भारत स्टोर्स की करोड़ों की जमीन हड़पने का आरोप, सीजेएम के आदेश पर 14 लोगों के खिलाफ मुकदमा
भारत स्टोर्स की करोड़ों रुपये की जमीन को कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों में हेरफेर कर हथियाने के आरोप में सीजेएम कोर्ट के आदेश पर थाना हरीपर्वत में 14 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता नीरज गुप्ता ने मृतकों के नाम पर रिकॉर्ड बदलने और फर्जी इकरारनामे तैयार कर जमीन बेचने की साजिश का आरोप लगाया है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
फर्जी दस्तावेज, राजस्व अभिलेखों में कथित हेरफेर और मृतकों के नाम पर रिकॉर्ड बदलने का आरोप; कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने शुरू की जांच
आगरा। आगरा में करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन को कथित तौर पर फर्जी तरीके से हथियाने के मामले में नया मोड़ आ गया है। सीजेएम कोर्ट के आदेश पर थाना हरीपर्वत पुलिस ने 14 नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले में भारत स्टोर्स के अधिकृत प्रतिनिधि नीरज गुप्ता ने कंपनी की संपत्ति को हड़पने के लिए सुनियोजित साजिश रचे जाने का आरोप लगाया है।
शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने राजस्व विभाग के कुछ कर्मियों से कथित मिलीभगत कर जमीन से जुड़े सरकारी अभिलेखों में फर्जी तरीके से बदलाव कराया। आरोप है कि मृतक व्यक्तियों के नाम पर रिकॉर्ड में हेरफेर कर जमीन पर अवैध दावा तैयार किया गया और बाद में उसे वैध दिखाने की कोशिश की गई।
नीरज गुप्ता का आरोप है कि इस पूरे प्रकरण के तहत राजीव कुमार मिश्रा, जयप्रकाश दीक्षित और शुभम अग्रवाल के पक्ष में फर्जी इकरारनामे तैयार कराए गए। इसके जरिए भारत स्टोर्स की करोड़ों रुपये की जमीन को बेचने और कब्जाने की योजना बनाई गई थी।
मामले में कृष्ण गोपाल शर्मा, माखन शर्मा, मीरा कटारा समेत कुल 14 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने पहले भी संबंधित अधिकारियों और पुलिस से मामले की शिकायत की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद न्याय की गुहार लगाते हुए उन्होंने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अदालत का दरवाजा खटखटाया।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए सीजेएम कोर्ट ने थाना हरीपर्वत पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए। कोर्ट के निर्देश के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। राजस्व अभिलेखों, जमीन से संबंधित पंजीकृत दस्तावेजों और कथित इकरारनामों की बारीकी से जांच की जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। यह मामला सामने आने के बाद शहर में एक बार फिर जमीनों के फर्जीवाड़े और राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर के आरोपों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।