विधायक के भतीजे के बाद अब पार्षद के बेटे से ठगी, नौकरी दिलाने वाले गिरोह पर मुकदमा
आगरा में भाजपा पार्षद के बेटे को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में नौकरी दिलाने का झांसा देकर 13.50 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि पांच लोगों ने फर्जी नियुक्ति पत्र देकर युवक से तीन महीने तक ट्रेनिंग कराई और नौकरी का भरोसा दिलाकर रकम वसूली। परिवार ने पैसे जुटाने के लिए कर्ज लिया और जमीन गिरवी रखी। शाहगंज पुलिस ने पांच नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में नौकरी का झांसा, भाजपा पार्षद के बेटे से 13.5 लाख की ठगी, पांच पर मुकदमा
आगरा। भाजपा विधायक के भतीजे से कथित नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का मामला सामने आने के बाद अब भाजपा पार्षद के बेटे के साथ भी लाखों रुपये की धोखाधड़ी का मामला प्रकाश में आया है। आरोप है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर युवक से 13.50 लाख रुपये ऐंठ लिए गए और उसे फर्जी नियुक्ति पत्र के आधार पर कई महीनों तक ट्रेनिंग भी कराई गई।
मामले में शाहगंज थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर राजेश कुमार बघेल, योगेन्द्र प्रताप सिंह, कु. अनुज, आनंद वर्मा और कल्याणी सिंह के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि आरोपियों ने प्रभावशाली संपर्कों का हवाला देते हुए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया। भरोसा दिलाने के लिए युवक को कथित तौर पर फर्जी नियुक्ति पत्र भी उपलब्ध कराया गया। इसके बाद उसे करीब तीन महीने तक ट्रेनिंग कराई गई, जिससे परिवार को विश्वास हो गया कि नौकरी वास्तविक है।
शिकायत के अनुसार, नौकरी लगने की उम्मीद में परिवार ने आरोपियों को चरणबद्ध तरीके से 13.50 लाख रुपये दे दिए। इतनी बड़ी रकम जुटाने के लिए परिवार को कर्ज लेना पड़ा और जमीन तक गिरवी रखनी पड़ी। बाद में जब नियुक्ति और दस्तावेजों की सच्चाई पर संदेह हुआ तो जांच करने पर पूरा मामला फर्जीवाड़े का निकला।
पीड़ितों का आरोप है कि पैसे वापस मांगने पर उन्हें टालमटोल किया गया। इसके बाद उन्होंने पुलिस की शरण ली। मामले की गंभीरता को देखते हुए शाहगंज पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी आरोपों की जांच की जा रही है। लेनदेन, दस्तावेजों और कथित नियुक्ति पत्र की सत्यता की पड़ताल की जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।