सड़क टूटी, नालियां जाम, अब बोले लोग-ऐसे शहर में नहीं रहना, मकान बिकाऊ है

आगरा के नगर निगम क्षेत्र के सेक्टर-6 (वार्ड-47) में बदहाल सड़क, सीवर, जल निकासी और सफाई व्यवस्था से नाराज लोगों ने अपने घरों पर "यह मकान बिकाऊ है" के पोस्टर लगाकर विरोध दर्ज कराया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद नगर निगम और जनप्रतिनिधियों ने समस्याओं का समाधान नहीं किया। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो उन्हें मजबूरन क्षेत्र छोड़ना पड़ेगा।

Jun 30, 2026 - 22:48
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सड़क टूटी, नालियां जाम, अब बोले लोग-ऐसे शहर में नहीं रहना, मकान बिकाऊ है
मकान बिकाऊ के लगे पोस्टर।

आगरा। नगर निगम क्षेत्र के सेक्टर-6 (वार्ड-47) में मंगलवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने शहर की मूलभूत सुविधाओं को लेकर किए जा रहे दावों पर सवाल खड़े कर दिए है। वर्षों से सड़क, सीवर, नालियों और सफाई व्यवस्था की बदहाली से जूझ रहे स्थानीय लोगों ने अपने घरों के बाहर "यह मकान बिकाऊ है" के पोस्टर चस्पा कर विरोध दर्ज कराया।

निवासियों का कहना है कि जब बार-बार शिकायत करने के बावजूद भी प्रशासन और नगर निगम की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तब उन्होंने यह अनोखा तरीका अपनाया ताकि जिम्मेदार अधिकारियों तक उनकी पीड़ा पहुंच सके।

टूटी सड़कें, जाम नालियां और सड़कों पर बहता गंदा पानी

स्थानीय लोगों के मुताबिक क्षेत्र की अधिकांश सड़कें जर्जर हो चुकी हैं। जगह-जगह गहरे गड्ढे हैं, जिनसे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। नालियां लंबे समय से जाम हैं और सीवर लाइन चोक होने के कारण गंदा पानी सड़कों पर भर जाता है। बरसात के दिनों में हालात और गंभीर हो जाते हैं। गंदे पानी और नियमित सफाई न होने से पूरे इलाके में बदबू फैलती है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। लोगों का कहना है कि इन परिस्थितियों में रहना दिन-प्रतिदिन मुश्किल होता जा रहा है।

शिकायतें हुईं, लेकिन समाधान नहीं

स्थानीय निवासी राधा ने बताया कि क्षेत्र की समस्याओं को लेकर कई बार नगर निगम और संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। उन्होंने कहा कि अब स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि लोग अपना घर छोड़ने और बेचने तक पर मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि क्षेत्र के मंदिर की बाउंड्री वॉल निर्माण की मांग भी लंबे समय से की जा रही है, लेकिन इस दिशा में भी कोई कदम नहीं उठाया गया।

जनप्रतिनिधियों की सक्रियता पर भी सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्रीय पार्षद कभी-कभार ही इलाके का दौरा करते हैं और समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेते। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत दर्ज कराने के बावजूद न तो सफाई व्यवस्था में सुधार हुआ और न ही सीवर और जल निकासी की समस्या का स्थायी समाधान निकाला गया।

निवासियों का कहना है कि अगर मूलभूत सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं होंगी तो आखिर लोग ऐसे इलाके में कैसे रहेंगे। इसी नाराजगी के चलते कई परिवार अब अपने मकान बेचने पर विचार कर रहे हैं, जबकि कुछ लोगों ने विरोध के प्रतीक के रूप में घरों पर "मकान बिकाऊ है" के पोस्टर लगा दिए हैं।

व्यवस्था पर बड़ा सवाल

यह विरोध केवल पोस्टर लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नगर निगम की कार्यप्रणाली और शहरी व्यवस्थाओं पर एक बड़ा सवाल भी खड़ा करता है। जब नागरिकों को अपनी आवाज सुनाने के लिए घर बेचने का संदेश सार्वजनिक करना पड़े, तो यह संकेत है कि शिकायत निवारण व्यवस्था कहीं न कहीं अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर रही। अब देखना होगा कि यह विरोध जिम्मेदार अधिकारियों को जगाता है या फिर यह भी केवल आश्वासनों तक सीमित रह जाता है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि क्षेत्र की सड़क, नाली, सीवर और सफाई व्यवस्था में तत्काल सुधार कराया जाए, ताकि लोगों को अपने ही घर छोड़ने की बात सोचने पर मजबूर न होना पड़े।