अमेरिका ने दी 100 फीसदी टैरिफ की धमकी तो भारत के साथ खड़ा हुआ चीन, दिया करारा जवाब

चीन ने रूस से तेल लेने पर अमेरिका के 100 फीसदी टैर‍िफ लगाने के व‍िधेयक का कड़ा व‍िरोध क‍िया है। चीन ने कहा क‍ि व्‍यापार में तीसरे पक्ष की दखल मंजूर नहीं है। भारत पर टैर‍िफ का खतरा मंडरा रहा है।

Sep 18, 2026 - 20:48
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अमेरिका ने दी 100 फीसदी टैरिफ की धमकी तो भारत के साथ खड़ा हुआ चीन, दिया करारा जवाब

बीजिंग। अमेरिकी संसद ने रूसी तेल खरीदने पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने वाले व‍िधयक को पारित कर दिया है। अब यह बिल राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के पास साइन होने के लिए चला गया है। इस व‍िधेयक के न‍िशाने पर भारत और चीन हैं। चीन ने अब अमेरिका पर पलटवार किया है और भारत का समर्थन किया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह पुरजोर तरीके से एकतरफा प्रतिबंधों का व‍िरोध करता है जो अंतरराष्‍ट्रीय कानून पर आधारित नहीं हैं। ऐसे प्रतिबंधों को संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद का भी सपोर्ट नहीं है। चीन ने यह भी कहा कि किसी भी देश के साथ उसके सामान्य व्यापार और आर्थिक सहयोग में तीसरे पक्ष का दखल या दबाव नहीं होना चाहिए।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस पर प्रतिबंध लगाने तथा भारत और चीन जैसे उसके तेल एवं गैस खरीदार देशों पर भारी शुल्क लगाने का अधिकार देने के लिए अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने एक विधेयक पारित किया है। विधेयक के बारे में पूछे जाने पर, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि चीन ऐसी किसी भी कार्रवाई का विरोध करता है, जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी न मिली हो। गुओ ने कहा, ‘चीन समानता और पारस्परिक लाभ के आधार पर दूसरे देशों के साथ सामान्य आर्थिक और व्यापारिक सहयोग करता है।’

उन्होंने कहा, ‘इस तरह का सहयोग किसी तीसरे पक्ष को निशाना नहीं बनाता है और यह किसी तीसरे पक्ष के दबाव से मुक्त होगा। चीन ‘अधिकार क्षेत्र से बाहर कानून लागू करने की कोशिश’ और एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध करता है, जिनका अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है और जिन्हें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी नहीं मिली है।’ ट्रंप के साथ शिखर बैठक के लिए अगले हफ्ते चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की वाशिंगटन यात्रा से पहले, चीन ने रूस से तेल और गैस खरीदने के मामले में किसी भी तरह के टैरिफ (शुल्क) को जोड़ने का फिर से विरोध किया।


यह शिखर बैठक 24-25 सितंबर को होनी है। इस बीच, चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि बीजिंग और वाशिंगटन पारस्परिक शुल्क व्यवस्था पर समझौते तक पहुंचने के लिए बातचीत कर रहे हैं। ‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ को अमेरिकी सीनेट ने पिछले महीने पारित किया था। प्रतिनिधि सभा ने बुधवार शाम इसे 159 मतों के मुकाबले 262 वोट से मंजूरी दे दी। अब इसे ट्रंप के पास भेजा जाएगा, जिस पर उनके हस्ताक्षर होने के बाद यह कानून बन जाएगा। विधेयक के पक्ष में 203 रिपब्लिकन, 58 डेमोक्रेट और एक निर्दलीय सांसद ने मतदान किया। वहीं, रिपब्लिकन पार्टी के सात और 152 डेमोक्रेट सांसदों ने इस विधेयक का विरोध किया।

डेमोक्रेट सांसदों का विरोध मुख्य रूप से ट्रंप को दिए जाने वाले शुल्क लगाने के अधिकार को लेकर था। इस विधेयक का नाम दक्षिण कैरोलाइना के रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है, जिनका रूस के खिलाफ इस विधेयक के लिए समर्थन जुटाने में एक साल से अधिक समय बिताने के बाद जुलाई में निधन हो गया था। विधेयक में रूस के नेतृत्व और उसके ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ उन जहाजों के ‘छद्म बेड़ों’ पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है, जो मॉस्को को तेल की आपूर्ति पर लगे प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं।

इसके अलावा, विधेयक में ट्रंप को चीन, भारत और अन्य देशों पर कड़े शुल्क लगाने का अधिकार देने का भी प्रस्ताव है, ताकि इन देशों की रूसी तेल और गैस पर निर्भरता कम की जा सके। इसमें ईरान पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का भी प्रावधान है। विधेयक पारित होने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा, ‘चीन और भारत, आपको अपना तेल और गैस कहीं और से खरीदना होगा।’