ताला ठीक करने आए और जेवर ले उड़े, सीसीटीवी से होटल तक पहुंची पुलिस, फिर भी हाथ से फिसले संदिग्ध
आगरा के अयोध्या कुंज में अलमारी का ताला ठीक करने आए दो लोगों पर लाखों रुपये के जेवर चोरी करने का आरोप लगा है। पीड़ित का कहना है कि पुलिस सीसीटीवी के जरिए एक होटल तक पहुंची थी, जहां संदिग्धों के दो साथी ठहरे हुए थे, लेकिन उनसे पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। घटना 3 जुलाई की है, जबकि मुकदमा 9 जुलाई को दर्ज हुआ। मामले में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
शाहगंज क्षेत्र में चोरी की वारदात के छह दिन बाद दर्ज हुआ मुकदमा, होटल में ठहरे दो संदिग्धों से पूछताछ न करने पर पीड़ित ने जताई नाराजगी
आगरा। आगरा के थाना शाहगंज क्षेत्र स्थित सराय ख्वाजा पुलिस चौकी अंतर्गत अयोध्या कुंज कॉलोनी में ताला-चाबी बनाने वालों द्वारा कथित तौर पर लाखों रुपये के जेवरात चोरी करने का मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के बाद स्थानीय पुलिस ने शुरू में मामले को गंभीरता से नहीं लिया और कई दिनों तक उन्हें थाने और चौकी के चक्कर लगाने पड़े। आखिरकार 9 जुलाई को मामला दर्ज किया गया।
पीड़ित राहुल सिंह के अनुसार, उनकी पत्नी ने घर की अलमारी का ताला खराब होने पर दो ताला-चाबी बनाने वालों को बुलाया था। दोनों अलग-अलग साइकिलों से उनके घर पहुंचे थे। आरोप है कि ताला ठीक करने के दौरान दोनों ने मौका पाकर तिजोरी में रखे लाखों रुपये के जेवरात पार कर दिए और वहां से निकल गए।
चोरी का पता चलने पर परिवार तुरंत सराय ख्वाजा पुलिस चौकी पहुंचा और तहरीर दी। आरोप है कि पुलिस ने पहले मामले को गंभीरता से नहीं लिया। पीड़ित के लगातार दबाव बनाने पर पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच शुरू की।
सीसीटीवी फुटेज खंगालते हुए पुलिस थाना रकाबगंज क्षेत्र के बालूगंज स्थित एक होटल तक पहुंची, जहां कथित तौर पर चोरी करने वालों के दो साथी ठहरे हुए थे। बताया जा रहा है कि पुलिस दोनों संदिग्धों को पूछताछ के लिए अपने साथ चौकी लेकर आई थी। उनकी साइकिलें भी पुलिस अपने कब्जे में ले आई थी।
हालांकि, पीड़ित का आरोप है कि देर रात पुलिस ने दोनों संदिग्धों को छोड़ दिया। इसके बाद दोनों अपनी साइकिलें वहीं छोड़कर फरार हो गए। आरोप यह भी है कि पुलिस ने होटल में मौजूद उनके मोबाइल फोन जब्त नहीं किए और न ही होटल प्रबंधन से कोई गंभीर पूछताछ की।
जानकारी के अनुसार, होटल में सभी लोग साइकिलों के साथ रुके हुए थे और प्रत्येक व्यक्ति ने करीब एक हजार रुपये के हिसाब से कमरा लिया था। पीड़ित परिवार का कहना है कि यदि पुलिस समय रहते और गंभीरता से कार्रवाई करती, तो इस पूरे गिरोह का खुलासा हो सकता था।
बताया जा रहा है कि यह वारदात 3 जुलाई को हुई थी, लेकिन स्थानीय चौकी पुलिस ने कई दिनों तक कार्रवाई नहीं की। पीड़ित का आरोप है कि चौकी पर उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि "क्या सिर्फ तुम्हारा ही काम हमारे पास बचा है?" इसके बाद पीड़ित ने थाना शाहगंज इंस्पेक्टर से मुलाकात कर अपनी शिकायत रखी, जिसके बाद 9 जुलाई को मुकदमा दर्ज किया गया।
अब इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली और संदिग्धों को छोड़ने को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पीड़ित परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच कर चोरी गए जेवरात बरामद करने और पूरे गिरोह को गिरफ्तार करने की मांग की है।