भारत के अड़ने से झुका अमेरिका, व्यापार को लेकर सीमित समझौता, ट्रंप करेंगे घोषणा
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। कई हफ्तों की बातचीत के बाद दोनों देश एक सीमित समझौते पर पहुंचे हैं। इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव कम होने की उम्मीद है और भविष्य में एक बड़े व्यापार समझौते का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।
वाशिंगटन। भारत और अमेरिका के बीच एक अहम समझौता हुआ है। दोनों देशों ने व्यापार को लेकर एक सीमित समझौता किया है। एक बड़े सरकारी अधिकारी ने यह जानकारी दी है। कई हफ्तों तक चली बातचीत के बाद यह समझौता हो पाया है। बातचीत के दौरान भारत अपनी मुख्य मांगों पर अड़ा रहा। अधिकारी ने कहा, 'अगर अमेरिका अड़ियल रहता तो हम टैरिफ के असर को झेलने के लिए तैयार थे।' उन्होंने आगे कहा, 'लेकिन वाशिंगटन ने बातचीत करने की इच्छा दिखाई, जिससे समझौता आगे बढ़ सका।' अभी समझौते की पूरी जानकारी नहीं मिली है। लेकिन, इसे दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव को कम करने की दिशा में एक अच्छा कदम माना जा रहा है। उम्मीद है कि इस समझौते में कुछ खास क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा। भविष्य में यह एक बड़े व्यापार समझौते का रास्ता खोल सकता है। सूत्रों के अनुसार, इस समझौते की घोषणा कुछ ही घंटों में हो सकती है। संभव है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसकी घोषणा करें।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर लंबे समय से बातचीत जारी थी। इस समझौते से दोनों देशों के रिश्तों में सुधार आने की उम्मीद है। अधिकारी ने बताया कि भारत अपनी मांगों पर कायम रहा। इसका मतलब है कि भारत ने अपने हितों को सुरक्षित रखने में सफलता पाई है।
अधिकारी ने कहा कि अगर अमेरिका नहीं मानता तो भारत को नुकसान होता। लेकिन, भारत इसके लिए तैयार था। उन्होंने कहा, 'अगर अमेरिका अड़ियल रहता तो हम टैरिफ के असर को झेलने के लिए तैयार थे।'
अभी समझौते की पूरी जानकारी का इंतजार है। लेकिन, माना जा रहा है कि इससे कुछ खास क्षेत्रों को फायदा होगा। यह भी उम्मीद है कि भविष्य में दोनों देश एक बड़ा व्यापार समझौता कर सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप जल्द ही इस समझौते की घोषणा कर सकते हैं।
यह डेवलपमेंट भारत के लिए भी बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक जीत है। कारण है कि यह उसे अमेरिकी बाजार तक बेहतर पहुंच प्रदान करेगा। साथ ही उसके निर्यात को बढ़ावा देने में मदद करेगा, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था चुनौतियों का सामना कर रही है। अब सभी की निगाहें विस्तृत घोषणा पर टिकी हैं ताकि यह पता चल सके कि किन खास क्षेत्रों को इस समझौते में शामिल किया गया है और इसके दीर्घकालिक निहितार्थ क्या होंगे।