दिसंबर तक रिप्लेस हो सकते हैं चीता- चेतक, लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर होगा तैयार, दिसंबर से डिलीवरी
पिछले कुछ सालों से कई चीता और चेतक हेलिकॉप्टर दुर्घटना का शिकार हुए हैं। इन्हें रिप्लेस करने की जरूरत कई सालों से बताई जा रही है।
बेंगलुरु । इंडियन एयरफोर्स और आर्मी को अपने बेहद पुराने हो चुके चीता-चेतक हेलिकॉप्टर को रिप्लेस करने के लिए यूटिलिटी हेलिकॉप्टर की जरूरत है। लेकिन अब तक ये जरूरत के हिसाब से तैयार नहीं हुए हैं। अब एचएएल के एमडी रवि के. ने कहा कि हमें उम्मीद है कि हम दिसंबर तक सारा काम पूरा कर इन्हें सेना की जरूरत के हिसाब से तैयार कर लेंगे।
इंडियन आर्मी और एयरफोर्स लेह और सियाचिन जैसे दुर्गम इलाकों में सामान पहुंचाने और लोगों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए चीता और चेतक हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल करती है। लेकिन पिछले कुछ सालों से कई चीता और चेतक हेलिकॉप्टर दुर्घटना का शिकार हुए हैं। इन्हें रिप्लेस करने की जरूरत कई सालों से बताई जा रही है।
एचएएल के सीएमडी ने कहा किे एलयूजे-1 लगातार उड़ान भर रहा है। हमने 12 प्रोटोटाइप बनाए हैं। सर्विसेज की जो जरूरत थी वह अभी पूरी नहीं हुई है। फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम को फाइन ट्यून करने की जरूरत है और ऑटोरोटेशन पर भी काम करना है। हमने कुछ ट्रायल किए हैं। उन्होंने कहा कि दिसंबर तक हमें यह रिक्वायरमेंट पूरी कर देने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि सिविल को भी यह हेलिकॉप्टर चाहिए और हम इसका सिविल हेलिकॉप्टर भी प्लान कर रहे हैं।
इंडियन एयरफोर्स के सुखोई फाइटर जेट को अपग्रेड कर सुपर सुखोई बनाने का भी प्लान है। इस पर रवि के. ने कहा कि अभी हमें ग्राहक की तरफ से इस बारे में ऑर्डर मिलना बाकी है। हालांकि हमें पूरा भरोसा है कि यह ऑर्डर मिलेगा। साथ ही हमने अपने स्तर पर अपने पैसे से सुखोई के स्वदेशी अपग्रेड का काम शुरू किया है। इसमें रडार समेत विमान के 40 से ज्यादा सिस्टम और उपकरणों को अपग्रेड करने की योजना है। इसमें हम डीआरडीओ के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। एक बार सीसीएस की मंजूरी मिल जाती है तो सिस्टम का सर्टिफिकेशन पूरा होने में करीब पांच साल का वक्त लगेगा।
एयरफोर्स को अपनी कम होती फाइटर स्क्वॉड्रन के बीच एलसीए मार्क-1ए फाइटर जेट का इंतजार है। इसमें पहले ही करीब 2 साल की देरी हो चुकी है। ये एयरफोर्स को कब मिलने शुरू होंगे, इस पर एचएएल के सीएमडी रवि के. ने कहा कि अभी रडार के इंटीग्रेशन की प्रकिया चल रही है। पहली बार एईएसए रडार को एसीए में लगाया जा रहा है। करीब 92-95 फीसदी तैयार है, लेकिन अभी 100 फीसदी तैयार नहीं है।
रवि के. ने कहा कि पिछले कई महीनों से ऐसा हो रहा है कि हम एक समयसीमा बताते हैं, लेकिन प्रक्रिया उम्मीद से ज्यादा वक्त ले रही है। इसलिए मैं अभी कोई समयसीमा नहीं बता रहा हूं। पहले हमें यह इंटीग्रेशन प्रक्रिया पूरी कर लेने दीजिए। इंटीग्रेशन एक बार पूरा हो जाने के बाद डिलीवरी में 30 से 45 दिन लगेंगे। हमारे पायलट कुछ उड़ानें भरेंगे और हर चीज की दोबारा जांच करेंगे। इसके बाद हम ग्राहक (एयरफोर्स ) को बुलाएंगे और वह भी विमान उड़ाकर देखेंगे। सीएमडी ने कहा कि हमने कहा था कि सितंबर में हम वायुसेना के पास वापस जाएंगे। अभी सितंबर खत्म होने में समय है। रडार और बाकी चीजों के लिए उड़ान परीक्षण अभी भी चल रहे हैं। अगर हम इस महीने तक ये सभी परीक्षण पूरे कर लेते हैं तो हम वायुसेना के पास जाकर कहेंगे कि अब हम विमान की स्वीकृति की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पास अभी 10 इंजन और 27 एयरफ्रेम तैयार हैं। इसलिए उम्मीद है कि हम इन्हें इस वित्त वर्ष में डिलीवर कर सकेंगे।