योगी सरकार में भाजपा नेता की दबंगई, पूर्व विधायक मधुसूदन शर्मा पर 50–60 लोगों संग अवैध कब्जे का आरोप
आगरा। एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश में अपराध और अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का दावा कर रहे हैं, तो दूसरी ओर आगरा से सामने आया यह मामला उनकी ही पार्टी के नेताओं की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। राजपुर चुंगी रोड स्थित शहीद नगर पुलिस चौकी के पास भाजपा के पूर्व विधायक मधुसूदन शर्मा पर खुलेआम गुंडागर्दी और अवैध कब्जे के आरोप लगे हैं।
शहीद नगर पुलिस चौकी के पास गरीब का खोखा तोड़ा, पुलिस बनी मूकदर्शक, कार्रवाई पर सवाल
आगरा। एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश में अपराध और अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का दावा कर रहे हैं, तो दूसरी ओर आगरा से सामने आया यह मामला उनकी ही पार्टी के नेताओं की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। राजपुर चुंगी रोड स्थित शहीद नगर पुलिस चौकी के पास भाजपा के पूर्व विधायक मधुसूदन शर्मा पर खुलेआम गुंडागर्दी और अवैध कब्जे के आरोप लगे हैं।
पीड़ित कृष्णा शर्मा, अनिल बिधोलिया, अमित कुमार, रणधीर सिंह और दीपू गर्ग का आरोप है कि श्रीजी कॉम्पलेक्स के बाहर वर्षों से लगे खोखों को हटाने के लिए पूर्व विधायक मधुसूदन शर्मा करीब 50–60 दबंगों के साथ मौके पर पहुंचे। आरोप है कि दबंगों ने एक गरीब व्यक्ति के रोज़ी-रोटी का सहारा बने खोखे को पूरी तरह तोड़ दिया। इतना ही नहीं, दीवार गिराकर और गेट हटाकर पार्किंग की जमीन पर जबरन कब्जा भी कर लिया गया।
पीड़ितों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है। नवंबर 2024 में भी उन्होंने इसी मामले को लेकर पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन तब भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब एक बार फिर खुलेआम तोड़फोड़ और कब्जे की कार्रवाई ने पुलिस की भूमिका को सवालों के घेरे में ला दिया है।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि पूरी घटना शहीद नगर पुलिस चौकी के बेहद नजदीक हुई। आरोप है कि पुलिस मौके पर मौजूद थी और सब कुछ अपनी आंखों से देखती रही, लेकिन न तो दबंगों को रोका गया और न ही पीड़ितों की मदद की गई। काफी देर तक तोड़फोड़ चलती रही, पर पुलिस की ओर से कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया।
पीड़ित परिवार ने मजबूर होकर मामले की शिकायत पुलिस कमिश्नर कार्यालय में की है। उनका आरोप है कि पूर्व विधायक और भाजपा नेता के राजनीतिक दबाव के चलते स्थानीय पुलिस कार्रवाई से बच रही है, जिससे उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद लगातार कमजोर होती जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सत्ताधारी दल के प्रभावशाली नेताओं पर ही कानून का शिकंजा नहीं कसता, तो आम और गरीब व्यक्ति किससे न्याय की उम्मीद करे। अब सबकी निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह निष्पक्ष कार्रवाई कर कानून का राज स्थापित करता है या यह मामला भी राजनीतिक दबाव में दबकर रह जाएगा।