आगरा के शब्द स्वरुप सिंह मान ने अंतरराष्ट्रीय क्वांटम चुनौती में लहराया परचम, पहले ही प्रयास में जीता वैश्विक मंच का पहला पड़ाव

आगरा के मेधावी छात्र और दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्यार्थी शब्द स्वरुप सिंह मान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित ऑनलाइन प्रतियोगिता 'ग्लोबल क्वांटम मैकेनिक्स चैलेंज (GQMC)' के प्रथम चरण को पहले ही प्रयास में सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर शहर और प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। क्वांटम विज्ञान जैसे जटिल विषयों पर आधारित इस प्रतियोगिता में मिली सफलता ने उनकी वैज्ञानिक प्रतिभा को वैश्विक पहचान दिलाई है।

Jul 1, 2026 - 22:22
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आगरा के शब्द स्वरुप सिंह मान ने अंतरराष्ट्रीय क्वांटम चुनौती में लहराया परचम, पहले ही प्रयास में जीता वैश्विक मंच का पहला पड़ाव
शब्द स्वरूप सिंह।

आगरा। दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र शब्द स्वरुप सिंह मान ने अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन प्रतियोगिता ग्लोबल क्वांटम मैकेनिक्स चैलेंज (GQMC) के प्रथम चरण को पहले ही प्रयास में सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।

ग्लोबल क्वांटम मैकेनिक्स चैलेंज नियमित कॉलेज पाठ्यक्रम से आगे बढ़कर विद्यार्थियों को क्वांटम तरंगें (Wave Mechanics), क्वांटम अवस्थाएं (Quantum States), स्पिन तथा आधुनिक भौतिकी के अन्य जटिल विषयों पर अपनी समझ विकसित करने का अवसर प्रदान करती है। प्रतियोगिता का उद्देश्य छात्रों की विश्लेषणात्मक क्षमता को मजबूत करना, उन्हें वास्तविक वैज्ञानिक समस्याओं के समाधान के लिए तैयार करना तथा क्वांटम कंप्यूटिंग और सुरक्षित संचार जैसी भविष्य की तकनीकों के लिए प्रतिभाशाली शोधकर्ताओं की पहचान करना है।

इससे पहले भी शब्द स्वरुप सिंह मान कई शैक्षणिक उपलब्धियां अपने नाम कर चुके हैं। उन्होंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी-यूजी) में फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स और इंग्लिश सहित सभी प्रमुख विषयों में 99 परसेंटाइल प्राप्त किए थे। इसके अलावा उन्होंने सुमित राहुल मेमोरियल स्कूल से इंटरमीडिएट परीक्षा में 96.6 प्रतिशत तथा आरईआई स्कूल, दयालबाग से हाईस्कूल परीक्षा में 95.8 प्रतिशत अंक प्राप्त कर जिले और विद्यालय का गौरव बढ़ाया था।

शब्द स्वरुप सिंह मान के माता-पिता प्रीती सैनी और परम प्रीत सिंह मान दोनों दयालबाग डीम्ड विश्वविद्यालय, आगरा में कार्यरत हैं। पारिवारिक शैक्षणिक वातावरण के कारण बचपन से ही उनकी रुचि विज्ञान और अनुसंधान की ओर रही। उन्होंने अपनी इस सफलता का श्रेय गुरु महाराज, माता-पिता, संयुक्त परिवार तथा दयालबाग की अनुशासित और व्यवस्थित जीवन शैली को दिया।

उन्होंने बताया कि दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान उन्होंने पढ़ाई के साथ विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी जारी रखी। इस दौरान उन्होंने मोबाइल फोन और सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाए रखी, जिससे अध्ययन पर पूरा ध्यान केंद्रित रहा। समय मिलने पर उन्होंने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सेमिनार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सेमिनार तथा कई क्रैश कोर्स में भी भाग लिया, जिससे विषय की गहराई से समझ विकसित हुई।

SP_Singh AURGURU Editor