तीन घंटे चली सियासी उठापटक, आगरा नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव में भाजपा का दबदबा
आगरा नगर निगम की कार्यकारिणी समिति के चुनाव में भाजपा ने छह में से पांच सीटें जीतकर अपना दबदबा कायम रखा है। कुल नौ उम्मीदवार मैदान में थे, लेकिन भाजपा और बसपा के बीच सहमति बनने के बाद तीन प्रत्याशियों ने नामांकन वापस ले लिया। इसके चलते मतदान की जरूरत नहीं पड़ी और पांच भाजपा तथा एक बसपा उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए।
भाजपा का 6 में से 5 सीटों पर कब्जा, बसपा को मिली एक सीट
आगरा। आगरा नगर निगम की कार्यकारिणी समिति के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर अपना राजनीतिक वर्चस्व साबित कर दिया है। शनिवार को नगर निगम सदन में हुई बैठक के दौरान कार्यकारिणी के छह नए सदस्यों का चुनाव संपन्न हुआ, जिसमें भाजपा के पांच उम्मीदवार और बहुजन समाज पार्टी की एक प्रत्याशी निर्वाचित हुईं। लंबे राजनीतिक मंथन और करीब तीन घंटे तक चली खींचतान के बाद आखिरकार चुनाव बिना मतदान के आम सहमति से संपन्न हो गया।
नगर निगम की कार्यकारिणी समिति में कुल 12 सदस्य होते हैं, जिनका चयन पार्षदों में से किया जाता है। इनमें से छह सदस्यों का कार्यकाल पिछले महीने समाप्त हो चुका था। इसी कारण महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाहा की अध्यक्षता में शनिवार सुबह 11 बजे नगर निगम सदन की विशेष बैठक बुलाई गई।
9 उम्मीदवारों ने भरा था नामांकन
कार्यकारिणी की छह सीटों के लिए कुल नौ नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे। भाजपा की ओर से प्रवीना राजावत, हेमंत प्रजापति, अतुल अवस्थी, रवि करोतिया, गुड्डू राठौर और वेद प्रकाश गोस्वामी ने नामांकन किया था। वहीं बसपा ने निधि सिंह, माता प्रसाद और पुष्पा कुमारी को मैदान में उतारा था। शुरुआत में चुनाव मुकाबले वाला नजर आ रहा था। भाजपा अपने सभी छह उम्मीदवारों को जिताने की रणनीति में जुट गई थी, जबकि बसपा भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के प्रयास में थी।
मतदान की तैयारी के बीच पहुंचे सांसद और विधायक
नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव में मतदान की संभावना को देखते हुए भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। केंद्रीय राज्य मंत्री एवं आगरा सांसद प्रो. एसपी सिंह बघेल, फतेहपुर सीकरी सांसद राजकुमार चाहर और विधायक डॉ. जीएस धर्मेश भी सदन में पहुंच गए थे। नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सांसदों और विधायकों को भी मतदान का अधिकार होता है। ऐसे में भाजपा ने अपने सभी जनप्रतिनिधियों और पार्षदों को पहले से ही सदन में मौजूद रहने के निर्देश दिए थे।
आखिरकार बनी सहमति, टला मतदान
करीब तीन घंटे तक चली राजनीतिक चर्चा और रणनीतिक बैठकों के बाद दोपहर करीब दो बजे भाजपा और बसपा के बीच सहमति बन गई। इसके बाद भाजपा की ओर से वेद प्रकाश गोस्वामी और बसपा की ओर से पुष्पा कुमारी तथा माता प्रसाद ने अपने नामांकन पत्र वापस ले लिए। नाम वापसी के बाद चुनाव निर्विरोध हो गया और मतदान की नौबत नहीं आई। इसके साथ ही कार्यकारिणी के छह नए सदस्यों के नामों पर मुहर लग गई।
ये बने नगर निगम कार्यकारिणी के नए सदस्य
प्रवीना राजावत (भाजपा)
हेमंत प्रजापति (भाजपा)
अतुल अवस्थी (भाजपा)
रवि करोतिया (भाजपा)
गुड्डू राठौर (भाजपा)
निधि सिंह (बसपा)
नगर निगम की कार्यकारिणी क्यों है अहम
नगर निगम की कार्यकारिणी समिति को नगर सरकार का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाला मंच माना जाता है। शहर के विकास कार्यों, बजट, योजनाओं और विभिन्न प्रशासनिक प्रस्तावों को अंतिम मंजूरी देने में कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में इस समिति में बहुमत हासिल करना राजनीतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा का विषय माना जाता है।