बिल्डर मून गोयल को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, अग्रिम जमानत मंजूर

आगरा के चर्चित भूमि विवाद प्रकरण में आरोपी बिल्डर मून गोयल को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सिकंदरा थाने में दर्ज मुकदमा संख्या 255/2025 में हाईकोर्ट ने मून गोयल की अग्रिम जमानत मंजूर कर ली है। न्यायालय ने कहा कि प्रथम दृष्टया केवल अपंजीकृत दस्तावेज के आधार पर आपराधिक दायित्व तय नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और दो जमानतदारों पर रिहाई का आदेश दिया है।

Jun 11, 2026 - 20:26
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बिल्डर मून गोयल को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, अग्रिम जमानत मंजूर

हाईकोर्ट ने अपंजीकृत दस्तावेज पर आपराधिक दायित्व तय करने पर उठाए सवाल

आगरा। आगरा के चर्चित भूमि विवाद मामले में आरोपी बिल्डर मून गोयल को इलाहाबाद हाईकोर्ट से महत्वपूर्ण राहत मिली है। सिकंदरा थाना क्षेत्र में दर्ज मुकदमा संख्या 255/2025 में सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी की एकल पीठ ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली।

न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी किए बिना यह राहत प्रदान की जा रही है। साथ ही कहा गया कि यदि जमानत की शर्तों का उल्लंघन होता है तो ट्रायल कोर्ट कानून के अनुसार जमानत निरस्त करने के लिए स्वतंत्र होगा।

पांच वकीलों ने किया विरोध, फिर भी मिली राहत

सूत्रों के अनुसार, वादी पक्ष की ओर से मून गोयल की अग्रिम जमानत का विरोध करने के लिए पांच अधिवक्ताओं की टीम अदालत में मौजूद रही। वादी शोभिक की ओर से जमानत निरस्त करने की जोरदार पैरवी की गई, लेकिन दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने आरोपी को अग्रिम जमानत देने का फैसला सुनाया।

अपंजीकृत दस्तावेज पर कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अदालत ने एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू पर टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल अपंजीकृत (Unregistered) दस्तावेज के आधार पर किसी व्यक्ति का आपराधिक दायित्व स्वतः निर्धारित नहीं किया जा सकता। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह टिप्पणी भविष्य में इस प्रकार के भूमि एवं संपत्ति विवादों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण संदर्भ के रूप में देखी जा सकती है। हालांकि अदालत ने मामले के तथ्यों पर कोई अंतिम राय व्यक्त नहीं की है और जांच व ट्रायल की प्रक्रिया जारी रहेगी।

50 हजार के निजी मुचलके पर रिहाई

हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि मून गोयल को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके तथा समान राशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करने पर गिरफ्तारी से संरक्षण दिया जाएगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच में सहयोग करना और न्यायालय द्वारा निर्धारित सभी शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा।

अधिवक्ताओं ने रखा पक्ष

सुनवाई के दौरान आरोपी मून गोयल की ओर से अधिवक्ता अजय कुमार पांडेय एवं सुशील वरद नाथ दुबे ने पक्ष रखते हुए कहा कि मामला मूल रूप से दीवानी प्रकृति का है, जिसे आपराधिक रंग दिया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि एफआईआर का मुख्य आधार 22 नवंबर 2023 का एक कथित बंधक विलेख है, जो अपंजीकृत दस्तावेज है और ऐसे दस्तावेज के आधार पर आपराधिक दायित्व तय नहीं किया जा सकता।

बचाव पक्ष ने अदालत को आश्वस्त किया कि आरोपी जांच और न्यायिक प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेगा तथा अदालत की सभी शर्तों का पालन करेगा। वहीं शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से अधिवक्ता राकेश कुमार वर्मा के सहयोगी रामजतन यादव तथा सरकारी अधिवक्ता ने जमानत का विरोध किया।

अदालत ने आरोपी को जांच में सहयोग करने, पूछताछ के लिए बुलाए जाने पर उपस्थित होने, बिना अनुमति देश न छोड़ने तथा गवाहों को प्रभावित न करने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा है कि किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर जमानत निरस्त की जा सकती है।

क्या है पूरा मामला

मून गोयल का नाम पिछले कुछ समय से आगरा में जमीन और संपत्ति से जुड़े विवादों में चर्चा का विषय रहा है। इससे पहले भी उनके खिलाफ गरीबों की जमीन में कथित हेराफेरी, दस्तावेजी अनियमितताओं और भू-संपत्ति से जुड़े मामलों को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं।

हाल ही में वादी पक्ष की ओर से यह भी आरोप लगाया गया था कि हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद मून गोयल निचली अदालत में पेश नहीं हुए, जिसके चलते उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने की मांग की गई थी। इसी बीच सिकंदरा थाने में दर्ज मुकदमे में अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई हुई और अब हाईकोर्ट ने उन्हें राहत प्रदान कर दी है।
फिलहाल, अदालत के आदेश के बाद मून गोयल को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण मिल गया है, जबकि मामले की विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।