आगरा के पर्यावरण पर चैम्बर का बड़ा प्लान: मेट्रो लाइनों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग हो, हर फैक्ट्री में दो पेड़ लगाने का प्रस्ताव, रेडियेशन कंट्रोल की मांग
आगरा। शहर में पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और सौंदर्यीकरण को लेकर नेशनल चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे हैं। चैम्बर ने आगरा मेट्रो लाइन पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था न होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसे तत्काल विकसित करने की मांग की है। इसके साथ ही प्रत्येक फैक्ट्री में कम से कम दो पेड़ लगाने का अभियान चलाने, अधिक रेडियेशन वाले क्षेत्रों में रेडियेशन मापने वाले उपकरण लगाने, बायोलॉजिकल पौधों के माध्यम से रेडियेशन कम करने तथा अंबेडकर पुल के समीप चौक को गोद लेकर उसका पर्यावरण अनुकूल विकास और आकर्षक थ्री-डी डिजाइन तैयार करने पर भी मंथन किया गया।
चैम्बर सभागार में आयोजित पर्यावरण संरक्षण प्रकोष्ठ की बैठक की अध्यक्षता चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल ने की। बैठक में पर्यावरण संरक्षण प्रकोष्ठ के चेयरमैन गोपाल खंडेलवाल ने शहर में पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और सौंदर्यीकरण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा कर भविष्य की कार्ययोजना प्रस्तुत की।
बैठक में राहुल राना ने कहा कि आगरा में मेट्रो रेल परियोजना शहर के विकास की दिशा में स्वागत योग्य कदम है, लेकिन मेट्रो लाइन के निर्माण के दौरान रेन वाटर हार्वेस्टिंग की समुचित व्यवस्था न किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मेट्रो लाइन के नीचे और आसपास के क्षेत्रों में वैज्ञानिक एवं प्रभावी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम विकसित किया जाना चाहिए, ताकि वर्षा का पानी नालियों में बहने के बजाय भूजल रिचार्ज में उपयोग हो सके। इससे शहर का गिरता भूजल स्तर सुधारने में मदद मिलेगी और जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल ने घोषणा की कि चैम्बर पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने के उद्देश्य से प्रत्येक फैक्ट्री में कम से कम दो पेड़ लगाने का विशेष अभियान शुरू करेगा। इस अभियान के तहत औद्योगिक इकाइयों को अपने परिसर और आसपास हरित क्षेत्र विकसित करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी भी उद्योगों को निभानी होगी।
पूर्व अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने बताया कि हाल ही में चैम्बर के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी मनीष बंसल से मुलाकात कर अंबेडकर पुल से यमुना किनारे उतरते हुए चौक को चैम्बर को गोद देने का अनुरोध किया था। चैम्बर ने वहां सौंदर्यीकरण, हरित क्षेत्र विकसित करने, पौधारोपण, स्वच्छता व्यवस्था और आकर्षक लाइटिंग की जिम्मेदारी लेने का प्रस्ताव रखा था। जिलाधिकारी ने इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक स्वीकृति देते हुए चौक की थ्री-डी डिजाइन प्रस्तुत करने को कहा है। बैठक में इस डिजाइन पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया और अंतिम रूप मिलने के बाद इसे जिलाधिकारी को भेजने का निर्णय लिया गया।
बैठक में शहर में बढ़ते रेडियेशन के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल ने कहा कि रेडियेशन के प्रभाव को कम करने के लिए अधिक से अधिक बायोलॉजिकल पौधे लगाए जाने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि जहां बड़े-बड़े मोबाइल टॉवर स्थापित हैं, वहां रेडियेशन मापने वाले उपकरण लगाए जाएं और वैज्ञानिक तरीके से पौधारोपण कर रेडियेशन के प्रभाव को कम करने की दिशा में काम किया जाए।
बैठक के दौरान उत्तरी बाईपास का वाहन चालकों द्वारा पर्याप्त उपयोग न किए जाने के मुद्दे पर भी चिंता व्यक्त की गई। इस पर संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर लोगों को उत्तरी बाईपास के उपयोग के लिए जागरूक करने की आवश्यकता बताई गई।
बैठक में चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल, पर्यावरण संरक्षण प्रकोष्ठ के चेयरमैन गोपाल खंडेलवाल, उपाध्यक्ष अम्बा प्रसाद गर्ग, पूर्व अध्यक्ष मनीष अग्रवाल, सदस्य राजीव सक्सेना, जयकिशन गुप्ता, नीरज गुप्ता तथा सुशील बंसल सहित अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।