‘घर के वास्ते’ में स्वयं श्रीवास्तव और मानिका दुबे की कविताओं पर देर रात तक गूंजती रहीं तालियां
आगरा। सूर सदन रविवार रात कविता, संवेदनाओं और साहित्यिक रसधारा का साक्षी बना। बहुप्रतीक्षित काव्य संध्या ‘घर के वास्ते’ में देश के लोकप्रिय युवा कवि स्वयं श्रीवास्तव और चर्चित कवयित्री मानिका दुबे ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि देर रात तक सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। परिवार, रिश्तों, प्रेम, सामाजिक सरोकारों और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित कविताओं ने श्रोताओं को भावुक भी किया और हास्य-व्यंग्य से ठहाके लगाने पर भी मजबूर कर दिया। आगरा के साथ-साथ आसपास के कई जिलों से पहुंचे साहित्य प्रेमियों की भारी उपस्थिति ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। स्वागत उद्बोधन के बाद मंच पर साहित्यिक माहौल बनते ही श्रोताओं की उत्सुकता चरम पर पहुंच गई।
लोकप्रिय युवा कवि स्वयं श्रीवास्तव ने अपनी चर्चित रचनाओं का पाठ करते हुए परिवार, रिश्तों, प्रेम, सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उनकी सहज शैली, दमदार मंच संचालन और भावपूर्ण अभिव्यक्ति ने श्रोताओं को पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर दिया। कई रचनाओं पर दर्शक भावुक हो उठे, वहीं हास्य और व्यंग्य से भरपूर प्रस्तुतियों पर पूरा सभागार ठहाकों और तालियों से गूंज उठा।
इसके बाद मंच संभालते हुए चर्चित कवयित्री मानिका दुबे ने नारी संवेदना, समकालीन समाज, जीवन संघर्ष और सामाजिक यथार्थ पर आधारित अपनी सशक्त रचनाओं का पाठ किया। उनकी ओजपूर्ण और भावपूर्ण प्रस्तुति को श्रोताओं ने खूब सराहा। प्रत्येक कविता के बाद तालियों की गूंज देर तक सभागार में सुनाई देती रही।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रोहतास श्रीवास्तव रहे, जबकि शंभू नाथ चौबे ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। आयोजन को सफल बनाने में दीपक जैन, विनय जैन, आशीष दुबे तथा आकाश ग्लोबल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।