बांकीपुर में बीजेपी का ‘सरप्राइज कार्ड’, आखिरी वक्त पर बंटी की जगह नीरज सिन्हा पर खेला दांव
बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर भाजपा ने बड़ा बदलाव करते हुए अभिषेक कुमार सिन्हा ‘बंटी’ की जगह नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है। बंटी ने पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए नामांकन वापस ले लिया था। पटना के रहने वाले 32 वर्षीय नीरज कुमार सिन्हा लंबे समय से भाजपा संगठन से जुड़े हैं और वर्तमान में नरेंद्र भारती मंडल के अध्यक्ष हैं। बूथ अध्यक्ष से शुरू हुई उनकी राजनीतिक यात्रा अब विधानसभा चुनाव तक पहुंच गई है।
पटना। बिहार की चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने आखिरी समय में बड़ा बदलाव करते हुए अपने उम्मीदवार को बदल दिया है। पार्टी ने पहले घोषित प्रत्याशी अभिषेक कुमार सिन्हा ‘बंटी’ की जगह अब युवा नेता नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतार दिया है। अभिषेक सिन्हा ने पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए नामांकन के अगले ही दिन अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली, जिसके बाद बीजेपी ने तेजी से नया चेहरा सामने किया।
बीजेपी के इस फैसले ने न सिर्फ विपक्ष, बल्कि पार्टी के अंदर भी हलचल बढ़ा दी है। कई वरिष्ठ और चर्चित नेताओं के नाम चर्चा में होने के बावजूद संगठन ने अपेक्षाकृत कम चर्चित लेकिन लंबे समय से जमीनी स्तर पर काम कर रहे नीरज कुमार सिन्हा पर भरोसा जताया है।
कौन हैं नीरज कुमार सिन्हा?
पटना के मीठापुर बी-एरिया निवासी नीरज कुमार सिन्हा का जन्म 1 जुलाई 1994 को हुआ था। 32 वर्षीय नीरज अविवाहित हैं और उन्होंने स्नातक (बी.ए.) तक शिक्षा प्राप्त की है। उनका परिवार लंबे समय से जनसंघ और भाजपा की विचारधारा से जुड़ा रहा है। नीरज के चाचा स्वर्गीय नरेंद्र भारती जनसंघ के सक्रिय और समर्पित कार्यकर्ता थे। वर्ष 1984 में उनके निधन के बाद पार्टी ने उनकी स्मृति में क्षेत्र के मंडल का नाम ‘नरेंद्र भारती मंडल’ रखा। वर्तमान में नीरज कुमार सिन्हा इसी मंडल के लगातार दूसरी बार अध्यक्ष हैं।
बूथ अध्यक्ष से विधानसभा उम्मीदवार तक का सफर
नीरज कुमार सिन्हा ने वर्ष 2006 में भाजपा की प्राथमिक सदस्यता लेकर राजनीति में कदम रखा था। संगठन में उनकी यात्रा बेहद साधारण कार्यकर्ता के रूप में शुरू हुई। उन्होंने सबसे पहले नरेंद्र भारती मंडल में बूथ अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद संगठन में सक्रियता और कार्यशैली के कारण उन्हें मंडल महामंत्री बनाया गया। बाद में वे भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के जिला उपाध्यक्ष भी रहे। लगातार संगठनात्मक काम और पार्टी के प्रति सक्रियता के चलते नीरज दो बार मंडल अध्यक्ष चुने गए और वर्तमान में भी इस पद की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
बंटी के हटने से उठे कई सवाल
अभिषेक कुमार सिन्हा ‘बंटी’ के अचानक नामांकन वापस लेने के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच भी यह सवाल उठ रहा है कि आखिर नामांकन दाखिल करने के अगले ही दिन उन्होंने चुनावी मैदान छोड़ने का फैसला क्यों लिया।
बंटी को टिकट मिलने के बाद यह चर्चा थी कि पार्टी नेतृत्व ने अपने पुराने सहयोगी पर भरोसा जताया है। वहीं, अब नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद भाजपा को उनके राजनीतिक और सामाजिक परिचय को विस्तार से सामने लाना पड़ा है।
कायस्थ समीकरण पर भी नजर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी ने बांकीपुर सीट पर सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। नीरज कुमार सिन्हा कायस्थ समाज से आते हैं, जिसे स्थानीय राजनीति में प्रभावशाली माना जाता है। पार्टी ने उनके जनसंघी परिवार और लंबे संगठनात्मक अनुभव को भी चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बनाया है। ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा का यह नया दांव चुनावी मैदान में कितना असर दिखाता है।
प्रशांत किशोर के सामने बीजेपी की नई रणनीति
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव पहले से ही राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की सक्रियता और विपक्षी दलों की रणनीति के बीच भाजपा ने आखिरी समय में उम्मीदवार बदलकर मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि संगठन की पृष्ठभूमि से आने वाले नीरज कुमार सिन्हा चुनावी मैदान में पार्टी की उम्मीदों पर कितना खरे उतरते हैं।