कैरी के मुर्गी के अंडों पर लोगो तो दिखेगा ही, एक्सपायरी डेट भी अंकित होगी
बरेली। केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई / कैरी) बरेली से बिकने वाले अंडों पर अब कैरी की मुहर, 'लोगो' और एक्सपायरी डेट का भी जिक्र रहेगा।केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान अपने यहां से बिकने वाले अंडों की अब ब्रांडिंग करेगा।
नए साल से कैरी के बिकने वाले अंडों की अलग पहचान होगी।'सीएआरआई के निदेशक एके तिवारी ने बताया कि बाजार में सामान्य अंडों के बीच कैरी के अंडों की अलग पहचान को मुहर लगाने की योजना है। अंडों पर अंकित एक्सपायरी डेट को देख कर लोग समय से उसका प्रयोग कर लेंगे। इसके लिए 'एग स्टंपिंग मशीन' खरीदने की प्रक्रिया शुरू हो गयी है। उम्मीद है कि अगले वर्ष से कैरी ब्रांड के अंडे बाजार में दिखने लगेंगे। कैरी के अंडों की लोगों के बीच काफी डिमांड है।
सोमवार से शुक्रवार तक अंडा लेने के लिए कैरी के काउंटर पर सुबह से ही लाइन लग जाती है। यहां के अंडों की डिमांड का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 10 दिन पहले तक जो अंडा 180 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, वो अब 220 रुपये प्रति किलो में बिक रहा है। 300 रुपये सैकड़ा मिलने वाला बटेर का अंडा अब 500 रुपये हो गया है। दरअसल लोगों को यहां के अंडों पर विश्वास है।
केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान के प्रो. जयदीप रोकड़े के मुताबिक अंडे बेचने की लाइफ 10-12 दिन होती है। इसी विश्वास को और पुख्ता करने एवं बाहर बाजार में अपनी अलग पहचान के लिए कैरी अपने यहां के अंडों पर मुहर लगाएगा। लिहाजा लोगों के बीच इस जानकारी को पहुंचाने एवं अपने संस्थान के प्रचार-प्रसार के लिए यहां के अंडों पर मुहर लगाया जाएगा। भविष्य में मुहर लगे अंडों को प्लास्टिक या कागज के ट्रे में पैक कर बेचने की योजना है। उस पर तारीख अंकित होने से लोगों को आसानी से पता चल जाएगा, वी कितने दिन के अंदर अंडे को खा लेना है। इसके लिए न कोई बैनर या पोस्टर छपेगा और न ही पंपलेट या होर्डिंग व अन्य प्रचार के संसाधनों का प्रयोग होगा। केवल संस्थान ( कैरी) अपनी साख के आधार पर अंडे बेचेगा।