कीठम झील के जीरो ईको सेंसिटिव जोन पर सीईसी की सख्ती, यूपी शासन ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर घोषित किया था ईएसजेड, राज्यपाल तक को गुमराह कर दिया गया, अब नोटिफिकेशन वापस, सीईसी ने केंद्र के फैसले तक 10 किमी क्षेत्र को माना ईएसजेड
आगरा। सूर सरोवर पक्षी विहार (कीठम झील) को लेकर उत्तर प्रदेश शासन और वन विभाग की बड़ी प्रशासनिक चूक सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के विपरीत राज्य सरकार द्वारा जारी जीरो ईको सेंसिटिव जोन (ईएसजेड) का गजट नोटिफिकेशन अब वापस ले लिया गया है। पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता की शिकायत और सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के बाद मामला सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) पहुंचा, जहां यह स्पष्ट हुआ कि ईको सेंसिटिव जोन घोषित करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार को है, राज्य सरकार को नहीं। इसके साथ ही सीईसी ने आदेश दिया है कि जब तक केंद्र सरकार सूर सरोवर पक्षी विहार के ईको सेंसिटिव जोन की अंतिम सीमा तय नहीं कर देती, तब तक पक्षी विहार की सीमा से 10 किलोमीटर का क्षेत्र ईको सेंसिटिव जोन माना जाएगा।
मामला आगरा स्थित सूर सरोवर पक्षी विहार (कीठम झील) से जुड़ा है। पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश शासन की ओर से राज्यपाल के हस्ताक्षर से इस संरक्षित क्षेत्र के चारों ओर शून्य (जीरो) ईको सेंसिटिव जोन घोषित करने का गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया था।
बताया गया कि इसका प्रस्ताव आगरा वन विभाग ने तैयार किया था, जिसे तत्कालीन जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजा गया। इसके बाद मुख्य वन संरक्षक स्तर से प्रस्ताव आगे बढ़ा और अंततः राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद अधिसूचना जारी कर दी गई।
डॉ. शरद गुप्ता ने उठाई आपत्ति, लेकिन अनसुनी कर दी गई
आगरा के पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता ने इस निर्णय पर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने सबसे पहले आगरा में वन विभाग के अधिकारियों से इस संबंध में बातचीत की। उनके अनुसार, उस समय संबंधित डीएफओ ने दावा किया कि उन्हें ऐसा निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त है।
इसके बाद डॉ. गुप्ता ने उत्तर प्रदेश शासन को कई शिकायतें भेजीं और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि ईको सेंसिटिव जोन घोषित करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। हालांकि शासन स्तर पर उनकी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचे पर्यावरणविद डॊ. शरद गुप्ता
शासन से राहत नहीं मिलने पर डॉ. शरद गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने अपनी याचिका में बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर सूर सरोवर पक्षी विहार का जीरो ईको सेंसिटिव जोन घोषित कर दिया है।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि किसी भी राष्ट्रीय उद्यान या वन्यजीव अभयारण्य के लिए ईको सेंसिटिव जोन की अधिसूचना जारी करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार को है।
सीईसी की सुनवाई में शासन नहीं दे सका जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) को भेज दिया। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश शासन के प्रतिनिधि भी उपस्थित हुए।
सुनवाई में सीईसी ने पूछा कि जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि ईको सेंसिटिव जोन घोषित करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार को है, तो उत्तर प्रदेश सरकार ने किस अधिकार के तहत सूर सरोवर पक्षी विहार के लिए जीरो ईको सेंसिटिव जोन की अधिसूचना जारी की। बताया गया कि शासन के प्रतिनिधि इस प्रश्न पर निरुत्तर थे।
सरकार ने वापस लिया गजट नोटिफिकेशन
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश शासन ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए राज्यपाल के हस्ताक्षर से जारी जीरो ईको सेंसिटिव जोन संबंधी गजट अधिसूचना को वापस ले लिया। इस कदम के साथ राज्य सरकार द्वारा जारी वह आदेश प्रभावहीन हो गया, जिसे लेकर पर्यावरणविद लगातार सवाल उठा रहे थे। वन विभाग की ओर से दिए गये एफिडेविट में 14 हेक्टेयर भूमि के नोटिफिकेशन के लिए आठ हफ्ते का समय मांगा गया है।
केंद्र के फैसले तक 10 किलोमीटर क्षेत्र रहेगा ईको सेंसिटिव जोन
सीईसी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि जब तक केंद्र सरकार सूर सरोवर पक्षी विहार (कीठम झील) के ईको सेंसिटिव जोन की अंतिम सीमा निर्धारित नहीं कर देती, तब तक पक्षी विहार की बाहरी सीमा से 10 किलोमीटर का पूरा क्षेत्र ईको सेंसिटिव जोन माना जाएगा।
इस आदेश का प्रभाव क्षेत्र में प्रस्तावित निर्माण गतिविधियों, औद्योगिक परियोजनाओं तथा पर्यावरणीय स्वीकृतियों पर भी पड़ सकता है।
पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण फैसला

सीईसी का यह आदेश सूर सरोवर पक्षी विहार जैसे संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्र के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। जीरो ईको सेंसिटिव जोन तय करते समय वन विभाग के अधिकार यह भूल गये कि पक्षी विहारों में प्रवास करने वाले पक्षी और जलीय जीव केवल पक्षी विहारी की बाउंड्री तक सीमित नहीं रहते। इसलिए पक्षी विहार के आसपास दस किलोमीटर का एरिया सेंसिटिव जोन माना जाता है।
-डॊ. शरद गुप्ता, पर्यावरणविद, आगरा।