आगरा फिर बनेगा कहानी का केंद्र, नई पीढ़ी के कहानीकारों को तराशेगी तीन दिवसीय कार्यशाला, 7 सितंबर से ग्रांड होटल में जुटेंगे देश के छह नामचीन कहानीकार, युवा रचनाकारों को मिलेगा कहानी लेखन का सघन प्रशिक्षण
आगरा। कभी हिंदी-उर्दू के बड़े कहानीकारों की रचनात्मक जमीन रहा आगरा अब एक बार फिर कहानी लेखन का केंद्र बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। शहर में 7 से 9 सितंबर तक तीन दिवसीय कहानी लेखन कार्यशाला आयोजित की जा रही है, जिसमें देश के छह नामचीन कहानीकार नए और उभरते रचनाकारों को पेशेवर कहानी लेखन का प्रशिक्षण देंगे। कार्यशाला में कहानी की रूपरेखा तैयार करने, पात्र गढ़ने, संरचना विकसित करने और अपने अनुभवों को रचनात्मक कहानी में ढालने का व्यावहारिक अभ्यास कराया जाएगा।
कार्यशाला का शुभारंभ 7 सितंबर को अपराह्न चार बजे ग्रांड होटल में वरिष्ठ कथाकार जितेंद्र भाटिया (जयपुर) करेंगे। 8 और 9 सितंबर को विभिन्न सत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। हिंदी की चर्चित कहानी पत्रिका ‘कथादेश’, नई दिल्ली और आगरा की प्रमुख सांस्कृतिक संस्था ‘रंगलीला’ के संयुक्त तत्वावधान में होने वाली इस कार्यशाला का आयोजन एसिड हमलों की शिकार महिलाओं के सामाजिक संगठन ‘शीरोज़’ की ओर से किया जा रहा है।
पोस्टर विमोचन में सामने आया उद्देश्य
कार्यशाला से पूर्व आयोजित पोस्टर विमोचन कार्यक्रम में ‘कथादेश’ के संपादक हरिनारायण ने कहा कि उन्नीसवीं और बीसवीं सदी के पूर्वार्द्ध में आगरा हिंदी-उर्दू के नामचीन कहानीकारों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है, लेकिन बाद के वर्षों में शहर साहित्यिक गतिविधियों के मामले में पीछे चला गया। अब इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक में आगरा को फिर कहानी लेखन का ‘हब’ बनाने की कोशिशें तेज हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से आयोजित कार्यशाला में देश के छह बड़े कहानीकार मौजूद रहेंगे और प्रशिक्षुओं को तीन दिनों तक सघन प्रशिक्षण देंगे। उनके साथ हिंदी कहानी के ख्याति प्राप्त आलोचक जयप्रकाश (राजनांदगांव) और प्रियम अंकित (आगरा) भी प्रशिक्षणार्थियों का मार्गदर्शन करेंगे।
छह बड़े कहानीकार देंगे प्रशिक्षण
कार्यशाला में जितेंद्र भाटिया (जयपुर), महेश कटारे (ग्वालियर), विभांशु दिव्याल (गाजियाबाद), सत्यनारायण (जोधपुर), योगेंद्र आहूजा (नई दिल्ली) और शक्ति प्रकाश (आगरा) प्रशिक्षण देंगे। आलोचक जयप्रकाश और प्रियम अंकित भी कहानी लेखन की बारीकियों से प्रतिभागियों को अवगत कराएंगे।
हरिनारायण ने कहा कि अच्छा और पेशेवर कहानीकार बनने की राह में कई व्यावहारिक बाधाएं आती हैं। यदि लेखन की शुरुआत व्यावहारिक गतिविधियों से की जाए तो कहानी की रूपरेखा पर विचार करना आसान हो जाता है। रूपरेखा के आधार पर संरचना तैयार करने और पात्रों को विकसित करने का अभ्यास कहानी की मजबूत नींव तैयार करने में मदद करता है।
पुरानी कहानी परंपरा को फिर जीवित करने की कोशिश
