24 साल बाद इंसाफ की सांस: बरेली सेंट्रल जेल से रात नौ बजे आज़ाद हुए मैनपुरी के आज़ाद ख़ान

कभी सलाखों के पीछे कटती ज़िंदगी, कभी अदालतों की तारीखें और कभी रिहाई की कानूनी अड़चनें, आख़िरकार 24 साल बाद इंसाफ ने दस्तक दी। डकैती के एक पुराने मामले में दोषमुक्त करार दिए गए मैनपुरी के आज़ाद ख़ान बुधवार रात ठीक नौ बजे बरेली सेंट्रल जेल से आज़ाद होकर खुली हवा में सांस ले सके।

Jan 22, 2026 - 13:28
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24 साल बाद इंसाफ की सांस: बरेली सेंट्रल जेल से रात नौ बजे आज़ाद हुए मैनपुरी के आज़ाद ख़ान
24 साल बाद जेल से आजाद हुए मैनपुरी के आजाद खान।

-रमेश कुमार सिंह-

बरेली। मैनपुरी जिले के 45 वर्षीय आज़ाद ख़ान ने अपने जीवन की आधी उम्र बरेली की सेंट्रल जेल में बिताई। वर्ष 2001 के आसपास डकैती के आरोप में गिरफ़्तार किए गए आज़ाद ख़ान को मैनपुरी की विशेष अदालत ने वर्ष 2002 में डकैती व गंभीर चोट पहुंचाने के मामले में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी। साथ ही 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था, जिसे अदा न करने पर दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास निर्धारित किया गया था।

इसके अलावा, मैनपुरी के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय संख्या चार ने आर्म्स एक्ट और जानलेवा हमले के एक अन्य मामले में आज़ाद ख़ान को दस वर्ष की सज़ा और सात हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया था। जुर्माना न भरने पर एक वर्ष की अतिरिक्त सज़ा भी तय की गई थी।

इन सजाओं के बाद आज़ाद ख़ान पहले फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में निरुद्ध रहे और वर्ष 2003 में सज़ा भुगतने के लिए उन्हें बरेली सेंट्रल जेल भेज दिया गया।

आजाद ख़ान की ओर से इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपील दायर की गई। साक्ष्यों और चश्मदीद गवाहों के अभाव को आधार बनाते हुए उच्च न्यायालय ने 19 दिसंबर 2025 को डकैती के मामले में उन्हें दोषमुक्त कर दिया। आर्म्स एक्ट और जानलेवा हमले से जुड़ी सज़ा वह पहले ही पूरी कर चुके थे।

हालांकि, उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद मैनपुरी न्यायालय में जमानत और रिहाई से जुड़ी प्रक्रिया पूरी न होने के कारण रिहाई आदेश जारी नहीं हो सका। मामला सामने आने पर बरेली सेंट्रल जेल के वरिष्ठ अधीक्षक अविनाश गौतम ने मैनपुरी के विशेष न्यायाधीश को पत्र लिखकर रिहाई आदेश उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। इसके बाद बरेली सेंट्रल जेल के जेलर नीरज कुमार और मैनपुरी जेल प्रशासन के बीच संवाद हुआ और ई-मेल के माध्यम से रिहाई परवाना बरेली सेंट्रल जेल को प्राप्त हुआ।

जेलर नीरज कुमार ने बताया कि आज़ाद ख़ान की रिहाई के लिए उनके भाई मस्तान ख़ान से 20 हजार रुपये का निजी बंधपत्र भरवाया गया। शेष सात हजार रुपये जुर्माने की राशि एक सामाजिक संस्था छोटी सी आशा और जेल कर्मियों ने आपसी चंदा जुटाकर जमा कराई। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद बुधवार रात ठीक नौ बजे आज़ाद ख़ान को सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया।

रिहाई के बाद आज़ाद ख़ान अपने भाई के साथ मैनपुरी जिले के एलाऊ थाना क्षेत्र स्थित मोहल्ला ज्योति कटारा के लिए रवाना हो गए। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि सेंट्रल जेल के अधिकारियों, कर्मचारियों और मदद करने वाली संस्था का यह एहसान वह जीवन भर नहीं भूलेंगे और सभी के लिए दुआ करते रहेंगे।

SP_Singh AURGURU Editor