एसएन में मौत को मात, दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे बुजुर्ग को डॉक्टरों ने दी नई जिंदगी
एसएन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने 65 वर्षीय बुजुर्ग को दुर्लभ बीमारी गिलियन-बैरे सिंड्रोम (GBS) से बचाया। मरीज की हालत गंभीर थी और वह स्वयं सांस लेने में असमर्थ था। आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट और IVIG थेरेपी देकर उपचार किया गया। सात दिन तक गहन उपचार के बाद मरीज की हालत में सुधार हुआ। स्वस्थ होने पर मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। मरीज और परिजनों ने अस्पताल प्रशासन तथा डॉक्टरों की सराहना की। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने इसे टीमवर्क और त्वरित उपचार की सफलता बताया।
सांस लेने तक में असमर्थ हो चुके 65 वर्षीय मरीज का आईसीयू में चला जीवनरक्षक उपचार, सात दिन की जंग के बाद स्वस्थ होकर लौटा घर
आगरा। एसएन मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के चिकित्सकों ने एक बार फिर अपनी विशेषज्ञता और समर्पण का परिचय देते हुए एक 65 वर्षीय बुजुर्ग मरीज को दुर्लभ एवं जानलेवा न्यूरोलॉजिकल बीमारी ‘गिलियन-बैरे सिंड्रोम’ (जीबीएस) से बचाकर नया जीवन दिया है। मरीज की हालत इतनी गंभीर थी कि वह स्वयं सांस लेने में भी असमर्थ हो गया था, लेकिन चिकित्सकों की त्वरित कार्रवाई, आधुनिक उपचार और सतत निगरानी के चलते उसे पूरी तरह स्वस्थ कर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार मरीज को गंभीर अवस्था में एसएन मेडिकल कॉलेज लाया गया था। जांच में पता चला कि वह गिलियन-बैरे सिंड्रोम (Guillain-Barré Syndrome) से पीड़ित है। यह एक अत्यंत दुर्लभ बीमारी है, जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता ही नसों पर हमला करने लगती है। इसके कारण शरीर के विभिन्न अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है और कई मामलों में मरीज को लकवा, श्वसन विफलता और जीवन के लिए गंभीर खतरे का सामना करना पड़ सकता है। मरीज की स्थिति भी लगातार बिगड़ रही थी और उसे सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई हो रही थी। हालत को देखते हुए तत्काल उसे आईसीयू में भर्ती कर वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया।
आईसीयू में चली जिंदगी बचाने की जंग
इस चुनौतीपूर्ण मामले का उपचार वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नवनीत अग्रवाल एवं डॉ. अतिहर्ष मोहन अग्रवाल के नेतृत्व में शुरू किया गया। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने मरीज को जीवनरक्षक आईवीआईजी (IVIG - Immunoglobulin Therapy) थेरेपी दी, जो इस बीमारी के उपचार में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। लगातार निगरानी, समय पर दवाओं और बेहतर चिकित्सा प्रबंधन के कारण मरीज की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार आने लगा। करीब सात दिन तक आईसीयू में उपचार के बाद उसकी स्थिति स्थिर हुई, जिसके बाद उसे सामान्य वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। आगे की चिकित्सा और निगरानी के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो गया और मंगलवार को उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।
भावुक हुए मरीज और परिजन
अस्पताल से छुट्टी मिलने के दौरान मरीज और उनके परिजन भावुक नजर आए। उन्होंने एसएन मेडिकल कॉलेज की चिकित्सा व्यवस्था, डॉक्टरों की विशेषज्ञता और मेडिकल स्टाफ की संवेदनशीलता की सराहना की। मरीज ने कहा कि प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता के नेतृत्व में अस्पताल में उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जटिल से जटिल बीमारियों का भी यहां प्रभावी उपचार संभव हो रहा है, जिससे आम मरीजों को बड़ी राहत मिल रही है।
प्राचार्य बोले-टीमवर्क से मिली सफलता
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं डीन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने इस सफलता पर चिकित्सकीय टीम को बधाई देते हुए कहा कि संस्थान का उद्देश्य मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाली जीवनरक्षक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि गिलियन-बैरे सिंड्रोम जैसे गंभीर मामलों में समय पर पहचान, त्वरित निर्णय और सही उपचार मरीज की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हमारी टीम ने पूरी निष्ठा और दक्षता के साथ उपचार कर मरीज को स्वस्थ किया है। भविष्य में भी हम बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।