कार्बन-पोटाश गन: एक सस्ता ‘मज़ा’ जिसने वसूली आंखों की महंगी कीमत, अब बैन की घण्टी बजाइए!

दीपोत्सव की रातों में पटाखों की चमक जितनी रोशन दिखती है, उतनी ही छिपी हुई कहानियां भी हैं जो आंखों, हाथों और जीवनों को उजाड़ देती हैं। इस बार प्रदेश में जो सबसे खतरनाक वस्तु अचानक लोकप्रिय हुई, वह है कार्बन-पोटाश गन। सस्ती, आसानी से उपलब्ध और सोशल मीडिया के एक-एक संकेत पर चलते हुए यह जुगाड़ पूरे त्योहार में जगह बना बैठी और उसने हजारों लोगों की खुशियाँ काली कर दीं।

Nov 2, 2025 - 13:16
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कार्बन-पोटाश गन: एक सस्ता ‘मज़ा’ जिसने वसूली आंखों की महंगी कीमत, अब बैन की घण्टी बजाइए!

ये कोई फैशनेबल एडवांस्ड हथियार नहीं, बल्कि एक सस्ता नुस्ख़ा था। कार्बाइड और पोटाश के प्रयोग से बने छोटे साधन, जिन्हें युवाओं ने चटख़ारे से अपनाया। मार्केट से सुलभ सामग्री और यूट्यूबर्स की सुझाई जुगाड़ ने इसे सुरक्षा के भारी उल्लंघन के साथ जन-मन में प्रचारित कर दिया। झुग्गी-झोपड़ी से लेकर चमचमाती कारों वालों तक, सबने इसे ‘मज़ा’ समझकर अपनाया। पर मज़ा तब मज़ाक बन गया जब कई सौ लोगों की आंखें, हाथ और ज़िंदगी ही बर्बाद हो गई।

सबसे डरावना तथ्य यह है कि यह गन लगभग तुरंत नुकसान पहुंचा देती है। अक्सर मामले आंखों से जुड़े होते हैं। मात्र रील पर अपने फॊलोअर बढ़ाने के लिए जिन युवाओं ने सिंहासन संभाला था, वही कई बार दर्दनाक नतीजों का सामना कर रहे हैं। अंशतः या पूर्ण दृष्टि हानि, चोटें, अस्पताल और जीवन भर की चुनौतियां उनके सामने हैं। त्योहार पर सिर्फ खुशी बांटे जाने की जगह, अब कई परिवारों को अपनी आंखों का दर्द बांटना पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संबंधित विभागों से हर जिले में इस गन से हुई क्षति का प्रशासनिक आकलन, यदि अभी तक नहीं हुआ है तो इसे शीघ्र कराएं। बाजारों में कार्बन-पोटाश सामग्री की सहज उपलब्धता रोकने की भी आवश्यकता है। बिक्री, भंडारण और उपयोग पर सख्त नियंत्रण नहीं हुआ तो हम हर साल उसी दर्द की तस्वीर दोहराते रहेंगे।

पिछले वर्षों में हमने देखा कि कुछ प्रतिबंधों की घोषणाएं हुईं- जैसे कुछ वस्तुओं पर पाबंदी और प्रदूषण विभाग की पहलें। प्लास्टर ऒफ पेरिस की जगह मिट्टी की मूर्तियों को बढ़ावा देना था, वहां सामाजिक–प्रशासनिक प्रयास अपेक्षित सफलता नहीं दे पाए। उसी तरह, सिर्फ़ कागज़ों पर निर्देशों से काम नहीं चलेगा। ज़मीनी रोकथाम, वैकल्पिक रोजगार व जागरूकता जरूरी है।

जरूरत इस बात की है कि दीपावली पर कार्बन-पोटाश गन और उससे जुड़ी सामग्री की न केवल अस्थायी, बल्कि परमानेंट रूप से बिक्री व उपयोग पर प्रतिबन्ध लगाया जाए। प्रशासन को निर्देश दिए जाएं कि बाजारों में सामग्री की आपूर्ति रोकें। सामाजिक-आर्थिक रूप से प्रभावित विक्रेताओं के लिये वैकल्पिक व्यवस्था बनाएं। स्कूलों, मोहल्लों और सोशल मीडिया पर सुरक्षा-जागरूकता अभियान चलें। उल्लंघन पर कड़ी सज़ा का प्रावधान किया जाए।

दीवाली रोशनी का त्योहार है, दर्द का नहीं। अगर हम आज ठोस कदम नहीं उठाएंगे तो कल किसी और परिवार को अंधेरे में जीना पड़ेगा। इंसानियत और जिम्मेदारी का पाठ सिखाने का समय आ गया है, न कि जोखिम और नज़र-अंदाज़ करने का।

मुख्यमंत्री जी से निवेदन यही है कि इस गन पर स्थायी प्रतिबन्ध जारी कीजिए, ताकि हमारे बच्चे, युवा और बुज़ुर्ग आंखों और जीवन की कीमत न चुकाएं।

-राजीव गुप्ता- जनस्नेही कलम से

लोकस्वर, आगरा।

SP_Singh AURGURU Editor