18 अगस्त यानि ख़राब कविता दिवस: जब शब्द भी मस्ती में खो जाते हैं!

18 अगस्त 'ख़राब कविता दिवस' उन रचनाकारों को समर्पित है जो बिना झिझक और बिना परवाह किए कविता लिखते हैं। यह दिन नए और स्थापित दोनों कवियों को हल्की-फुल्की, मज़ाकिया या बेतुकी कविताओं के जरिए अभिव्यक्ति का मौका देता है। संदेश यही है कि कविता हमेशा परफ़ेक्ट हो यह ज़रूरी नहीं—असल मायने बेधड़क लिखने और रचनात्मकता का आनंद लेने में हैं।

Aug 18, 2025 - 17:41
 0
18 अगस्त यानि ख़राब कविता दिवस: जब शब्द भी मस्ती में खो जाते हैं!

18 अगस्त हम जैसे उन सभी ‘ख़राब कविता लिखने वालों’ के लिए समर्पित है जो बेधड़क, बेतुके और अजीब-सी कोशिशों के साथ शब्दों के साथ खेलते हैं। यह दिन उन्हें प्रोत्साहित करता है जो बिना किसी डर के कविता लिखते हैं, चाहे वह शैली शृंगारिक हो, हाइकू हो, लिमेरिक हो या मुक्त छंद।

कविता मानवीय अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है, लेकिन हर कोई शब्दों का जादूगर नहीं होता। जैसे अन्य हथियारों की तरह, कविता भी उपयोगकर्ता पर निर्भर करती है, इसे अच्छी या बुरी स्थिति में इस्तेमाल किया जा सकता है।

ख़राब कविता दिवस नए रचनाकारों के लिए अपनी कला को परखने का शानदार अवसर है। इससे ज्यादा और क्या चाहिए। यहां तक कि स्थापित कवि भी अपने हास्य और बुद्धि के ज़रिए घटिया कविताएं लिखने का आनंद ले सकते हैं।

सावधान! इस दिन के कवि आपको पुदीने के पेड़ पर चढ़ाते रहेंगे, ताकि आप बेधड़क, मज़ाकिया और कभी-कभार बेतुकी कविताएं लिखते रहें। क्योंकि हर किसी की कविता हर पाठक को ‘वाह’ नहीं लगती, जैसे हर सबके को अपना कलुआ कन्हैया लगता है।

बुरी कविता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं-

राजीव गुप्ता, जनस्नेही कलम से
लोक स्वर, आगरा।

SP_Singh AURGURU Editor