इंदिरा गांधी पर अश्लील टिप्पणी मामला: डेढ़ साल बाद भी कार्रवाई नहीं, आगरा के सीजेएम ने पुलिस से मांगी प्रगति आख्या
आगरा में पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय इंदिरा गांधी के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित अश्लील और अमर्यादित टिप्पणी के मामले में दर्ज एफआईआर पर पुलिस की धीमी कार्रवाई को लेकर अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने कोर्ट के पूर्व आदेशों का पालन न होने का आरोप लगाते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत में शपथपत्र सहित प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। इस पर सीजेएम ने पुलिस से मामले की प्रगति आख्या तलब करते हुए अगली सुनवाई 10 जुलाई 2026 निर्धारित की है।
आगरा। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय इंदिरा गांधी के विरुद्ध सोशल मीडिया पर कथित अश्लील, अभद्र और अमर्यादित टिप्पणी के मामले में दर्ज एफआईआर के बाद भी पुलिस द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई न किए जाने का मामला एक बार फिर अदालत पहुंच गया है। राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत में शपथपत्र के साथ प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर आरोप लगाया कि अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद पुलिस ने न तो विवेचना आगे बढ़ाई और न ही किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई की।
प्रार्थना पत्र के अनुसार, 11 मई 2025 को जितेंद्र तोमर उर्फ जीतू ठाकुर नामक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी के संबंध में कथित रूप से अत्यंत अश्लील, अभद्र और अमर्यादित टिप्पणी पोस्ट की थी। अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा का कहना है कि उक्त टिप्पणी से न केवल दिवंगत प्रधानमंत्री की गरिमा को ठेस पहुंची, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाएं भी आहत हुईं।
उन्होंने बताया कि इस मामले में 13 मई 2025 को थाना न्यू आगरा तथा पुलिस आयुक्त, आगरा को लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। इसके बाद उन्होंने सीजेएम न्यायालय में धारा 175(3) बीएनएसएस (पूर्व में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के समकक्ष प्रावधान) के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल किया।
मामले की सुनवाई के दौरान सीजेएम ने थाना न्यू आगरा से आख्या तलब की थी। इसके बाद न्यायालय ने 26 मई 2025 को एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया। न्यायालय के आदेश के अनुपालन में थाना न्यू आगरा पुलिस ने 27 मई 2025 को एफआईआर तो दर्ज कर ली, लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसके बाद विवेचना आगे नहीं बढ़ाई गई।
रमाशंकर शर्मा ने अदालत को बताया कि एफआईआर दर्ज होने के लगभग डेढ़ वर्ष बाद भी पुलिस ने न तो उनके बयान दर्ज किए, न ही आरोपित से पूछताछ की और न ही उसके विरुद्ध कोई अन्य कानूनी कार्रवाई की। उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को कई बार प्रार्थना पत्र दिए गए, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
प्रार्थना पत्र में अदालत से अनुरोध किया गया कि पूर्व आदेशों का पालन सुनिश्चित कराया जाए तथा विवेचना में हो रही देरी पर आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं।
मामले पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुलिस से प्रगति आख्या (स्टेटस रिपोर्ट) तलब कर ली है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 जुलाई 2026 की तिथि निर्धारित की है।