पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता अब 10 करोड़ तक के टेंडर स्वीकृत कर सकेंगे, सीएम योगी ने बढ़ाए अधिकार
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में बड़ा निर्णय लिया है। विभागीय अफसरों के वित्तीय अधिकारों में तीन दशक बाद भारी बढ़ोतरी करते हुए मुख्यमंत्री ने इन्हें पांच गुना तक बढ़ाने की स्वीकृति दी है। अब विभागीय इंजीनियर विकास कार्यों की स्वीकृति में अधिक सक्षम होंगे, जिससे निर्माण परियोजनाओं की गति तेज होगी और फाइल प्रक्रिया में देरी समाप्त होगी।
अब मुख्य अभियंता को 10 करोड़ तक की स्वीकृति का अधिकार
शासन के नए निर्णय के अनुसार अब मुख्य अभियंता को 10 करोड़ रुपये तक के निर्माण कार्यों की स्वीकृति देने का अधिकार होगा, जबकि पहले यह सीमा केवल 2 करोड़ रुपये थी। इसी प्रकार अधीक्षण अभियंता के अधिकार भी 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दिए गए हैं।
अधिशाषी अभियंता को अब 2 करोड़ तक का अधिकार
अधिशाषी अभियंता, जिन्हें पहले 40 लाख रुपये तक के कार्यों की स्वीकृति का अधिकार था, अब 2 करोड़ रुपये तक के निर्माण कार्यों को अपने स्तर से मंजूरी दे सकेंगे। इसी तरह सहायक अभियंताओं के अधिकार भी छोटे और सीमित टेंडरों के लिए बढ़ाए जाएंगे।
30 साल पुराने ढांचे में सुधार
मुख्यमंत्री की बैठक में यह तथ्य सामने आया कि विभाग के इंजीनियरों के वित्तीय अधिकार 1995 से अपरिवर्तित चले आ रहे हैं। इस दौरान निर्माण लागत करीब साढ़े पांच गुना तक बढ़ चुकी है, लेकिन लागत वृद्धि के अनुपात में अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों में कोई संशोधन नहीं किया गया था।
मुख्यमंत्री योगी ने स्पष्ट कहा कि विकास कार्यों की समयसीमा में देरी अस्वीकार्य है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि फाइल अनुमोदन की प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और परिणाममुखी बनाया जाए। वित्तीय अधिकारों में वृद्धि से अब विभागीय स्तर पर तेजी से निर्णय लिए जा सकेंगे और उच्च स्तर पर अनावश्यक फाइल लंबित रहने की समस्या खत्म होगी।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए लोक निर्माण विभाग की भूमिका सबसे अहम है। जब तक निर्णय का अधिकार स्थानीय स्तर पर मजबूत नहीं होगा, तब तक कार्य संस्कृति में अपेक्षित गति नहीं आएगी।