आगरा में चीन के नये वायरस को लेकर अलर्ट , एसएन में जांच की होगी व्यवस्था
आपात स्थिति के लिए सीएमओ ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
आगरा। चीन से फैला एचएमपीवी वायरस भारत में पहुंच चुका है। कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल व गुजरात में वायरस सक्रमित केस मिलने के बाद से आगरा अलर्ट में जारी कर दिया गया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने कर्नटक में तीन महीने की बच्ची और आठ महीने के बच्चे में संक्रमण पाया है। वहीं गुजरात में भी दो महीने के बच्चे में ये संक्रमण मिला है।
इन केस के बाद आगरा में भी स्वास्थ्य विभाग ने इसको लेकर एडवाइजरी जारी की है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि एचएमपीवी वायरस से बचाव के लिए एसएन में जांच की व्यवस्था की जाएगी।
आगरा में स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर नजर रखे हुए है और सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील है कि घबराएं नहीं और स्वास्थ्य निर्देशों का पालन करें। जन समुदाय के लिए किसी भी आपात स्थिति से निपटने को सीएमओ आगरा कार्यालय में कंट्रोल रूम स्थापित कर दिया गया है। सीएमओ ने +91 87913 93336, 0562-2600412 नंबर भी जारी किए हैं।
क्या हैं एचएमपीवी के लक्षण
हृयूमन मोटान्यूमोवायरस, जिसे एचएमपीवी के छोटे नाम से भी जाना जाता है। यह इंसानों की श्वसन प्रक्रिया पर प्रभाव डालने वाला वायरस है। श्वसन संबंधी अन्य वायरस की तरह यह भी संक्रमित लोगों के खांसने—छींकने के दौरान उनके करीब रहने से फैलता है। इस वायरस की वजह से लोगों को सर्दी, खांसी, बुखार, कफ की शिकायत हो सकती है। ज्यादा गंभीर मामलों में गला और श्वांस नली के जाम होने से लोगों के मुंह से सीटी जैसी खरखराहट भी सुनी जा सकती है। कुछ और गंभीर स्थिति में इस वायरस की वजह से लोगों को ब्रोंकियोलाइटिस यानी फेफड़ों में आक्सीजन ले जाने वाली नली में सूजन और निमोनिया की स्थिति पैदा कर सकता है। इसके चलते संक्रमितों को अस्प्ताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ सकती है। सामान्य मामलों में इस वायरस का असर तीन से पांच दिन तक रहता है।
इन लोगों को है सबसे ज्यादा खतरा
डॉक्टरों के अनुसार इस वायरस से सबसे ज्यादा खतरा छोटे बच्चों को है। यह वायरस बच्चों को ब्रोंकियोलाइटिस यानी फेफड़ों में आक्सीजन ले जाने वाली नली में सूजन और निमोनिया जैसी गंभीर स्थितियों का कारण बन सकता है। इसके अलावा एचएमपीवी वायरस से बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी सिस्टम वाले व्यक्तियों पर असर हो सकता है।