थी। संजय कुमार ने जिन कर्मचारियों को गवाह बनाया गया, उन्होंने शपथ पत्र भी दे दिए कि उनके सामने कोई घटना नहीं घटी।

थानाध्यक्ष के कहने पर पर ही आईओ ने लगाई चार्जशीट

इस मामले में गवाहों द्वारा दिये गये शपथ पत्रों की बात किरावली के थानाध्यक्ष की जानकारी में भी आ गई। थानाध्यक्ष ने दरोगा योगेंद्र सिंह से कहा कि मामला झूठा है, इसलिए समाप्त कर देना चाहिए। दरोगा योगेंद्र सिंह ने गवाहों के शपथ पत्रों और थानाध्यक्ष की सलाह के बावजूद किसान सत्यवीर सिंह के खिलाफ चार्जशीट लगा दी।

...जब एसीपी ने लगाई दरोगा को फटकार

किरावली थाने के दरोगा योगेंद्र सिंह की इस कार्रवाई से आहत होकर सत्यवीर सभी गवाहों को लेकर अछनेरा के एसीपी से मिले। सब कुछ सुनने के बाद एसीपी ने भी जांच अधिकारी योगेंद्र सिंह को फटकार लगाई, लेकिन दरोगा को जो करना था, कर चुका था। अब किसान सत्यवीर सिंह डीसीपी पश्चिम से न्याय की उम्मीद लिए शिकायत लेकर गये हैं। सत्यवीर सिंह के साथ वे सारे गवाह भी गये हैं, जिनके नाम राजस्व निरीक्षक संजय कुमार ने अपनी रिपोर्ट में लिखाये थे।

हल्की गलती में भी रिश्वत की मांग

सत्यवीर के अनुसार उनकी मां के नाम में श्यामो और श्यामवती की मामूली त्रुटि पर उनसे रिश्वत की मांग की गई। जब पैसे नहीं दिए गए तो राजस्व निरीक्षक संजय कुमार द्वारा जमीन को ‘विवादित’ घोषित करने की धमकी दी गई। किसान सत्यवीर सिंह का सवाल है कि मौजा कठवारी में उन्हें जिन दस्तावेजों के आधार पर वारिसी मिल गई, लेकिन रायभा में उन्हीं दस्तावेजों पर अड़चनें खड़ी की गईं। राजस्व निरीक्षक की ओर से क्या यह देरी सुविधा शुल्क की प्रतीक्षा थी?

समाधान दिवस भी बेअसर

सत्यवीर सिंह का कहना है कि उन्होंने कई बार तहसील समाधान दिवस में भी शिकायत की, लेकिन जांच की निष्पक्षता पर लगातार सवाल खड़े होते रहे। अब सवाल यह है कि क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलना अब अपराध बन गया है? क्या एक आम नागरिक की आवाज इतनी कमजोर है कि अधिकारी मनमानी कर सकते हैं? क्या बिना राजनीतिक पहुंच वाला किसान कभी न्याय पाएगा?

आम आदमी कैसे लड़े इस सिस्टम से

किसान सत्यवीर सिंह का यह मामला शासन और प्रशासन में आगरा से लखनऊ तक बैठे अधिकारियों को मामूली लग सकता है, लेकिन इसमें सवाल यह है कि जब एक पीड़ित किसान की आवाज तहसील में बैठे तहसीलदार और एसडीएम तथा 30 किलोमीटर दूर बैठे जिलाधिकारी तक नहीं पहुंच पाई, तो 400 किलोमीटर दूर लखनऊ में बैठे अधिकारियों तक तो इसके पहुंचने की कल्पना भी नहीं की जा सकती। ...तो क्या सब कुछ ऐसे ही चलता रहेगा और जिन्हें जनता का सेवक बताया जाता है, वे ऐसे ही जनता को परेशान करते रहेंगे।

 

SP_Singh AURGURU Editor