शस्त्र लाइसेंस फर्जीवाड़े में एसटीएफ जांच के बाद राष्ट्रीय शूटर से लेकर असलाह बाबू तक शिकंजे में
आगरा। आगरा में फर्जी दस्तावेजों अथवा गलत जानकारियां के आधार पर शस्त्र लाइसेंस बनवाने का मामला खुला तो हर कोई चौंक गया। मुकदमा दर्ज हो चुका है, लेकिन मुकदमे की स्थिति तक पहुंचने के लिए एसटीएफ को महीनों गहन जांच करनी पड़ी। इसके बाद ही इस गड़बड़झाले की परतें खुलीं। जांच में यह सामने आया है कि प्रभावशाली लोगों ने नियमों की अनदेखी कर न केवल असलहे हासिल किए, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की कमजोरी का भी जमकर फायदा उठाया।
एसटीएफ जांच अधिकारी इंस्पेक्टर यतींद्र शर्मा की कई महीने लंबी छानबीन के बाद अब तक पांच प्रमुख नामों के साथ तत्कालीन असलाह बाबू संजय कपूर को भी इस घोटाले में नामजद किया गया है। जांच पूरी होने के बाद डीजीपी के आदेश पर थाना नाई की मंडी में मुकदमा दर्ज किया गया है।
जांच में सामने आए आरोपी और उनके फर्जीवाड़े का ब्यौरा
भूपेंद्र सारस्वत
उम्र 21 वर्ष से कम होने के बावजूद शस्त्र लाइसेंस हासिल कर लिया।
वर्ष 2016-17 में लाइसेंस खोने की सूचना दी, लेकिन कोई गुमशुदगी रिपोर्ट या दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए।
लाइसेंस की छायाप्रति तक उपलब्ध नहीं है।
मोहम्मद जैद
वर्ष 2003 में शस्त्र लाइसेंस बनवाया।
शपथपत्र में जन्म तिथि 1975 दर्शाई, जबकि अन्य प्रमाण पत्रों में 1972 दर्ज है।
यह भ्रामक जानकारी शपथपत्र के दुरुपयोग की पुष्टि करती है।
अरशद खान
खुद को नेशनल शूटर बताकर एक के बाद एक पांच शस्त्र लाइसेंस बनवाए।
दस्तावेजों में उम्र कम बताई गई ताकि कुशल निशानेबाज मानते हुए लाइसेंस में छूट मिले।
किसी भी शस्त्र की खरीद से संबंधित वैध दस्तावेज नहीं प्रस्तुत किए।
राजेश कुमार बघेल
इनकी शस्त्र लाइसेंस फाइल ही उपलब्ध नहीं है, जिस पर शस्त्र क्रम दर्ज कराया गया था।
हथियार की खरीद से संबंधित कोई कागज नहीं दिए।
जांच में इनके संपर्क में शोभित चतुर्वेदी का नाम सामने आया।
शोभित चतुर्वेदी
पहले से उत्तराखंड के टिहरी से शस्त्र लाइसेंस प्राप्त था, लेकिन आगरा में दूसरा बनवाते वक्त इस जानकारी को छिपाया।
शपथपत्र में जन्म स्थान लखनऊ की जगह आगरा बताया।
बिना वैध प्रपत्र के शिव कुमार सारस्वत से पिस्टल खरीदी।
जांच अधिकारी को कोई वैध दस्तावेज नहीं दिखाए।
प्रशासनिक कार्रवाई और विभागीय दोषी
संजय कपूर (तत्कालीन असलाह बाबू)
बताया जा रहा है कि ये सभी फर्जी लाइसेंस संजय कपूर के कार्यकाल में बने थे।
उन्हें पहले भी तीन बार असलाह बाबू की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
दो बार निलंबन झेल चुके हैं।
घोटाले की भनक लगते ही 2024 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली, लेकिन जांच के दायरे में आ ही गए।
जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी ने उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
एसटीएफ की जांच कैसे हुई?
जांच का आदेश पुलिस एसटीएफ मुख्यालय से सीधे आया था।
इंस्पेक्टर यतींद्र शर्मा ने प्रपत्रों की सघन छानबीन की।
जन्म प्रमाण, शपथ पत्र, गुमशुदगी रिपोर्ट, हथियार क्रय-विक्रय के कागजात सहित कई स्तरों पर जांच हुई।
एसटीएफ की रिपोर्ट में हर आरोपी के दस्तावेजी झोल की स्पष्ट जानकारी दी गई है।
संजय कपूर की भूमिका गंभीर मानी जा रही है, और विभागीय जांच के बाद उनका पेंशन और अन्य लाभ रोके जाने की भी संभावना है।