वरिष्ठ संस्कृतिकर्मी अनिल शुक्ल ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य आगरा में जन्मे उर्दू और हिंदी के बड़े कहानीकारों की किस्सा-कहानी बुनने और गढ़ने की परंपरा को फिर से जीवित करना है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में हिंदी कहानी साहित्य के केंद्र में बनी हुई है, लेकिन आगरा के उभरते कहानीकार अपनी बेहतरीन रचनात्मक क्षमता के बावजूद कहानी की इस केंद्रीय भूमिका से खुद को पूरी तरह नहीं जोड़ पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य समकालीन समय में नई पीढ़ी के बीच कहानी के तत्व को मुख्यधारा से जोड़ना है।
अनुभवों को कहानी में ढालने का मिलेगा अभ्यास
कथाकार और लेखक अरुण डंग ने कहा कि कार्यशाला प्रशिक्षणार्थियों को यह समझने में मदद करेगी कि हर व्यक्ति के पास सुनाने के लिए कहानियां होती हैं, लेकिन उन्हें रचनात्मक ढंग से बुनना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। विशेषज्ञों के साथ तैयार किए गए वातावरण में प्रतिभागी अपने अनुभवों का अन्वेषण करेंगे और उन्हें कहानी के रचनात्मक धरातल पर उतारने का अभ्यास करेंगे।
युवाओं पर रहेगा विशेष फोकस
साहित्य समीक्षक प्रो. रामवीर सिंह ने कहा कि कहानी कहने और सुनने की परंपरा बहुत पुरानी है। लोग सदियों से कहानियां कहते और सुनते आए हैं। अब इस परंपरा को नए सिरे से आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, जिसमें युवाओं पर विशेष ध्यान रहेगा।
उर्दू कथाकार नसरीन बेगम ने बताया कि कार्यशाला में प्रशिक्षण लेने वाले अभ्यर्थियों को अगले चार महीनों में दो मिनी वर्कशॉप में भी बुलाया जाएगा। इन कार्यशालाओं में वे इस अवधि के दौरान लिखी गई अपनी कहानियों की जांच विशेषज्ञों से करा सकेंगे और लेखन को और अधिक पैना बनाने का अवसर मिलेगा।
दादी-नानी की कहानियों से पॉडकास्ट तक बदला दौर
डॉ. मुनीश्वर गुप्ता ने कहा कि दादी-नानी से कहानियां सुनने का दौर लगभग समाप्त हो गया है, जिससे नई पीढ़ी कहानी की उस सहज परंपरा से दूर हुई है। हालांकि स्टोरी टेलिंग और पॉडकास्ट जैसे नए माध्यमों के जरिए कहानी का सिलसिला आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में कहानी लेखन की कार्यशाला नई पीढ़ी को इस विधा से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।
पोस्टर विमोचन कार्यक्रम में युवा कहानीकार अर्जुन सवेदिया, मीडिया प्रभारी डॉ. महेश धाकड़, प्रवक्ता अजय तोमर, रामभारत उपाध्याय, रंगकर्मी अर्निका माहेश्वरी, मनोज सिंह, कमल सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
निःशुल्क होगी तीन दिवसीय कार्यशाला
ग्रांड होटल में 7 सितंबर को अपराह्न चार बजे होने वाले उद्घाटन के साथ कार्यशाला शुरू होगी। तीन दिवसीय कार्यशाला में प्रशिक्षण पूरी तरह निःशुल्क रहेगा। प्रतिभागियों को दी जाने वाली अध्ययन सामग्री के लिए भी कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। केवल दो दिन के लंच और दो हाई टी के लिए रियायती शुल्क के रूप में 1000 रुपये का भुगतान करना होगा।
आगरा की कहानी परंपरा के बड़े नाम
आयोजकों के अनुसार आगरा में जन्मे ख्याति प्राप्त कहानीकारों में लल्लू लाल जी, सुदर्शन, अमृतलाल नागर, इस्मत चुगताई, रांगेय राघव, श्रीराम शर्मा, राजेंद्र यादव, रावी और विभांशु दिव्याल के नाम शामिल हैं। कार्यशाला के जरिए इसी समृद्ध साहित्यिक परंपरा को नई पीढ़ी के रचनाकारों से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।