सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने कहा- पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण अभी परीक्षण के दौर में, अगले साल सामने आएंगे नतीजे, पुरानी गाड़ियों को नुकसान के दावों पर सरकार का पक्ष- मैकेनिकल क्षति के ठोस प्रमाण नहीं, राष्ट्रीय ऊर्जा नीति और किसानों के हित में आगे बढ़ रहा एथेनॉल मिशन

नई दिल्ली। पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (ई-20) को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में बड़ा बयान दिया। सरकार ने स्पष्ट किया कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने की प्रक्रिया अभी परीक्षण (एक्सपेरिमेंट) के चरण में है और इसके वास्तविक परिणाम अगले वर्ष तक सामने आएंगे। साथ ही सरकार ने यह भी कहा कि ई-20 पेट्रोल से पुरानी गाड़ियों को मैकेनिकल नुकसान पहुंचने के कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण अब तक उपलब्ध नहीं हैं। केंद्र ने दोहराया कि यह नीति देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने, किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से लागू की जा रही है।

Jun 30, 2026 - 18:42
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सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने कहा- पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण अभी परीक्षण के दौर में, अगले साल सामने आएंगे नतीजे, पुरानी गाड़ियों को नुकसान के दावों पर सरकार का पक्ष- मैकेनिकल क्षति के ठोस प्रमाण नहीं, राष्ट्रीय ऊर्जा नीति और किसानों के हित में आगे बढ़ रहा एथेनॉल मिशन

सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने यह पक्ष उस समय रखा, जब भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही थी। यह याचिका कर्नाटक हाई कोर्ट के 23 जून के आदेश को चुनौती देते हुए दाखिल की गई है।

हाई कोर्ट के आदेश से जुड़ा है पूरा मामला

कर्नाटक हाई कोर्ट ने अपने 23 जून के आदेश में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) को निर्देश दिया था कि एथेनॉल आवंटन बढ़ाने की मांग करने वाली एक डिस्टिलरी के आवेदन पर विचार कर निर्णय लेने के बाद ही निविदा प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाए।

बीपीसीएल ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि हाई कोर्ट का यह आदेश केंद्र सरकार की 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण वाली राष्ट्रीय नीति के क्रियान्वयन को प्रभावित कर सकता है।

सरकार बोली- अगले साल तक मिलेंगे परीक्षण के परिणाम

सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि सरकार फिलहाल 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण के प्रभावों का परीक्षण कर रही है। उन्होंने कहा, सरकार 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का प्रयोग कर रही है। अगले साल तक इसके परिणाम हमारे सामने होंगे।

सरकार ने अदालत में यह भी स्पष्ट किया कि ई-20 पेट्रोल से वाहनों को मैकेनिकल नुकसान होने के दावों के समर्थन में अभी तक कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए केवल आशंकाओं के आधार पर राष्ट्रीय नीति पर सवाल नहीं उठाए जा सकते।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- पहले हाई कोर्ट क्यों नहीं गए?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बीपीसीएल से पूछा कि उसने कर्नाटक हाई कोर्ट की खंडपीठ के समक्ष अपील करने के बजाय सीधे सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा क्यों खटखटाया।

इस पर अटॉर्नी जनरल ने बताया कि एथेनॉल आपूर्ति के अनुबंध अक्टूबर 2025 में ही अंतिम रूप दिए जा चुके थे और इसी तरह के मामले देश के विभिन्न हाई कोर्ट में लंबित हैं। ऐसे में अलग-अलग अदालतों में सुनवाई से राष्ट्रीय नीति के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न हो सकती है।

ट्रांसफर पिटीशन दाखिल करने की मांगी अनुमति

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में ट्रांसफर पिटीशन दाखिल करने की अनुमति भी मांगी। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि अक्टूबर से पहले इस विवाद का समाधान जरूरी है, क्योंकि उसी समय एथेनॉल आपूर्ति अनुबंधों के नवीनीकरण की प्रक्रिया शुरू होगी।

उन्होंने अदालत से कहा कि यदि अलग-अलग हाई कोर्ट में सुनवाई चलती रही तो निर्णय में अनावश्यक देरी होगी और राष्ट्रीय नीति प्रभावित होगी।

समय से पांच वर्ष पहले हासिल किया ई-20 लक्ष्य

भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित समय से पांच वर्ष पहले ही हासिल कर लिया था। पिछले वर्ष यह लक्ष्य पूरा होने के बाद एक अप्रैल से देशभर में तेल विपणन कंपनियों ने ई-20 मिश्रित पेट्रोल की आपूर्ति शुरू कर दी।

अब केंद्र सरकार ने वर्ष 2030 तक पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाकर 30 प्रतिशत तक पहुंचाने का नया लक्ष्य निर्धारित किया है। सरकार का मानना है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, किसानों को अतिरिक्त आय मिलेगी और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी।

SP_Singh AURGURU Editor