दो पैन कार्ड, दो बैंक और 20 लाख का लोन, आगरा में कथित बैंक फ्रॉड का मामला, मुकदमा दर्ज

आगरा के शास्त्रीपुरम निवासी संजय सिंह पर दो पैन कार्ड का इस्तेमाल कर करीब 20 लाख रुपये के लोन से जुड़ी कथित धोखाधड़ी करने का आरोप लगा है। शिकायत के अनुसार यूनियन बैंक में डिफॉल्टर होने के बावजूद उन्होंने कथित फर्जी पैन कार्ड के जरिए सेंट्रल बैंक से दूसरा लोन प्राप्त किया और निर्माण कार्य के नाम पर 11 लाख रुपये निकाले। मामले में बैंक कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। सिकंदरा थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

Jun 25, 2026 - 01:16
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दो पैन कार्ड, दो बैंक और 20 लाख का लोन, आगरा में कथित बैंक फ्रॉड का मामला, मुकदमा दर्ज

आगरा। आगरा में बैंक ऋण से जुड़ी कथित धोखाधड़ी का एक गंभीर मामला सामने आया है। सिकंदरा थाना क्षेत्र में दर्ज मुकदमे के अनुसार, शास्त्रीपुरम निवासी संजय सिंह पर दो अलग-अलग पैन कार्ड का इस्तेमाल कर करीब 20 लाख रुपये के लोन से जुड़ा फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगाया गया है। मामले में बैंकिंग प्रक्रियाओं और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है।

शिकायत के अनुसार, संजय सिंह पहले से यूनियन बैंक के ऋण खाते में डिफॉल्टर बताए गए हैं। आरोप है कि इसके बावजूद उन्होंने दूसरी पहचान और कथित फर्जी पैन कार्ड का उपयोग कर सेंट्रल बैंक से नया ऋण स्वीकृत करा लिया। शिकायतकर्ता का दावा है कि बैंक को गलत जानकारी देकर लोन प्रक्रिया पूरी कराई गई।

आरोप है कि ऋण स्वीकृत होने के बाद निर्माण कार्य के नाम पर लगभग 11 लाख रुपये की धनराशि भी निकाल ली गई। मामले की जांच के दौरान यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि एक व्यक्ति के नाम पर दो पैन कार्ड और पूर्व ऋण की जानकारी मौजूद थी तो लोन स्वीकृति की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई।

प्राथमिक जांच में बैंक कर्मचारियों की संभावित भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है। इसी कारण जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं ऋण स्वीकृति के दौरान किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी या मिलीभगत तो नहीं हुई।

मामले को गंभीर मानते हुए सिकंदरा थाना पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड, ऋण स्वीकृति फाइलों और पैन कार्ड से जुड़े अभिलेखों की जांच कर रही है। जांच के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविकता और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी। यह मामला सामने आने के बाद बैंकिंग प्रणाली में पहचान सत्यापन और ऋण वितरण प्रक्रिया को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं।